ना LPG चाहिए, ना PNG...बिजली से जलेगी इस स्टोव की लौ, आ गया नया तकनीक का चूल्हा

What is Electric Stove: एक ऐसा आधुनिक स्टोव आया है जिसमें ना LPG की जरूरत है, ना PNG कनेक्शन की, बल्कि यह पूरी तरह बिजली से चलता है. खास बात यह है कि LPG गैस की तरह इसमें लौ भी निकलती है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं...

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इलेक्ट्रिक स्टोव
X/ @JoshiPralhad

Electric Stove: मिडिल ईस्ट में तनाव का असर भारत पर भी देखने को मिला. देश के कई हिस्सों से गैस की किल्लत की खबरें सामने आईं. इस स्थिति में कुछ लोगों ने LPG से PNG कनेक्शन पर स्विच कर लिया, तो कई लोगों ने इंडक्शन इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. इसी बीच अब रसोई में एक नई तकनीक ने दस्तक दी है. दरअसल, ऐक ऐसा आधुनिक स्टोव आया है जिसमें ना LPG की जरूरत है, ना PNG कनेक्शन की, बल्कि यह पूरी तरह बिजली से चलता है. खास बात यह है कि LPG गैस की तरह इसमें लौ भी निकलती है.

बिजली से चलेगा फ्लेम वाला चूल्हा 

शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि उन्होंने एक ऐसे आधुनिक चूल्हे का प्रदर्शन देखा, जो बिजली से चलता है लेकिन इसमें गैस की तरह लो फ्लेम निकलती है. यह तकनीक पारंपरिक LPG चूल्हे की तरह ही खाना बनाने का अनुभव देती है. उन्होंने इस तकनीक को बेहद प्रभावशाली बताया और कहा कि अगर भारतीय कंपनियां इसे अपनाकर देश में बड़े स्तर पर उत्पादन करें, तो यह कुकिंग के तरीके को बदल सकता है. 


खाना पकाना होगा सस्ता

केंद्रीय मंत्री ने खास तौर पर इस तकनीक को सरकार की पीएम सूर्य घर योजना से जोड़कर देखा. उन्होंने कहा कि अगर इस इलेक्ट्रिक चूल्हे को सोलर ऊर्जा से जोड़ा जाए, तो यह घरों में खाना पकाने को न सिर्फ साफ-सुथरा बल्कि लंबे समय में सस्ता भी बना सकता है. उन्होंने कहा कि जब यह तकनीक पीएम सूर्य घर योजना के साथ जुड़ती है, जो घरों को सोलर ऊर्जा से बिजली बनाने में सक्षम बनाती है, तो यह LPG पर निर्भरता कम करने में गेम चेंजर साबित हो सकती है.

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सब्सिडी का बोझ और प्रदूषण होगा कम

भारत सरकार घरेलू स्तर पर रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में रूफटॉप सोलर सिस्टम तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. पीएम सूर्य घर के इस बयान को सरकार के उस बड़े लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करना और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाना शामिल है. इस तरह की तकनीक से न केवल सब्सिडी का बोझ कम होगा, बल्कि प्रदूषण भी घटेगा और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी.

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