Param-2 AI Model: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भारत एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. AI Impact Summit 2026 में 'परम-2' नाम का बहुभाषी एआई मॉडल लॉन्च किया जाएगा, जिसमें 17 अरब पैरामीटर होंगे. 'भारतजेन' पहल के तहत बनाया जा रहा परम-2 भारत का अपना स्वदेशी, संप्रभु AI मॉडल है, जिसे खास तौर पर भारत की अलग-अलग भाषाओं, प्रशासनिक जरूरतों और सांस्कृतिक संदर्भों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है. यह मॉडल भारत के लिए विशेष रूप से ऑप्टिमाइज्ड AI तकनीक तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
भारतजेन विज्ञान और डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST) की ओर से समर्थित भारत की राष्ट्रीय जनरेटिव एआई पहल है. पिछले कुछ सालों में इस कार्यक्रम ने बहुत मजबूत आधार तैयार किया है. इसी कारण आज भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जो बड़े और उन्नत एआई मॉडल खुद विकसित करने की क्षमता रखते हैं.
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क्यों है खास?
'परम-2' भारत की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं को सपोर्ट करता है, जिसे 'भारत डेटा सागर' के तहत भारत से जुड़े डाटासेट्स पर ट्रेन किया गया है. यह मॉडल 'मिक्सचर-ऑफ-एक्सपर्ट्स' आर्किटेक्चर पर आधारित है, जिससे यह हार्ड बहुभाषी कार्यों को बेहतर और प्रभावी ढंग से संभालने में सक्षम होता है.
AI फ्यूचर बनाना मकसद
भारतजेन के प्रमुख आर्किटेक्ट में से एक, आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर गणेश रामकृष्णन ने कहा कि यह लॉन्च सिर्फ एक नया एआई मॉडल जारी करना नहीं है. उन्होंने बताया कि भारतजेन कई लोगों और संस्थानों की मिलकर की गई मेहनत का नतीजा है. उनका कहना है कि इसका मकसद यह है कि भारत अपना AI फ्यूचर खुद बना सके और उस दिशा में आगे बढ़ सके.
चैटजीपीटी या गूगल जेमिनी से कैसे है अलग?
चैटजीपीटी (ChatGPT) या गूगल जेमिनी (Google Gemini) जैसे बड़े ग्लोबल एआई प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले भारतजेन अपना एक अलग मॉड अपनाता है. भारतजेन किसी बिजनेस-टू-कंज्यूमर सर्विस की तरह काम नहीं करता. इसके बजाय, इसके एआई मॉडल को 'राष्ट्रीय सार्वजनिक डिजिटल संपत्ति (Public Digital Good)' के रूप में जारी किया जाता है. इसका फायदा यह है कि सरकारी विभाग, बैंक, अस्पताल, अदालतें और स्कूल–कॉलेज इन मॉडलों को अपने सिस्टम में अपने तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं.














