Claim Compensation for Road Accident: देश में बढ़ते ट्रैफिक और लापरवाही के चलते हर दिन हजारों सड़क हादसे सामने आते हैं. इन दुर्घटनाओं में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं, तो कई बार किसी की जान तक चली जाती है. ऐसे मामलों में कानून में मुआवजे (कंपनसेशन) का प्रावधान तो है, लेकिन सही जानकारी के अभाव में अधिकांश पीड़ित या उनके परिवार इसका लाभ नहीं उठा पाते. बहुत कम लोगों को पता होता है कि सड़क दुर्घटना के बाद मुआवजा कौन ले सकता है, किन परिस्थितियों में मिलता है और इसके लिए आवेदन कैसे करना होता है. इसी वजह से कई हकदार लोग अपने अधिकार से वंचित रह जाते हैं. इस संबंध में पूर्व कार्यकारिणी सदस्य, शाहदरा बार एसोसिएशन, कड़कड़डूमा कोर्ट दिल्ली, एडवोकेट दीपक ठुकराल से जानिए सड़क दुर्घटना हो जाती है तो कैसे लें मुआवजा? किन-किन परिस्थितियों में मुआवजा मिलता है और पूरा प्रोसेस क्या है?
सड़क दुर्घटना हो जाती है तो कैसे लें मुआवजा?
एडवोकेट दीपक ठुकराल ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति का एक्सीडेंट हो जाए और वह घायल हो जाए, तो सबसे पहले पीड़ित व्यक्ति एफआईआर दर्ज करवाएगा. इसके अलावा सड़क दुर्घटना में अगर किसी व्यक्ति की मौत हो जाए तो पीड़ित के परिजन संबंधित थाने में मुकदमा दर्ज करावाएं. सड़क दुर्घटना होने पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत पीड़ित या उसके परिवार को मुआवजा पाने का कानूनी अधिकार है. सड़क दुर्घटना मामले में पीड़ित व्यक्ति या जिस व्यक्ति की मृत्यु हुई है उसके परिजन मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अपना कंपनसेशन पीठासीन अधिकारी या मोटर व्हीकल एक्सीडेंट ट्रिब्यूनल में केस डालकर क्षतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं.
किन-किन परिस्थितियों में मिलता है मुआवजा
ऐसे मामले में पीड़ित पक्ष को अपनी आमदनी, इलाज पर हुआ खर्च, इलाज से जुड़ी सभी रिपोर्ट और पर्चियां और अपना केस साबित करने के बाद अलग-अलग हैड यानी डाइवर, गाड़ी मालिक और इंश्योरेंस कंपनी को कोर्ट पीड़ित को हर्जाना देने का आदेश दे सकता है.
आर्थिक नुकसान
चिकित्सा खर्च- अस्पताल में भर्ती होने, सर्जरी, दवा और पुनर्वास का खर्च.
कमाई का नुकसान- इलाज के दौरान असल में गंवाई गई मजदूरी.
भविष्य की कमाई का नुकसान- स्थायी या अस्थायी विकलांगता के कारण कमाई की क्षमता में कमी के लिए मुआवजा.
भविष्य के चिकित्सा खर्च- भविष्य के इलाज या सर्जरी का अनुमानित खर्च.
परिवहन और देखभाल करने वाले का खर्च- अस्पतालों तक आने-जाने और देखभाल करने वालों को भुगतान करने का खर्च.
विशेष आहार/पोषण- ठीक होने के दौरान जरूरी भोजन का खर्च.
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गैर-आर्थिक नुकसान
- दर्द और पीड़ा- शारीरिक और मानसिक आघात के लिए मुआवजा.
- सुविधाओं/लाइफस्टाइल का नुकसान- जीवन के आनंद से वंचित होने के लिए मुआवजा जैसे, चलने-फिरने या खेल-कूद में असमर्थता.
- जीवन प्रत्याशा का नुकसान- सामान्य जीवनकाल का कम हो जाना.
- विवाह की संभावनाओं का नुकसान- विशेष रूप से उन युवा पीड़ितों के लिए, जिनकी चोटों के कारण उनके विवाह के अवसर प्रभावित होते हैं.
आश्रय की हानि (Loss of Dependency)- यह मुआवजे का सबसे अहम हिस्सा होता है. इसकी गणना मृतक की आय, उम्र, आश्रितों की संख्या और भविष्य में कमाई की संभावनाओं को ध्यान में रखकर की जाती है.
संपत्ति की हानि (Loss of Estate)- मृतक की संपत्ति के मूल्य में आई कमी के लिए मुआवजा दिया जाता है. यह आमतौर पर एक तय राशि होती है.
अंतिम संस्कार का खर्च- अंतिम संस्कार में हुए उचित खर्च के लिए मुआवजा दिया जाता है. यह भी सामान्य तौर पर एक निश्चित रकम होती है.
सहचर्य की हानि- मृतक के कानूनी वारिस इस नुकसान के लिए मुआवजा पाने के हकदार होते हैं. इसमें पति या पत्नी, बच्चे, माता‑पिता यानी परिवार को भावनात्मक और सामाजिक साथ खोने के लिए मुआवजा शामिल है.
चिकित्सा खर्च- मृत्यु से पहले इलाज पर जो खर्च हुआ हो, उसका भुगतान भी मुआवजे में जोड़ा जाता है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में स्पष्ट टिप्पणी की है.
परमानेंट डिसेबिलिटी- स्थायी विकलांगता (Permanent Disability) के मामले में अगर किसी दुर्घटना में व्यक्ति स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है, तो पीड़ित की उम्र के अनुसार, सालाना आय में हुए नुकसान पर, एक तय मल्टीप्लायर लगाकर, इसी आधार पर कुल मुआवजे की राशि निकाली जाती है.














