Home Loan के लिए कर रहे हैं अप्लाई? जानें क्या है होम लोन की एलिजिबिलिटी और सभी जरूरी नियम

Home Loan Kaise Milta Hai: घर बनवाना अब पहले जैसा कठिन नहीं रह गया है. आज बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां, NBFCs और फाइनेंशियल ऐप्स से होम लोन लेना आसान हो गया है. लेकिन लोन लेने से पहले सबसे जरूरी सवाल यही होता है कि आपको होम लोन मिल सकता है या नहीं.

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होम लोन के लिए कैसे अप्लाई करें?
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Home Loan Eligibility: आज के समय में अपना घर खरीदना हर किसी का सपना होता है. लोग अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इस सपने को पूरा करने के लिए बचत में लगाते हैं. हालांकि, घर बनवाना अब पहले जैसा कठिन नहीं रह गया है. आज बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां, NBFCs और फाइनेंशियल ऐप्स से होम लोन लेना आसान हो गया है. लेकिन लोन लेने से पहले सबसे जरूरी सवाल यही होता है कि आपको होम लोन मिल सकता है या नहीं. अगर मिलेगा भी तो कितना लोन मिल सकता है. आज हम आपको होम लोन की एलिजिबिलिटी और RBI के नए नियम के बारे में बताने जा रहे हैं, ताकि आप बिना झंझट आसानी से लोन ले सकें.

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होम लोन एलिजिबिलिटी क्या होती है? (Home Loan Eligibility)

होम लोन एलिजिबिलिटी वे शर्तें हैं, जिनके आधार पर बैंक या लोन देने वाली संस्था तय करती है कि आपको होम लोन मिलेगा या नहीं, कितना लोन अमाउंट मंजूर होगा, किस ब्याज दर (Interest Rate) पर लोन मिलेगा. यह पूरी तरह आपकी फाइनेंशियल कंडीशन और उसे चुकाने की कैपसिटी पर डिपेंड करता है.

होम लोन एलिजिबिलिटी तय करने वाले फैक्टर

1. इनकम

होम लोन के लिए आपकी नेट मंथली इनकम सबसे अहम फैक्टर है. यह जिनती स्टेबल और ज्यादा होगी, उतना ही ज्यादा लोन मिलने की संभावना रहती है.

2. क्रेडिट स्कोर

क्रेडिट स्कोर (Credit Score) आपकी फाइनेंशियल डिसिप्लिन को दिखाता है. 750 या उससे ज्यादा शानदार स्कोर माना जाता है और आसान अप्रूवल होता है. 650-749 तक के स्कोर पर लोन मिल सकता है, लेकिन शर्तें कड़ी हो सकती हैं. 650 से कम स्कोर पर लोन मिलने में दिक्कत हो सकती है.

3. क्रेडिट हिस्ट्री

क्रेडिट हिस्ट्री (Credit History) में बैंक यह भी देखता है कि आपने पहले EMIs समय पर चुकाई हैं या नहीं, कभी लोन डिफॉल्ट किया है या नहीं, कितने एक्टिव लोन चल रहे हैं. साफ-सुथरी क्रेडिट हिस्ट्री भरोसा बढ़ाती है.

4. उम्र और रिटायरमेंट एज

आपकी मौजूदा उम्र और रिटायरमेंट एज लोन टेन्योर तय करती है. युवा आवेदकों को 20-30 साल का टेन्योर मिल सकता है. ज्यादा उम्र वालों को कम अवधि का लोन मिलता है.

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5. मंथली फाइनेंशियल रिस्पॉन्सिबिलिटीज

अगर आपके ऊपर पहले से कार लोन, पर्सनल लोन, एजुकेशन लोन और क्रेडिट कार्ड EMI चल रही है, तो होम लोन की एलिजिबिलिटी कम हो सकती है. आमतौर पर बैंक चाहते हैं कि आपकी कुल EMI इनकम के 40-50% से ज्यादा न हो.

होम लोन कैलकुलेटर क्या है? (What is Home Loan Calculator)

होम लोन कैलकुलेटर (Home Loan EMI Calculator) एक डिजिटल टूल है, जिसकी मदद से आप पहले ही जान सकते हैं हर महीने कितनी EMI देनी होगी, कुल कितना ब्याज चुकाना पड़ेगा, लोन की कुल लागत क्या होगी. सिर्फ आपको लोन अमाउंट, ब्याज दर, लोन पीरियड डालना होता है और तुरंत रिजल्ट मिल जाता है. इसकी मदद से आप अपने बजट के हिसाब से लोन प्लान कर सकते हैं, अलग-अलग बैंकों के ऑफर की तुलना कर सकते हैं, सही टेन्योर चुन सकते हैं और भविष्य की फाइनेंशियल टेंशन से बच सकते हैं. घर खरीदने से पहले यह टूल इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है.

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होम लोन प्री-पेमेंट क्या होता है?

प्री-पेमेंट का मतलब है तय समय से पहले होम लोन को आंशिक या पूरा चुका देना. इससे बकाया रकम कम होती है, ब्याज का बोझ घटता है, लोन जल्दी खत्म होता है. पहले लोग प्री-पेमेंट से डरते थे क्योंकि बैंक भारी चार्ज लगाते थे, लेकिन अब नियम बदल गए हैं.

RBI के नए होम लोन प्री-पेमेंट नियम

भारतीय रिजर्व बैंक ने नए प्री-पेमेंट नियम (Pre-payment Charges on Loans Directions, 2025) 1 जनवरी 2026 से लागू कर दिए है. नए नियम के अनुसार, फ्लोटिंग रेट होम लोन पर प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज नहीं लगेगा. अगर लोन 1 जनवरी 2026 के बाद एक्सेप्ट या रिन्यू हुआ है. यह नियम उधारकर्ताओं के लिए बड़ी राहत है. ये नियम पर्सनल होम लोन होल्डर्स पर बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कंपनी या NBFC से लिए गए लोन पर, प्रोफेशनल्स और माइक्रो-स्मॉल एंटरप्राइज पर लागू होंगे.

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प्री-पेमेंट कब नहीं करना चाहिए?

  • अगर इमरजेंसी के लिए कैश जरूरी है.
  • होम लोन का ब्याज बहुत कम है.
  • निवेश से ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना है.
  • बैंक मिनिमम प्रीपेमेंट लिमिट लगाता है.
  • हमेशा ब्याज बचत और निवेश रिटर्न की तुलना करके फैसला लें.
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