Ganga Expressway Inauguration: उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार को नई पहचान देने वाला देश का सबसे अनोखा, हाईटेक और सुविधाओं से लैस 6 लेन ग्रीन फील्ड गंगा एक्सप्रेसवे अब उद्घाटन के लिए तैयार है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को इस मेगा प्रोजेक्ट का उद्घाटन करेंगे. गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ़ एक एक्सप्रेसवे नहीं, बल्कि आगे बढ़ते उत्तर प्रदेश के विकास की नई इबारत है. अदाणी ग्रुप की Adani Road Transport Limited ने इसे रिकॉर्ड समय में बनाकर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की नई मिसाल कायम की है. आइए इसकी खासियतों को विस्तार से जानते हैं...
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9 वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी सेंटर्स
29 अप्रैल के उद्घाटन के बाद, 30 अप्रैल से गाड़ियां इस एक्सप्रेसवे पर दौड़ने लगेंगी और महज 5 घंटे में 600 किलोमीटर का सफर पूरा होगा. उत्तर प्रदेश के 12 जिलों और 519 गांवों को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि एक स्मार्ट सिस्टम है. इसके पूरे रूट पर 9 वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी सेंटर्स बनाए गए हैं, जहां 24 घंटे पेट्रोल, डीज़ल, CNG, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग, डॉर्मिटरी, स्टे सेंटर, स्पा, फूड कोर्ट, कैफेटेरिया, 200 कार और 20 ट्रकों की पार्किंग की सुविधा मौजूद है.
ट्रॉमा सेंटर की सुविधा
देश में पहली बार किसी एक्सप्रेसवे पर ट्रॉमा सेंटर की सुविधा दी गई है. यह छोटे अस्पताल की तरह काम करेगा, ताकि किसी दुर्घटना की स्थिति में घायलों को तुरंत इलाज मिल सके. सरकारी और प्राइवेट मेडिकल वेंडर्स के साथ टाई‑अप कर यहां पूरी मेडिकल फैसिलिटी उपलब्ध कराई जाएगी.
हर सेकंड की निगरानी
गंगा एक्सप्रेसवे को 120 किमी/घंटा की टॉप स्पीड के हिसाब से डिजाइन किया गया है. करीब 600 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर हाई‑रेजोल्यूशन कैमरों का ऐसा नेटवर्क है कि आप एक सेकंड के लिए भी निगरानी से बाहर नहीं होंगे. हर 500 मीटर और हर किलोमीटर पर कैमरे लगाए गए हैं, जो कंट्रोल रूम से आपकी स्पीड और मूवमेंट पर नजर रखते हैं. कोहरे से बचाने के लिए रेडियम पट्टियां, नींद से जगाने वाली लेन‑एंड‑स्ट्रिप्स और स्मार्ट अलर्ट सिस्टम लगाए गए हैं.
सुरक्षा का पूरा इंतजाम
सुरक्षा के लिहाज से इसे उच्च गुणवत्ता वाले तारकोल से बनाया गया है ताकि गर्मी में टायर फटने जैसी घटनाएं न हों. अवैध एंट्री और जानवरों को रोकने के लिए पूरे एक्सप्रेसवे पर 2 मीटर ऊंची सीमेंटेड दीवार बनाई गई है.
इंडस्ट्रियल और आस्था का कॉरिडोर
गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, लॉजिस्टिक हब और मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं. यह आस्था का भी कॉरिडोर है, जिससे हरिद्वार से प्रयागराज और आगे वाराणसी तक का सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान होगा. गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ ट्रांसपोर्ट या टूरिज़्म नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल ग्रोथ, रोजगार, कृषि उत्पादों की मार्केटिंग और आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बनेगा. भविष्य में इसे 8 लेन तक बढ़ाने की भी पूरी तैयारी है.
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