किसानों को घटिया बीज दिया तो 30 लाख तक का जुर्माना, सजा भी होगी! Budget सत्र में आने वाले बीज विधेयक में क्‍या-क्‍या?

किसानों को अब यह सुविधा मिलेगी कि वे QR Code स्कैन करके जान सकेंगे कि बीज कहां से आया है. इसमें यह जानकारी होगी कि बीज किस कंपनी ने बनाया, पहले किसके पास था और उसकी पूरी रजिस्ट्रेशन डिटेल.

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Seed Bill 2026: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीज विधेयक के बारे में जानकारी दी.

किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार लगातार काम कर रही है. इसके तहत सरकार न केवल उनकी आय बढ़ाने पर फोकस कर रही है, बल्कि उनका नुकसान कम करने के उपायों पर भी काम कर रही है. इन्‍हीं सुधारों और उपायों में से एक है- बीज विधेयक 2026, जिसे सरकार संसद के बजट सत्र के दौरान पेश कर सकती है. इस बारे में कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने विस्‍तार से जानकारी दी. किसानों को घटिया बीजों के चलते होने वाला नुकसान लाखों में होता है, जबकि उन्‍हें ऐसे घटिया बीज देने वाले महज 500 रुपये का जुर्माना भर कर बच निकलते थे. अब ऐसा नहीं होगा. अब घटिया बीज बेचने वालों पर 30 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. 

कृषि मंत्री ने क्‍या बताया? 

पहले यदि कोई कंपनी किसानों को घटिया बीज बेच देती थी और किसान लाखों का नुकसान उठाते थे, तो कंपनी को केवल 500 रुपये जुर्माना भरकर बच निकलने का रास्ता मिल जाता था. ये कानून 1980 के दशक में बनाया गया था, जब न तो इतनी कंपनियां बीज बेचती थीं और न ही किसान बड़े पैमाने पर खरीदते थे. अब हालात बदल चुके हैं. शिकायतें बढ़ रही थीं कि कंपनियां, मार्केटिंग के नाम पर किसानों को खराब बीज बेच रही हैं. इसी वजह से अब नए बीज विधेयक 2026 में प्रावधान होगा कि ऐसी शिकायत पर 30 लाख रुपये तक का जुर्माना और सजा दी जा सकेगी. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सरकार इसे बजट सत्र में पेश कर सकती है.

QR Code से पता चलेगा- बीज कहां से आया 

किसानों को अब यह सुविधा मिलेगी कि वे QR Code स्कैन करके जान सकेंगे कि बीज कहां से आया है. इसमें यह जानकारी होगी कि बीज किस कंपनी ने बनाया, पहले किसके पास था और उसका पूरा रजिस्ट्रेशन विवरण. इससे किसानों को दुकानदार या मार्केटिंग वालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. बीज कंपनियों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा और उनकी पहचान स्पष्ट होगी.

क्‍या परंपरागत बीजों पर भी होगी पाबंदी?

हालांकि ये कानून केवल कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले बीजों पर लागू होगा. परंपरागत बीज, जो किसान आपस में एक-दूसरे से लेते हैं, उन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा. कृषि मंत्री ने बताया कि पब्लिक सेक्टर जैसे ICR और विश्वविद्यालयों के अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा. विदेश से आने वाले बीजों की पूरी जानकारी और परीक्षण के बाद ही उन्हें बेचने की अनुमति दी जाएगी.

क्‍या होगी राज्यों की भूमिका? 

बीज विधेयक के प्रावधान राज्य सरकारों के साथ मिलकर लागू किए जाएंगे. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि राज्यों के अधिकारों से कोई समझौता नहीं होगा. राज्य सरकार की बीज समिति के माध्यम से बीज का रेगुलेशन किया जाएगा यानी कि इससे जुड़े नियम बनाए जाएंगे. 
 

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