Census 2026: जनगणना 2026 में जो लोग काम या पढ़ाई के लिए घर से दूर रह रहे हैं, उनकी गिनती वर्तमान निवास स्थान यानी जहां वह रह रहे हैं उसी शहर में ही की जाएगी, न कि उनके पैतृक गांव में. यह नियम हॉस्टल, किराए के मकान और अन्य कामकाजी पेशेवरों पर लागू होता है. आप आधिकारिक सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं.
किस पर लागू होगा ये नियम?
- हॉस्टल में रहने वाले छात्र
- दूसरे शहर में काम करने वाले प्रोफेशनल
- किराए के मकान में रहने वाले लोग
- दूसरे राज्य में काम करने वाले मजदूर
ऐसा क्यों किया जाता है?
अधिकारियों के अनुसार, यह नियम सामान्य निवास स्थान के आधार पर बनाया गया है, ताकि किसी व्यक्ति की गिनती दो बार न हो. उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति उत्तर प्रदेश का रहने वाला है, लेकिन अभी दिल्ली, मुंबई, पुणे या बेंगलुरु में रहकर काम कर रहा है, तो उसकी गिनती उसी शहर जहां वह रह रहा है में होगी. उसका नाम उसके गांव या hometown में अलग से नहीं जोड़ा जाएगा.
यह नियम क्यों बनाया गया?
इस नियम का मकसद है कि जनगणना में किसी व्यक्ति की गिनती दो बार न हो और जनसंख्या का सही रिकॉर्ड तैयार किया जा सके. इसका मतलब है वह जगह, जहां कोई व्यक्ति पिछले कुछ समय से रह रहा है या आगे भी रहने वाला है. इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि किस शहर या राज्य में कितनी आबादी है, ताकि वहां के हिसाब से सुविधाओं जैसे पानी, बिजली, सड़क, स्कूल, अस्पताल की योजना बनाई जा सके.
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वर्तमान पता ही जनगणना पता माना जाएगा
जनगणना के दौरान अधिकारी आमतौर पर किसी व्यक्ति का पुराना या स्थायी पता नहीं देखते, अगर वह लंबे समय से दूसरे शहर में रह रहा हो. अगर कोई व्यक्ति कई महीनों से नौकरी, पढ़ाई या रोजमर्रा की जिंदगी के लिए किसी दूसरे शहर में रह रहा है, तो वही जगह उसका जनगणना पता मानी जाएगी. इससे जनगणना ज्यादा सही और भरोसेमंद बनती है और आंकड़ों में भ्रम नहीं होता.














