साध्वी प्रेम बाईसा की मौत या हत्या? पिता-कंपाउंडर के बयानों में अंतर, इंजेक्शन के रहस्य ने उलझाई गुत्थी

जोधपुर की प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. इंजेक्शन लगाए जाने के समय से लेकर सीसीटीवी कैमरों के गायब होने तक, हर कदम पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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जोधपुर की प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. इस मामले में कंपाउंडर, पिता और एफआईआर (FIR) में दर्ज तथ्यों के बीच सामने आए बड़े अंतर ने पुलिस और जनता दोनों को उलझा दिया है. इंजेक्शन लगाए जाने के समय से लेकर सीसीटीवी कैमरों के गायब होने तक, हर कदम पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

विरोधाभासों का जाल: कब क्या हुआ?

साध्वी की मौत के घटनाक्रम को लेकर तीन अलग-अलग वर्जन सामने आए हैं, जो मामले को संदिग्ध बना रहे हैं. मोर्चरी में पिता ने बयान में कहा, "इंजेक्शन लगाने के महज 5 मिनट के भीतर साध्वी की मौत हो गई. वहीं, एफआईआर  में इंजेक्शन के 9 मिनट बाद तबीयत बिगड़ी और फिर मौत हुई. उधर, कंपाउंडर ने दावा किया कि आश्रम से निकलने के 20 से 25 मिनट बाद फोन आया कि बाईसा की तबीयत खराब है. 

सीसीटीवी और पोस्टमार्टम पर गहराता विवाद

इस मामले में क्षेत्रवासी रुद्र प्रतापसिंह राजपुरोहित ने कई गंभीर आरोप लगाकर सनसनी फैला दी है. उनके दावों ने आश्रम के भीतर की गतिविधियों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. आरोप है कि शुरुआत में प्रेम बाईसा के पिता ने पोस्टमार्टम करवाने से साफ इनकार कर दिया था. क्षेत्रवासियों का कहना है कि आश्रम से सीसीटीवी कैमरे हटाए गए हैं, हालांकि मौके पर कैमरों के कोई स्पष्ट निशान नहीं मिलने की बात भी कही जा रही है. चश्मदीदों का कहना है कि मौत के समय को लेकर बार-बार बयान बदले गए. कभी कुछ सेकंड तो कभी कुछ मिनटों में मौत की बात कही गई. 

Photo Credit: Instagram

जांच के घेरे में 'वो' इंजेक्शन

मामले की सबसे बड़ी कड़ी वह इंजेक्शन है, जिसे लगाने के बाद साध्वी की तबीयत बिगड़ने की बात कही जा रही है. क्या इंजेक्शन में दी गई दवा की मात्रा सही थी? क्या वह इंजेक्शन किसी प्रशिक्षित डॉक्टर की सलाह पर लगाया गया था? कंपाउंडर के बयान और पिता के दावों में 15-20 मिनट का अंतर क्यों है? 

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