साध्वी प्रेम बाईसा की चीख, पिता ने कार स्टार्ट की... मौत से पहले क्या हुआ था? सेवादार के चौंकाने वाले खुलासे

पांच दिन बीतने के बाद भी साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की गुत्थी सुलझ नहीं पाई है. जोधपुर पुलिस अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है और मौत की असल वजह अभी भी सवाल बनी हुई है. यह मौत प्राकृतिक थी या इसके पीछे कोई साजिश रची गई,

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  • पुलिस प्रेम बाईसा की मौत की असल वजह का पता लगाने के लिए गहन जांच कर रही और कोई ठोस नतीजा अभी तक नहीं निकला
  • पुलिस ने आठ सवालों की सूची तैयार की है, जो आश्रम के कर्मियों और परिवार के सदस्यों से पूछे जा रहे हैं
  • सेवादार ने बताया कि साध्वी को मौत से पहले गले में खराश थी, उसने काढ़ा भी पिया, इसके बाद अचानक आवाज सुनाई दी
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पांच दिन बीतने के बाद भी साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की गुत्थी सुलझ नहीं पाई है. जोधपुर पुलिस अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है और मौत की असल वजह अभी भी सवाल बनी हुई है. यह मौत प्राकृतिक थी या इसके पीछे कोई साजिश रची गई, इसका जवाब फिलहाल जांच के दायरे में है. मामले की कड़ियां जोड़ने के लिए जोधपुर पुलिस लगातार तफ्तीश कर रही है. इसी सिलसिले में पुलिस एक बार फिर फॉरेंसिक साइंस लैब की टीम के साथ प्रेम बाईसा के आश्रम पहुंची. जांच के दौरान प्रेम बाईसा के पिता वीरम नाथ और सेवादार सुरेश भी पुलिस के साथ मौजूद रहे. 

जोधपुर पुलिस ने इस मामले में शुरुआती पूछताछ के लिए आठ सवालों की सूची तैयार की है. ये सवाल कंपाउंडर देवी सिंह, प्रेक्षा अस्पताल के मालिक डॉक्टर प्रवीण जैन, सेवादार सुरेश और मामा गंगाराम से पूछे जा रहे हैं. इन सवालों में घटना वाले दिन का पूरा घटनाक्रम, सभी संबंधित लोगों का बैकग्राउंड, उनकी शैक्षणिक डिग्रियां, कार्यस्थल, इलाज से जुड़े दस्तावेज बैंक खातों और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ी जानकारी शामिल है. 

इस मामले में सेवादार सुरेश ने पुलिस को जो जानकारी दी है वो चौंकाने वाली है. सुरेश के मुताबिक, साध्वी प्रेम बाईसा 27 जनवरी की रात अजमेर से जोधपुर पहुंचीं और पाल रोड स्थित आरती नगर के आश्रम में रुकीं. अगले दिन सुबह उन्हें गले में खराश की शिकायत थी. उन्होंने गरारे किए और दोपहर में काढ़ा भी पिया.
28 जनवरी की शाम करीब पांच बजे साध्वी ने आश्रम के सेवादार सुरेश को फोन कर बताया कि डॉक्टर आया है और गेट खोलने को कहा. गेट खोलने पर नर्सिंगकर्मी देवी सिंह वहां मौजूद था. देवी सिंह साध्वी के कमरे में गया. उस समय सेवादार सुरेश कमरे में मौजूद नहीं था.

सुरेश के मुताबिक, देवी सिंह एक-दो मिनट में कमरे से बाहर निकल गया. उसके जाने के चार-पांच मिनट बाद आश्रम में साध्वी की तेज आवाज सुनाई दी. सुरेश के अनुसार आवाज सुनकर वह अपने कमरे से दौड़कर बाहर आया. तब तक साध्वी आश्रम के मुख्यद्वार के पास गिर चुकी थीं. उसी समय उनके पिता वीरमनाथ भी मौके पर पहुंचे. पिता ने कार स्टार्ट की और सुरेश ने साध्वी को उठाकर कार में लिटाया. रास्ते में साध्वी की सांसें अटकने लगीं. सुरेश ने सीपीआर देने का प्रयास किया. सुरेश का यह भी कहना है कि उस दौरान साध्वी कह रही थीं कि पापा मुझे न्याय दिला देना. साध्वी को पाल रोड स्थित प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. 

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