Rajasthan: 10 साल का बालक बोला- “मैं पिछले जन्म में राजा मानसिंह था!” टोंक में पुनर्जन्म का सनसनीखेज दावा

राजस्थान में टोंक के जेकमाबाद गांव में 10 साल का एक बच्चा खुद को आमेर का राजा मानसिंह बताकर चर्चा में है. परिवार इसे पुनर्जन्म मान रहा है, जबकि कई लोग इसे कल्पना बता रहे हैं, जिससे यह मामला रहस्य बन गया है. रिपोर्ट- रवीश टेलर

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Rajasthan News: राजस्थान के टोंक जिले के टोडारायसिंह क्षेत्र के जेकमाबाद गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है. यहां 5वीं कक्षा में पढ़ने वाला 10 साल का बालक कान्हाराम बैरवा दावा कर रहा है कि वह अपने पिछले जन्म में आमेर का राजा मानसिंह था. इस दावे के बाद गांव ही नहीं बल्कि आसपास के इलाकों में भी यह चर्चा का विषय बन गया है.

बचपन से ही अलग व्यवहार

परिवार के अनुसार कान्हाराम ने महज ढाई साल की उम्र में ही “राजा मानसिंह” शब्द बोलना शुरू कर दिया था. उसकी मां ग्यारसी देवी का कहना है कि बच्चे ने शुरू से ही खुद को राजपूत बताया और घर का खाना खाने से भी इनकार कर दिया. वह अलग बर्तनों में खाना खाने की जिद करता है और घर में सिंहासन की तरह बैठने की आदत भी रखता है. इतना ही नहीं वह खेलते समय युद्ध जैसी गतिविधियां भी करता है.

पिछले जन्म की कहानियां सुनाता है बच्चा

कान्हाराम का कहना है कि उसकी कुलदेवी आमेर की शिलादेवी हैं और उसने हल्दीघाटी का युद्ध लड़ा था. वह दावा करता है कि युद्ध में उसकी हार हुई थी और उसने कई युद्धों में जीता हुआ खजाना आमेर के महलों में छिपा रखा था. बच्चा यह भी कहता है कि उसकी दो रानियां थीं और जोधा उसकी बुआ थी. वह आमेर किले और मंदिरों से जुड़ी कई बातें भी बताता है, जिससे लोग हैरान हैं.

सवालों के जवाब में उलझन

हालांकि जब उससे कुछ अहम सवाल पूछे गए तो वह सही जवाब नहीं दे पाया. उदाहरण के तौर पर जब उसकी मौत की जगह के बारे में पूछा गया तो उसने “अनाज मंडी” बताया, जो ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खाता. इसी तरह हल्दीघाटी युद्ध का पूरा विवरण भी वह स्पष्ट रूप से नहीं बता सका. इससे कई लोगों के मन में संदेह भी पैदा हो रहा है.

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स्कूल में सामान्य है व्यवहार

जेकमाबाद के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले कान्हाराम के बारे में स्कूल स्टाफ का कहना है कि उसका व्यवहार सामान्य बच्चों जैसा ही है. हालांकि उन्होंने कैमरे पर बात करने से मना कर दिया. उनका कहना है कि इस मामले के बाद रोज लोग स्कूल पहुंचकर बच्चे से सवाल करते हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है और बच्चे पर भी असर पड़ सकता है.

परिवार और गांव में अलग-अलग राय

कान्हाराम की मां का मानना है कि बच्चे पर देवी की कृपा है और वह अष्टमी के दिन लोगों की समस्याओं का समाधान भी करता है. वहीं गांव के कुछ लोग इसे पुनर्जन्म का संकेत मान रहे हैं, तो कुछ इसे बच्चे की कल्पना या सुनी-सुनाई बातों का असर बता रहे हैं. फिलहाल यह मामला रहस्य बना हुआ है और हर कोई जानना चाहता है कि सच क्या है.

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