राहुल गांधी के 'नाटक' पर BJP बोली- कोई फायदा नहीं, दोबारा सरकार बनेगी

पुष्कर में राजस्थान कांग्रेस के चिंतन और प्रशिक्षण शिविर में राहुल गांधी ने एक अलग तरह से पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को संदेश देने की कोशिश की जिसकी सियासी गलियारों में चर्चा हो रही है.

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राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के साथ राहुल गांधी
IANS
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  • राहुल गांधी ने पुष्कर में कांग्रेस चिंतन शिविर में एक लघु नाटक से राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया
  • भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के इस प्रयोग को नौटंकी करार देते हुए कहा कि इससे कोई लाभ नहीं होगा
  • कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि राहुल गांधी का संदेश था कि कुर्सी जनता के काम से मिलती है
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राहुल गांधी के पुष्कर में आयोजित कांग्रेस चिंतन शिविर में शिरकत करने के बाद उनके वहां 'नाटक' की बड़ी चर्चा हो रही है. सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने नेताओं को अलग-अलग भूमिका में दिखाकर एक राजनीतिक बात रखने की कोशिश की. कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद नेताओं से अलग-अलग भूमिकाएं निभाने को कहा. कुछ नेताओं को टिकट मांगने वालों की भूमिका दी गई, जो प्रदेशाध्यक्ष के चारों ओर परिक्रमा करते दिखे. उन्होंने यह भी दिखाया कि किस तरह लोग पद पाने के लिए झुकते जाते हैं. इसके लिए राहुल गांधी ने प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को एक कुर्सी पर आशीर्वाद देने की मुद्रा में खड़ा कराया. कुछ नेताओं को उनके सामने प्रणाम करने या चापलूसी करने की मुद्रा में खड़े होने को कहा. वहीं, इसके बाद पूर्व मंत्री रामलाल जाट से उनकी कुर्सी खींचने को कहा. इसके जरिए उन्होंने नेताओं के बीच होने वाली खींचतान को  दिखाया. लेकिन राहुल गांधी के इन तरीकों को जहां एक तरफ कांग्रेस नवाचार और अच्छा संवाद कह रही है तो भाजपा ने इसे नौटंकी बताया है.

"कांग्रेस के चिंतन शिविर में ड्रामा करने से कोई फायदा नहीं होगा. राजस्थान में भजनलाल सरकार का काम और जो सुशासन है, उसे जनता पसंद कर रही है और यहां भाजपा दोबारा सरकार बनाएगी." - अविनाश गहलोत

'नौटंकी बंद करें, भाजपा दोबारा सरकार बनाएगी'

सामाजिक न्याय मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा,"राहुल गांधी नौटंकी करना बंद कर दें. यहां दोबारा भाजपा की सरकार आने वाली है. कांग्रेस के चिंतन शिविर में ड्रामा करने से कोई फायदा नहीं होगा. राजस्थान में भजनलाल सरकार का काम और जो सुशासन है, उसे जनता पसंद कर रही है और यहां भाजपा दोबारा सरकार बनाएगी."

अविनाश गहलोत ने राहुल गांधी के दौरे को प्रोपेगेंडा बताते हुए कहा, "राहुल गांधी ने यहां आकर वरिष्ठ नेताओं को नज़रअंदाज़ किया है और यह सिर्फ प्रोपेगेंडा था." गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी को कोई गंभीरता से नहीं लेता. उन्होंने कहा, "राहुल गांधी खुद ही अनुशासन में नहीं रहते हैं, यह कई बार संसद में देखने को मिला है. ऐसा व्यक्ति कैसे रोल मॉडल बन सकता है?"

वहीं, भाजपा युवा मोर्चा के राजस्थान अध्यक्ष शंकर गोरा ने कहा कि राहुल गांधी का यह संदेश चिंतन शिविर तक ही सीमित है. शंकर गोरा ने कहा,"राहुल गांधी खुद तपस्या करने के लिए विदेश जाते हैं. उन्होंने इस तरह के प्रयोग करके कांग्रेस को खत्म कर दिया है. उन्हें त्याग और तपस्या की कोई जानकारी नहीं है. उन्हें राजनीति विरासत में मिली है और तमाम प्रयोगों के बावजूद कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है. पश्चिम बंगाल इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है. राहुल गांधी नाटक करके कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे."

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पुष्कर में कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ राहुल गांधी
Photo Credit: IANS

"राहुल गांधी का संदेश था कि कुर्सी की पूजा करने से कोई फायदा नहीं है. जनता के लिए काम करेंगे तो जनता ही कुर्सी देगी." - गोविंद सिंह डोटासरा

राहुल गांधी का कुर्सी को लेकर 'संदेश'

हालांकि, राजस्थान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा राहुल गांधी के संदेश को समझ ही नहीं पाई. डोटासरा ने कहा,"राहुल गांधी का संदेश था कि कुर्सी की पूजा करने से कोई फायदा नहीं है. जनता के लिए काम करेंगे तो जनता ही कुर्सी देगी. कोई व्यक्ति विशेष कुर्सी नहीं दिलवाएगा."

कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत नियुक्त जिला अध्यक्षों की पुष्कर में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में ट्रेनिंग हुई. इस 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान राजस्थान और दिल्ली के 64 नवनियुक्त जिला अध्यक्षों को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी को मजबूत करने की ट्रेनिंग दी. इसके आखिरी दिन राहुल गांधी सभी नवनियुक्त जिला अध्यक्षों से मिलने पहुंचे.

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वहां अपने संबोधन में राहुल गांधी ने तपस्या और पूजा की भी बात रखी और कहा कि भगवान शिव की तरह तपस्या करके कांग्रेस को आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने महात्मा गांधी का उद्धरण देते हुए कहा कि तपस्या और त्याग कांग्रेस की परंपरा रहे हैं और आगे भी रहने चाहिए, जबकि भाजपा पूजा को महत्व दे रही है.

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