2 सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करे...बेअंत सिंह हत्या केस में राजोआना की याचिका पर केंद्र को SC का अल्टीमेटम

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआना की समय से पहले रिहाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दो हफ्ते का समय दिया है. कोर्ट ने साफ किया है कि अगर इस अवधि में दया याचिका पर फैसला नहीं हुआ, तो वह याचिका की मेरिट पर सुनवाई कर खुद निर्णय देगा.

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दो हफ्ते में फैसला नहीं तो राजोआना की अर्जी पर कोर्ट खुद करेगा सुनवाई
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  • सुप्रीम कोर्ट ने बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका पर केंद्र सरकार को दो सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया है
  • यदि केंद्र सरकार निर्धारित समय में फैसला नहीं करती है तो कोर्ट खुद याचिका की मेरिट पर सुनवाई करेगा
  • राजोआना 29 वर्षों से जेल में है और 15 वर्षों से मौत की सजा भुगतते हुए कैदी के रूप में बंद है
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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआना की समय से पहले रिहाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दो हफ्ते का समय दिया है. कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार इस अवधि में राजोआना की दया याचिका पर फैसला करे. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह केंद्र सरकार को यह आख़िरी मौका दे रहा है. यदि तय समय के भीतर कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो कोर्ट खुद इस याचिका की मेरिट पर सुनवाई कर फैसला देगा. राजोआना 29 वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद है, जिनमें से 15 वर्ष से अधिक समय उसने मौत के सजायाफ्ता कैदी के रूप में बिताए हैं.

हलफनामा नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

राजोआना ने दया याचिका के निपटारे में हो रही देरी का हवाला देते हुए रिहाई की मांग की है. पिछली सुनवाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस पर फैसला लेने का निर्देश दिया था. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश वकील से पूछा, ‘‘अब तक आपने जवाबी हलफनामा क्यों दाखिल नहीं किया?'' केंद्र के वकील ने कहा कि वे कुछ दस्तावेज अदालत के समक्ष सीलबंद लिफाफे में रखना चाहते हैं. इस पर पीठ ने कहा, ‘‘आप अपना जवाबी हलफनामा दाखिल कीजिए, नहीं तो उसके (राजोआना के) आरोपों को चुनौती नहीं दी जा सकेगी. आप जो कहना चाहते हैं, अपने हलफनामे में कहिए.''

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SGPC की दया याचिका अब भी लंबित: रोहतगी

राजोआना की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा मार्च 2012 में दायर दया याचिका अब भी लंबित है. उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने 2023 में कहा था कि संबंधित प्राधिकारी को दया याचिका पर फैसला लेना चाहिए. रोहतगी ने 24 सितंबर 2024 के उच्चतम न्यायालय के आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि प्रतिवादियों की ओर से और स्थगन की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी. पीठ ने केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया और स्पष्ट कर दिया कि इसके बाद और समय नहीं दिया जाएगा.

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बेअंत सिंह हत्याकांड और कानूनी पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी केंद्र सरकार को राजोआना की दया याचिका पर निर्णय लेने को कह चुका है. उस समय केंद्र ने मामले की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए कहा था कि दया याचिका विचाराधीन है. सितंबर 2024 में उच्चतम न्यायालय ने राजोआना की याचिका पर केंद्र, पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब मांगा था. पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य लोगों की 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट में मौत हो गई थी. एक विशेष अदालत ने जुलाई 2007 में राजोआना को फांसी की सजा सुनाई थी. राजोआना की याचिका में उसकी रिहाई के निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है.

फांसी से उम्रकैद मामला, देरी पर नई याचिका

तीन मई 2023 को उच्चतम न्यायालय ने उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने से इनकार कर दिया था और कहा था कि सक्षम प्राधिकारी उसकी दया याचिका पर विचार कर सकता है. राजोआना ने 2024 में दायर नयी याचिका में कहा कि वह 28 वर्ष आठ महीने जेल में बिता चुका है, जिनमें 15 वर्ष से अधिक समय मौत के सजायाफ्ता कैदी के रूप में है. उसने कहा कि एसजीपीसी ने मार्च 2012 में संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत उसकी ओर से दया याचिका दायर की थी. याचिका में कहा गया है कि न्यायालय द्वारा सक्षम प्राधिकारी को दया याचिका पर समयानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिए एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है.

इसमें अप्रैल 2023 के उच्चतम न्यायालय के एक अन्य आदेश का भी उल्लेख किया गया, जिसमें सभी राज्यों और संबंधित प्राधिकरणों को लंबित दया याचिकाओं का जल्द और बिना अनावश्यक देरी के निपटारा करने को कहा गया था.

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(भाषा इनपुट्स के साथ)

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