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This Article is From Aug 15, 2018

Asian Games 2018: शिव थापा बोले, बॉक्सिंग में आक्रमण ही सबसे बड़ा हथियार, इसी अंदाज में उतरूंगा

Asian Games 2018: शिव थापा बोले, बॉक्सिंग में आक्रमण ही सबसे बड़ा हथियार, इसी अंदाज में उतरूंगा
शिव थापा 18वें एशियाई खेलों के 60 किलोग्राम भार वर्ग में किस्मत आजमाएंगे
  • एशियाड के 60 किलो वर्ग में उतरेंगे शिव थापा
  • बोले, आक्रामक शैली काफी फायदेमंद
  • लंदन और रियो ओलिंपिक में भारतीय दल में थे शामिल
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नई दिल्ली:

इंडोनेशिया में इसी माह होने जा रहे एशियाई खेलों को लेकर उत्साहित भारत के प्रतिभाशाली बॉक्‍सर शिव थापा का मानना है कि आक्रमण ही सबसे बड़ा हथियार होता है और वह पूरी आक्रामकता के साथ रिंग में उतरने जा रहे हैं. साल 2015 में विश्व एमेच्योर चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीत चुके 24 साल के शिव इंडोनेशिया में 18 अगस्त से दो सितंबर तक होने वाले 18वें एशियाई खेलों के 60 किलोग्राम भार वर्ग में किस्मत आजमाएंगे. लंदन और रियो ओलिंपिक खेलों में भारतीय दल का हिस्‍सा रहे शिव ने गोल्डकोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं लिया था, लेकिन उन्होंने हाल ही में मंगोलिया में उलानबातर कप में कांस्य पदक अपने नाम किया था.

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शिव ने एशियाई खेलों के लिए जकार्ता रवाना होने से पूर्व एक इंटरव्‍यू में कहा, "मौजूदा समय में मुक्केबाजी में जो स्कोरिंग प्रणाली शुरू की गई है, उसे ध्यान में रखते हुए आज के समय में आक्रमण आपका सबसे बड़ा हथियार हो गया है. मैंने खुद को आक्रमण शैली में ढाला है.मुझे लगता है कि आज के समय में यह शैली काफी लाभदायक है." शिव 2013 में जॉर्डन में आयोजित एशियन कॉन्फेडरेशन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के सबसे कम उम्र के मुक्केबाज थे. उन्होंने कहा, "मैंने ट्रेनिंग के दौरान खुद को आक्रामक शैली में ढालने की पूरी कोशिश की है. उम्मीद है कि इंडोनेशिया में यह तकनीक मुझे पदक दिलाने में मददगार साबित होगी."

असम के रहने वाले शिव ने 2003 में नोएडा में हुई राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में पहली बार स्वर्ण पदक जीता था.उन्होंने 2012 लंदन ओलिंपिक खेलों के लिए 56 किग्रा वर्ग में क्वालीफाई किया था.हालांकि वह पहले की दौर में हारकर बाहर हो गए थे. इसके अलावा वह 2016 के रियो ओलिंपिक में भी हिस्सा ले चुके हैं.लेकिन वहां भी वह पदक से चूक गए थे. थापा ने कहा कि पिछली असफलताओं से उन्होंने काफी कुछ सीखा है और इस बार एशियाई खेलों के लिए वह एक नई रणनीति के साथ उतरने जा रहे हैं. अपनी तैयारियों को लेकर उन्‍होंने कहा, " एशियाई खेलों के लिए मेरी तैयारी काफी अच्छी हुई है.टीम हाल ही में इंग्लैंड से लौटकर आई है. इंग्लैंड में हमने 15 दिनों के दौरान काफी अच्छी तैयारी की है.हम इसके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह से तैयार हैं."

यह पूछे जाने पर कि एशियाई खेलों में कजाकिस्तान जैसे मजबूत मुक्केबाज भी होंगे और इससे उनके लिए यह खेल काफी चुनौतीपूर्ण रहेगा, उन्होंने कहा, " निश्चित रूप से. एशियाई खेल राष्ट्रमंडल खेलों से बड़ा टूर्नामेंट है. इसमें भाग लेने वाले मुक्केबाज भी काफी मजबूत होते हैं. लेकिन हमें खुद पर और अपनी तैयारियों पर विश्वास है. भारतीय मुक्केबाजों ने पिछले एक-दो साल में काफी शानदार प्रदर्शन किया है, जो इस बात को दिखाता है कि अब हम भी काफी मजबूत हैं." शिव ने साथ ही कहा कि एशियाई खेल, ओलिंपिक  की तैयारियों के लिए खुद को परखने का मौका है. उन्होंने कहा, "इसमें हमारे प्रदर्शन से यह पता चल जाएगा कि ओलिंपिक को लेकर हमारी तैयारी कैसी है? अगर हम इसमें अच्छा करेंगे तो ओलिंपिक के लिए हमारा मनोबल ऊंचा रहेगा."

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शिव भाारत के पहले ऐसे मुक्केबाज हैं जिन्हें वल्र्ड सीरीज ऑफ बॉक्सिंग में कॉन्ट्रैक्ट मिला और बेंटमवेट कैटेगरी में उनकी तीसरी रैंक है. यह पूछे जाने पर कि टीम में विकास कृष्ण और मनोज कुमार जैसे अनुभवी मुक्केबाज हैं और इनसे उन्हें क्या कुछ सीखने को मिलता है, शिवा ने कहा, " टीम में भाई-चारा का माहौल है. खिलाड़ी सकारात्मक रहते हैं. विकास और मनोज दोनों ही युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हैं. वे हमें अपने प्रदर्शन से प्रेरित करते हैं और हमेशा कुछ न कुछ बताते या सिखाते रहते हैं."

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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