- मुंबई नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने सबसे ज्यादा 88 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का दावा किया है
- मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 29 सीटें जीतकर किंगमेकर की भूमिका में खुद को स्थापित किया है
- बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत है और शिंदे गुट की 29 सीटें बीजेपी को मेयर पद दिलाने में निर्णायक हैं
देश की सबसे अमीर महानगरपालिका BMC के नतीजे लगभग साफ हो चुके हैं. बीजेपी 88 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन असली कहानी उन 29 सीटों में छिपी है जो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने जीती हैं.आंकड़ों का गणित ऐसा उलझा है कि बिना शिंदे के 'धनुष-बाण' के बीजेपी का मेयर बनना नामुमकिन है.
किंगमेकर की भूमिका में शिंदे! कितनी बड़ी है बार्गेनिंग पावर?
बहुमत के लिए 114 का आंकड़ा चाहिए. बीजेपी के पास 88 सीटें हैं, यानी उसे अभी भी 26 और पार्षदों की जरूरत है, शिंदे की 29 सीटें ही बीजेपी को सत्ता की कुर्सी तक पहुंचा सकती हैं.शिंदे के पास अब वह ताकत है जिससे वह बीजेपी से अपनी शर्तें मनवा सकें.शिंदे गुट के प्रवक्ता और अन्य नेताओं ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि मुंबई का मेयर शिवसेना (शिंदे) का होना चाहिए क्योंकि यह बालासाहेब की विरासत है.
जहां एक ओर पार्टी के प्रवक्ता और कार्यकर्ता 'शिवसेना का मेयर' होने की मांग कर रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बेहद सधा हुआ जवाब दिया है.शिंदे ने कहा कि हमारा एजेंडा विकास है. हम महायुति के तौर पर लड़े हैं और साथ बैठकर तय करेंगे कि मुंबई के हित में क्या बेहतर है. हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शिंदे का यह नरम रुख एक बड़े पॉवर प्ले की रणनीति हो सकती है.
तो सवाल है की क्या अगले कुछ दिन 'महा-सियासी' ड्रामा होने की उम्मीद है? आने वाले 48 से 72 घंटे मुंबई की राजनीति के लिए बेहद अहम हैं. शिंदे गुट मांग कर सकता है कि पहले ढाई साल शिवसेना का मेयर रहे.चर्चा यह भी है कि ठाणे में स्पष्ट बहुमत (75 सीटें) मिलने के बाद शिंदे मुंबई में बीजेपी को मेयर पद देकर बदले में महत्वपूर्ण समितियों जैसे स्टैंडिंग कमेटी पर नियंत्रण मांग सकते हैं. 24 सीटों वाली कांग्रेस और अन्य छोटे दल क्या रुख अपनाते हैं, इस पर भी सबकी नजर है.
शिंदे जानते हैं कि 2029 के विधानसभा चुनाव से पहले बीएमसी पर पकड़ बनाना उनकी पार्टी की साख के लिए जरूरी है.अगर वह बीजेपी को आसानी से मेयर पद दे देते हैं, तो उनके कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जा सकता है. इसलिए, पर्दे के पीछे डिप्टी मेयर, स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन और महत्वपूर्ण वार्डों को लेकर कड़ी सौदेबाजी लगभग तय मानी जा रही है.
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