अजित पवार के निधन के चौथे दिन सुनेत्रा की शपथ... दुख की घड़ी के बीच कुर्सी की ये कैसी जल्दबाजी?

अजित पवार के निधन के महज चौथे दिन सुनेत्रा पवार की उपमुख्यमंत्री शपथ ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी. शोक की छाया में इतनी जल्दबाजी अजित गुट की रणनीति लगती है. शरद पवार के विलय के दावों से बचने और विधायकों को बांधने के लिए सुनेत्रा को 'बाइंडिंग फोर्स' बनाया जा रहा है.

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अजित पवार के
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  • महाराष्ट्र में अजित पवार की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जा रही है.
  • अजित पवार के गुट के नेताओं ने शोक के बीच तेजी से बैठक कर सुनेत्रा को उपमुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया.
  • शरद पवार ने माना कि अजित पवार के साथ पिछले 4 महीनों से विलय की बात चल रही थी और 12 फरवरी को इसका ऐलान होना था.
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मुंबई:

अजित पवार की मौत को अभी चार दिन भी नहीं हुए और महाराष्ट्र की राजनीति में नया ड्रामा शुरू हो गया. उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार आज शाम राजभवन में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाली हैं. शोक की छाया में, अंतिम संस्कार की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई, विधायक दल की बैठक बुलाई गई, सुनेत्रा को राजी किया गया और शपथ का ऐलान हो गया.

ये जल्दबाजी संयोग नहीं लगती. अजित गुट के बड़े नेता- प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल रात-दिन मीटिंग कर रहे हैं. अस्थि विसर्जन के तुरंत बाद ऑनलाइन-ऑफलाइन चर्चाएं, सुनेत्रा को उपमुख्यमंत्री बनाने का फैसला- सब कुछ इतनी तेजी से क्यों?

'4 महीनों से अजित से चल रही थी बात'

क्योंकि शरद पवार के विलय वाले बयान आग की तरह फैल रहे हैं. शरद पवार ने खुद कहा कि अजित के साथ पिछले चार महीनों से बात चल रही थी, 12 फरवरी को विलय का ऐलान होना था. उन्होंने यह भी कबूला कि सुनेत्रा की शपथ की उन्हें मीडिया से पता चला, परिवार से कोई बात नहीं हुई.

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अजित गुट को किस बात का डर?

अजित गुट में डर साफ है कि अगर विलय हुआ तो कमान पूरी तरह शरद पवार के हाथ में चली जाएगी. कई विधायक पुराने घर लौट सकते हैं. इसलिए सुनेत्रा पवार को आगे करके विधायकों को बांधने की कोशिश है. वे परिवार की सदस्य हैं, उनकी स्वीकार्यता है, वे 'बाइंडिंग फोर्स' बन सकती हैं.

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महाराष्ट्र में पावर गेम

लेकिन सवाल वही है कि मातम के बीच कुर्सी की ये कैसी बेताबी? क्या अजित गुट शरद पवार के 'विलय जाल' से बचने के लिए इतनी जल्दी में है? क्या सुनेत्रा सिर्फ सत्ता की कुर्सी पर बैठ रही हैं या परिवार की एकता बचाने की ढाल बन रही हैं? महाराष्ट्र की राजनीति में पावर गेम फिर से चल रहा है.

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