Pune Child Rape And Murder Case: महाराष्ट्र के पुणे जिले का नसरापुर में 3 साल की मासूम बच्ची के साथ हैवानियत करने के आरोपी भीमराव कांबले की पत्नी और बेटे ने उससे अपना रिश्ता तोड़ लिया है और मासूम बच्ची से दुष्कर्म और हत्या करने वाले आरोपी को मौत की सजा देने की मांग की है. परिवार का कहना है कि, “उसे वहीं पत्थर से मार डालो, जहां उसने बच्ची को मारा, और उसे ज़िंदा जला दो.'
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'उसे फांसी देना तो बहुत छोटी सजा होगी, उसे जिंदा जला देना चाहिए'
आरोपी की पत्नी ने कहा, 'मुझे उसका चेहरा तक नहीं देखना है, अगर उसका अंतिम संस्कार भी हो जाए, तो मुझे कोई बताने तक मत आना, उसे फांसी देना तो बहुत छोटी सजा होगी, उसे जिंदा जला देना चाहिए.' बेटे ने कहा, 'मुझे उसे अपना पिता कहते हुए शर्म महसूस हो रही है, उसके घर में पैदा होना ही मेरा सबसे बड़ा गुनाह है. ऐसे नरपिशाच के लिए समाज और परिवार में कोई जगह नहीं है.
एक आदतन अपराधी है रेप और मर्डर का आरोपी भीमराव कांबले
गौरतलब है 3 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोप में गिरफ्तार एक भीमराव कांबले एक आदतन अपराधी है. आरोपी के हाथों मारी गई मासूम के सामने आए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने मासूम के मुंह मोजा ठूंसकर उसकी हत्या को अंजाम दिया था. सामने आई मासूम की प्राथमिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट मासूम के साथ की गई हैवानियत का भी खुलासा करती है.
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कांबले की क्रिमिनल मेंटालिटी को उजागर करती हैं थानों में दर्ज केस
साल 1998 में भीमराव कांबेल की क्राइम की दुनिया में पर्दापण हुआ, जब साल 1998 में उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करना) और धारा 452 (हमले की तैयारी के साथ घर में अनधिकृत प्रवेश) के तहत मामला दर्ज किया गया था. इस मामले ने तभी संकेत दे दिए थे कि उसकी गतिविधियां समाज और महिलाओं की सुरक्षा के लिए खतरा हैं.
साल 2015 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का केस दर्ज हआ था
साल 2025 में कांबले पर एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का केस दर्ज हुआ. आरोप के अनुसार, कांबले ने नाबालिग को "टीवी चालू करना" नहीं आ रहा कहकर अपने घर बुलाया और जैसे ही बच्ची घर के अंदर दाखिल हुई, कांबले ने बच्ची की गर्दन पर एक धारदार हथियार (कोयता) की नोंक पर पीड़िता के साथ दरिंदगी को अंजाम दिया था.
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'बेनिफिट ऑफ डाउट' देते हुए कोर्ट ने आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया
उल्लेखनीय है प्रत्यक्षदर्शियों या तकनीकी साक्ष्यों की कमी के चलते कोर्ट ने तब आरोपी को 'बेनिफिट ऑफ डाउट' देते हुए सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था. उसकी यह आपराधिक कुंडली बताती है कि वह पहले भी गंभीर कानूनी पचड़ों में फंस चुका है. उसके खिलाफ दर्ज पुराने मुकदमे उसकी हिंसक और आपराधिक प्रवृत्ति की गवाही देते हैं, जिसने प्रशासन को फिर से उसके पुराने रिकॉर्ड को खंगालने पर मजबूर कर दिया है.
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