ड्रग्स की 'काली इकोनॉमी' का दुबई कनेक्शन: सलीम डोला से पूछताछ में दाऊद इब्राहिम के इन्वेस्टमेंट का खुलासा

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Dawood Ibrahim Drug Network: इंटरनेशनल ड्रग्स कारोबार अब सिर्फ सीमा पार से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं रह गया है. यह एक व्यवस्थित और सोची-समझी रणनीति के तहत चलाए जा रहे 'कॉर्पोरेट इन्वेस्टमेंट मॉडल' में तब्दील हो चुका है. मुंबई क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में आए अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के बेहद करीबी गुर्गे सलीम डोला ने पुलिसिया पूछताछ में जो चौंकाने वाले राज उगले हैं, उससे भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ गई है. गहन तफ्तीश में यह खुलासा हुआ है कि नशे के कारोबार से जो काली कमाई की जा रही है, उसका 30 प्रतिशत सीधा हिस्सा अकेले सलीम डोला की जेब में जा रहा था. पुलिस को आशंका है कि इसी अकूत काले धन का इस्तेमाल करके डोला ने दुबई में अचल संपत्तियों और आलीशान बेनामी संपत्तियों का एक पूरा साम्राज्य खड़ा कर लिया है. यह मामला अब महज एक ड्रग्स जब्ती का केस नहीं रह गया है, बल्कि यह टेरर फंडिंग और विदेशी जमीं पर रचे जा रहे वित्तीय जाल का वह खौफनाक सिरा है, जो सीधे अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम से जाकर जुड़ता है.

सिंडिकेट का 'री-इन्वेस्टमेंट' मॉडल: कमाई से ही विस्तार

क्राइम ब्रांच की यूनिट 2 और 7 की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इस ड्रग्स रैकेट का वित्तीय ढांचा बेहद मजबूत है.

पूछताछ में डोला ने बताया है कि ड्रग्स की बिक्री से मिलने वाला पैसा केवल ऐश-ओ-आराम पर खर्च नहीं हो रहा था. इस काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा वापस 'सिंडिकेट' में पंप किया गया, ताकि सातारा और मैसूर जैसी जगहों पर नई ड्रग्स फैक्ट्रियां सेटअप की जा सकें. यानी, भारत का पैसा, भारत के खिलाफ ही नशे की नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने में इस्तेमाल हो रहा था.

फैसल शेख का 'मकोका' कनेक्शन और डोला का नेटवर्क

इस पूरे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के खतरनाक मंसूबों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुंबई पुलिस ने इसमें शामिल एक अन्य मुख्य आरोपी फैसल जावेद शेख के खिलाफ 'मकोका' (MCOCA) कानून के तहत कार्रवाई की है. 20 मई 2025 को चेन्नई जेल से कस्टडी में लिए गए फैसल शेख ने पूछताछ में साफ तौर पर कबूल किया था कि वह मुंबई और देश के अन्य हिस्सों में मेफेड्रोन (MD) और कोकीन की जो बड़ी खेप खपा रहा था, उसकी सीधी सप्लाई उसे सलीम डोला से ही मिल रही थी. फैसल शेख कोई छोटा-मोटा अपराधी नहीं है; उसके खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत तीन बेहद गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं, जिनमें 2017 में 68 ग्राम मेफेड्रोन, 2023 में 20 किलोग्राम मेफेड्रोन और 2024 में 940 ग्राम कोकीन की जब्ती शामिल है. जांच एजेंसियों का दावा है कि डोला का पहले तुर्की फरार होना, वहां से भारत डिपोर्ट किया जाना और अब दुबई में उसकी संपत्तियों का सुराग मिलना यह साबित करता है कि वह दाऊद इब्राहिम का एक बेहद शातिर 'मनी मैनेजर' है, जो विदेशी सरजमीं पर बैठकर भारत के खिलाफ एक बड़ा आर्थिक और सामाजिक युद्ध छेड़ चुका था.
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