बर्थडे पर पीएम के नाम से फर्जी लेटर और उगाही की कोशिश... मुंबई क्राइम ब्रांच ने दो को दबोचा

पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों की पहचान तौसीफ पटेल (44) और सिद्धिनाथ पांडे उर्फ सुनील (43) के रूप में हुई है. दोनों गोरेगांव इलाके के रहने वाले हैं और खुद को पत्रकार बताकर लोगों को झांसे में लेते थे. 

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पीड़ित ने लगातार हो रहे दबाव से परेशान होकर वर्ली पुलिस से संपर्क किया. (प्रतीकात्‍मक फोटो)
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  • मुंबई क्राइम ब्रांच ने प्रधानमंत्री के नाम पर फर्जी लेटर के जरिए उगाही करने वाले 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया.
  • आरोपियों ने खुद को पत्रकार बताकर एक सामाजिक कार्यकर्ता से चार लाख रुपये की उगाही का प्रयास किया था.
  • आरोपियों ने सोशल मीडिया पर संपर्क कर भरोसा जीतने के बाद प्रधानमंत्री के नाम से फर्जी बधाई पत्र भेजा था.
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मुंबई में प्रधानमंत्री के नाम और फर्जी हस्ताक्षर वाले लेटर के जरिए उगाही की साजिश का पर्दाफाश हुआ है. मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने खुद को पत्रकार बताकर एक सामाजिक कार्यकर्ता को झांसे में लिया और उस पर चार लाख रुपये देने का दबाव बनाया. शिकायत मिलने पर पुलिस ने जाल बिछाया और वर्ली इलाके से दोनों को धर दबोचा. 

पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों की पहचान तौसीफ पटेल (44) और सिद्धिनाथ पांडे उर्फ सुनील (43) के रूप में हुई है. दोनों गोरेगांव इलाके के रहने वाले हैं और खुद को पत्रकार बताकर लोगों को झांसे में लेते थे. 

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ऐसे रचा पूरा खेल

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मार्च महीने में सोशल मीडिया के जरिए एक सामाजिक कार्यकर्ता से संपर्क किया, जो एक एनजीओ चलाते हैं और गरीब बच्चों की पढ़ाई, वृद्धाश्रम और अनाथालयों की मदद करते हैं. 

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आरोपियों ने खुद को पत्रकार बताकर पहले भरोसा जीता और फिर प्रधानमंत्री कार्यालय से जन्मदिन पर खास बधाई पत्र दिलाने का लालच दिया. इसके बाद तौसीफ पटेल ने व्हाट्सऐप पर वॉयस नोट भेजकर ‘सेटिंग' होने का दावा किया और 20 मार्च को प्रधानमंत्री के नाम से फर्जी सिग्नेचर वाला बधाई पत्र भी भेज दिया. 

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शक हुआ तो खुली पोल

शुरुआत में पीड़ित इस झांसे में आ गया और उसने वह लेटर सोशल मीडिया पर भी पोस्ट कर दिया. हालांकि दोस्तों ने लेटर पर शक जताया, जिसके बाद उसने पोस्ट हटा दी. 

इसी दौरान आरोपियों ने असली खेल शुरू किया और 4 लाख रुपये की मांग करते हुए लगातार कॉल, मैसेज और वॉयस नोट के जरिए दबाव बनाना शुरू कर दिया. 

पुलिस ने बिछाया जाल, गिरफ्तार

लगातार हो रहे दबाव से परेशान होकर पीड़ित ने वर्ली पुलिस से संपर्क किया. केस दर्ज होने के बाद जांच क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल को सौंपी गई. 

AEC की टीम ने प्लान बनाकर जाल बिछाया और जैसे ही आरोपी पैसे लेने वर्ली इलाके में पहुंचे, दोनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया. 

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