15 घंटे चला मनोज जरांगे पाटिल का अनशन: सरकार से बातचीत के बाद अस्पताल में भर्ती, ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर बनी सहमति

जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव के एक खेत में 30 मई से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी. उन्हें अचानक उल्टियों की शिकायत होने लगी.

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Manoj Jarange Hunger Strike: मराठा आरक्षण की मांग कर रहे मनोज जरांगे ने अनशन समाप्त कर दिया है. उन्होंने सरकार के आश्वासन और ड्राफ्ट के बाद अनशन खत्म करने का फैसला किया है. देर रात अनशन के दौरान उनकी तबीयत भी खराब हो गई थी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भी भर्ती कराना पड़ा. उधर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मराठा समुदाय को न्याय देने के लिए हमारी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उसी के मुताबिक कार्यवाही हो रही है.

दरअसल, मराठा आरक्षण की मांग करने वालों के प्रमुख चेहरा मनोज जरांगे पाटिल हैं. उन्होंने 30 मई यानी शनिवार को अनिश्चितकालीन के लिए अनशन पर बैठ गए थे. दिनभर तेज धूप में बैठने के कारण उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा और उन्हें लगातार उल्टियां होने लगी थीं. सरकार से पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी, लेकिन बाद में सरकार के प्रतिनिधिमंडल से आश्वासन के बाद उन्होंने अनशन खत्म कर दिया. इस दौरान जरांगे का अनशन 15 घंटे तक चला.

अनशन खत्म होने के बाद उन्हें एंबुलेंस से छत्रपति संभाजीनगर रवाना किया गया. जरांगे के अनशन को लेकर सरकार की ओर से मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और उन्होंने मनोज जरांगे के साथ बातचीत का रास्ता साफ करते हुए इस गतिरोध को खत्म कराया.

सीएम ने क्या कहा?

सीएम फडणवीस ने कहा कि जरांगे पाटिल को जो भी आश्वासन दिए गए, सब सामने दिए गए. मराठा समुदाय को न्याय देने के लिए हमारी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध, उसी के मुताबिक कार्यवाही हो रही है. मनोज जरांगे पाटिल के बयानों पर बोलते हुए फडणवीस ने कहा कि सरकार ने जो भी आश्वासन दिए, उन्हें खुद जरांगे पाटिल ने भी पढ़कर सुनाया था. हमारी सरकार लगातार मराठा समाज को न्याय देने की भूमिका में रही है और उसी के अनुसार कदम उठाए जा रहे हैं.

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मनोज जरांगे पाटिल की मुख्य मांग

मराठा समाज के लोगों को बड़े पैमाने पर कुनबी प्रमाणपत्र दिए जाएं, जिससे उन्हें ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सके. उनका आरोप है कि सरकार ने पहले जो आश्वासन दिए थे, उन्हें अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है. उन्होंने मांग की है कि मराठवाड़ा सहित राज्य के लाखों मराठाओं को कुनबी प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया तत्काल पूरी की जानी चाहिए.

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