- महाराष्ट्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रेडी रेकनर दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं करने का निर्णय लिया है
- इस फैसले से संपत्ति खरीदने की लागत नियंत्रित रहेगी और रियल एस्टेट सेक्टर को आर्थिक राहत मिलेगी
- सरकार ने प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने हेतु विकास योजनाओं और सर्वे नंबरों में तकनीकी सुधार किए हैं
महाराष्ट्र सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए वित्तीय वर्ष 2026‑27 के लिए रेडी रेकनर दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं करने का अहम फैसला लिया है. राज्य के सीएम देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया है, जिसकी औपचारिक घोषणा राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने की. सरकार के इस फैसले से घर खरीदारों के साथ‑साथ निर्माण क्षेत्र को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
राज्य सरकार ने साफ किया है कि 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली नई रेडी रेकनर दरें पिछले वित्तीय वर्ष 2025‑26 के स्तर पर ही ‘जैसे थे' बनाए रखी जाएंगी. इसका सीधा फायदा यह होगा कि संपत्ति खरीद‑फरोख्त की लागत में कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी. तमाम एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक साबित होगा.
तकनीकी सुधारों पर जोर, पारदर्शिता बढ़ाने की पहल
सरकार ने दरों में बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन पारदर्शिता और प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए कई तकनीकी सुधार किए गए हैं. इनमें विकास योजनाओं (डीपी) का समावेश, नए सर्वे नंबरों की एंट्री और गांवों के नामों में सुधार जैसे कदम शामिल हैं. सरकार का कहना है कि इन सुधारों से दस्त पंजीकरण प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित, सटीक और वास्तविक बन सकेगी.
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बिल्डर्स की मांग के बाद लिया गया निर्णय
वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निर्माण क्षेत्र में जारी मंदी को ध्यान में रखते हुए बिल्डर्स संगठनों, खासतौर पर कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (क्रेडाई), ने सरकार से रेडी रेकनर दरें स्थिर रखने की मांग की थी. राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने बताया कि सभी सुझावों और आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करने के बाद यह फैसला लिया गया है, ताकि निर्माण क्षेत्र को गति मिल सके और संपत्तियों का मूल्य बाजार की वास्तविक स्थिति के अनुरूप तय हो.
घर खरीदारों को राहत, बाजार में बढ़ेगी मांग
विशेषज्ञों के अनुसार, रेडी रेकनर दरों को स्थिर रखने से संपत्ति खरीदने की लागत नियंत्रित रहेगी. इससे रियल एस्टेट बाजार में मांग बढ़ने की संभावना है और निर्माण क्षेत्र को नई गति मिल सकती है. सरकार के इस फैसले से आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा, जो मौजूदा समय में एक बड़ी राहत मानी जा रही है.
पिछले वर्षों में दरों में उतार‑चढ़ाव का रिकॉर्ड
पिछले कुछ सालों में रेडी रेकनर दरों में लगातार बदलाव देखने को मिला था. साल 2017‑18 में औसतन 5.86 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी. कोरोना काल के दौरान 2020‑21 में यह बढ़ोतरी घटकर केवल 1.74 प्रतिशत रह गई थी. इसके बाद 2022‑23 में 4.81 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो अगले दो वर्षों तक जारी रही. वहीं 2025‑26 में ग्रामीण क्षेत्रों में 3.36 प्रतिशत, नगरपालिका क्षेत्रों में 4.97 प्रतिशत और महानगरपालिका क्षेत्रों में 5.95 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई थी. ऐसे में 2026‑27 के लिए दरें स्थिर रखने का फैसला खासा अहम माना जा रहा है.
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दर स्थिर, फिर भी राजस्व में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
रेडी रेकनर दरें स्थिर रहने के बावजूद स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन विभाग के राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वित्तीय वर्ष 2025‑26 में 30 मार्च 2026 तक राज्य सरकार को कुल 60,568.94 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ. इसमें सबसे बड़ा योगदान ‘आई‑सरिता' (I‑Sarita) प्रणाली का रहा, जिसके माध्यम से 49,534 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया गया.
इसके अलावा एडजुडिकेशन 2.0 से 4,429.70 करोड़ रुपये, ई‑फाइलिंग से 1,238.26 करोड़ रुपये, ऑनलाइन लीव एंड लाइसेंस से 316.69 करोड़ रुपये और अन्य स्रोतों से 5,050.05 करोड़ रुपये की आय हुई. सरकार का मानना है कि यह आंकड़े डिजिटल सिस्टम और पारदर्शी प्रक्रिया की सफलता को दर्शाते हैं.
सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब बाजार में अनिश्चितता और मंदी का माहौल बना हुआ है. ऐसे में रेडी रेकनर दरों को स्थिर रखने का निर्णय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए राहत भरा साबित हो सकता है और बाजार को स्थिरता प्रदान कर सकता है.














