महाराष्‍ट्र कांग्रेस के हाल के मामलों से हाईकमान खफा, कर सकता है कार्रवाई : राहुल गांधी से भेंट के बाद NDTV से नसीम खान

महाराष्‍ट्र कांग्रेस से जुड़े मामलों पर पार्टी नेता नसीम खान ने विधान परिषद के कांग्रेस प्रत्याशी चंद्रकांत हंडोरे के साथ मिलकर राहुल गांधी से मुलाकात की

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महाराष्‍ट्र के कांग्रेस नेता नसीम खान ने राहुल गांधी से मुलाकात की
मुंबई:

पिछले एक महीने में महाराष्ट्र कांग्रेस की ओर से ऐसे कई मामले सामने आए, जिनसे कांग्रेस हाईकमान बेहद नाराज है. विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस के पहले क्रम के प्रत्याशी चंद्रकांत हंडोरे का चुनाव हारना, औरंगाबाद का संभाजीनगर नाम किए जाने का समर्थन करना और ट्रस्ट वोट में पार्टी विधायकों का मौजूद नहीं होना जैसे मामले इसमें शामिल हैं. आने वाले दिनों में हाईकमान की ओर से इसे लेकर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है . इस बीच, कांग्रेस नेता नसीम खान ने विधान परिषद के कांग्रेस प्रत्याशी चंद्रकांत हंडोरे के साथ मिलकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद नसीम खान ने NDTV से विस्‍तार से बात की. 

विधान परिषद चुनाव में हाईकमान के निर्देश की अवहेलना पर 
विधान परिषद में पार्टी हाईकमान की बात न मानने के मसले पर नसीम खान ने कहा, "जो दो-तीन घटनाएं घटी हैं, उसकी जानकारी राहुल गांधी को दी है. यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि कांग्रेस पार्टी की ओर से एक दलित नेता को फर्स्ट प्रिफरेंस (प्रथम वरीयता ) का प्रत्याशी बनाया था और उनके लिए 29 वोट रखे गए थे, लेकिन उन्हें हमारे ही केवल 22 वोट मिले और वे हार गए. यह गंभीर मामला है. केंद्रीय नेताओं ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है. हमने भी मांग की है कि इसकी जांच होनी चाहिए. उन्‍होंने कहा, "अब आब्‍जर्वर आकर जांच करेंगे कि यह किसने करवाया है, किसने किया है और कैसे प्रथम क्रम का प्रत्याशी हारा है. आज दलित समाज में इसे लेकर नाराज़गी है. इस तरह से घटना वापस न हो, इसके लिए कदम उठाए जा रहे हैं.

ट्रस्ट वोट के दिन नेताओं के अनुपस्थिति पर
अलग-अलग लोग उसमें शामिल हैं. अशोक चव्हाण ट्रैफिक में फंसे थे. केंद्रीय आब्‍जर्वर आएंगे, वे इन मामलों पर बातचीत करेंगे और देखेंगे. उचित निर्णय होगा. केंद्रीय नेतृत्व ने पिछले एक महीने की घटनाओं को गंभीरता से लिया है और इस पर निर्णय लिया जाएगा.

औरंगाबाद का नामकरण संभाजीनगर करने को लेकर कांग्रेस के समर्थन पर
यह समन्‍वय की कमी की वजह से हुआ है. शिवसेना को यह बताना चाहिए था. कांग्रेस ने कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत इस सरकार का समर्थन किया था ताकि बीजेपी को सत्ता से दूर रखा जाए. कम से कम तीनों पार्टियों के नेताओं को इस मुद्दे पर विश्वास में लेना चाहिए था.

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महाविकास आघाडी के भविष्य पर
हमारा गठबंधन सरकार में था. पार्टियों में अलायंस नहीं था. पहले दिन से हम कह रहे हैं कि हम अपनी विचारधारा पर काम करेंगे. अगर कोई कॉमन मुद्दे होंगे जैसे राष्ट्रपति चुनाव, ऐसे कुछ मुद्दों में हम साथ आने की कोशिश करेंगे ताकि एक मजबूत विपक्ष महाराष्ट्र में दिखाई दे.

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