गैस की कमी पर गरमाई राजनीति: महाराष्ट्र बजट सत्र में विपक्ष हमलावर, सरकार ने कहा–स्थिति नियंत्रण में

महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र में एलपीजी/गैस सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय हालात को लेकर सियासत गर्म रही. विपक्ष ने असर और नीति स्पष्ट करने की मांग की, जबकि सरकार ने घरेलू गैस की आपूर्ति का भरोसा देते हुए जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई और कमर्शियल गैस में अस्थायी कटौती की संभावना जताई.

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  • महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र में एलपीजी गैस की संभावित कमी और अंतरराष्ट्रीय तनाव को लेकर सियासी बहस तेज
  • शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने पश्चिम एशिया संकट के भारत और महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव की चिंता जताई
  • कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने विदेश नीति को दोषी ठहराते हुए घरेलू गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की
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मुंबई:

महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र (Budget Session 2026) के दौरान राज्य में एलपीजी गैस (LPG Gas) की संभावित कमी और अंतरराष्ट्रीय हालात के प्रभाव को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया. पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और उसके आर्थिक प्रभाव को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा, जबकि सरकार ने भरोसा दिलाया कि घरेलू गैस की आपूर्ति बाधित नहीं होने दी जाएगी और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.

ईरान–इजरायल युद्ध का असर भारत पर पड़ सकता है: आदित्य ठाकरे

शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव, के बीच युद्ध का असर भारत और महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. उन्होंने केंद्र सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि लोगों को यह बताया जाना चाहिए कि इस संघर्ष का देश की अर्थव्यवस्था, उद्योगों और व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ सकता है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस मामले में भारत की ओर से कोई कूटनीतिक पहल हुई है और पीएम मोदी के हस्तक्षेप का क्या असर पड़ सकता है.

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कई उद्योग क्रूड ऑयल और उससे जुड़े उत्पादों पर निर्भर

आदित्य ठाकरे ने कहा कि कई उद्योग क्रूड ऑयल और उससे जुड़े उत्पादों पर निर्भर हैं. यदि वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होती है तो सेमीकंडक्टर सहित कई औद्योगिक उत्पादों की सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडर और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है. उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बजट सत्र के दौरान विस्तृत चर्चा होनी चाहिए थी. ठाकरे ने कहा कि इस स्थिति का असर किसानों, व्यापारियों और उद्योगों पर पड़ सकता है, इसलिए राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर इस पर गंभीरता से काम करना चाहिए.

कांग्रेस का आरोप: गलत विदेश नीति के परिणाम

कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कमर्शियल गैस पर पहले ही प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं और आगे चलकर घरेलू गैस की आपूर्ति भी प्रभावित होने की आशंका है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि तेल कंपनियों के पास कच्चा माल ही नहीं है तो उत्पादन कैसे बढ़ेगा. उनके अनुसार यह स्थिति विदेश नीति के गलत प्रबंधन का परिणाम है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक स्थिति को छिपाने की कोशिश कर रही है और केवल ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की बात कर रही है.

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जमाखोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी: मंत्री बावनकुले

सरकार की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता घरेलू गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है. संकट की स्थिति में कमर्शियल गैस की आपूर्ति कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है, लेकिन सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि यह स्थिति लंबे समय तक न रहे. बावनकुले ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अनावश्यक राजनीति कर रही है और लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि संकट के समय सभी दलों को सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए.

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होटल उद्योग पर पड़ सकता है असर

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने बताया कि आज कई होटल मालिकों ने उनसे मुलाकात कर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं. होटल उद्योग के प्रतिनिधियों ने कमर्शियल गैस की आपूर्ति में 25 प्रतिशत कटौती का सुझाव दिया है. भुजबल ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री फडणवीस से भी चर्चा की है. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि घरेलू गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाए, जिसके कारण कमर्शियल गैस की सप्लाई में कमी आ सकती है. उन्होंने कहा कि इसका असर विशेष रूप से मुंबई के होटल उद्योग पर पड़ सकता है. एक विकल्प के रूप में केरोसिन के उपयोग का सुझाव दिया गया था, लेकिन होटल मालिकों ने कहा कि इसके लिए पूरी व्यवस्था बदलनी पड़ेगी और यह सुरक्षा की दृष्टि से भी जोखिम भरा हो सकता है.

सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए

सरकार का कहना है कि वह गैस आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के प्रभाव पर लगातार नजर रखे हुए है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट नीति और ठोस समाधान की मांग कर रहा है. महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है, क्योंकि इसका सीधा असर उद्योग, व्यापार, किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

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