- बारामती सीट पर अजित पवार के निधन के बाद 23 अप्रैल 2026 को उपचुनाव होने जा रहे हैं, सियासी पारा हाई है
- पार्थ पवार ने कांग्रेस पर सवाल उठाए और अपनी मां सुनेत्रा पवार को निर्विरोध जिताने की कोशिश की है
- शरद पवार ने कांग्रेस के चुनाव लड़ने के अधिकार का समर्थन करते हुए पार्थ पवार की राजनीतिक समझ पर सवाल उठाए
Baramati Assembly Seat: महाराष्ट्र की सियासत का केंद्र माने जाने वाले बारामती में एक बार फिर चुनावी सरगर्मी तेज है. अजित पवार के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर 23 अप्रैल 2026 को उपचुनाव होने जा रहे हैं,लेकिन मतदान से पहले ही बयानों के तीखे बाणों ने सियासी पारा चढ़ा दिया है. इस बार चर्चा के केंद्र में हैं अजित पवार के बेटे पार्थ पवार, जो कांग्रेस पर दिए एक बयान से घिर गए हैं.
किसी को फोन नहीं करेंगे, जो होगा वही होगा...
अजित पवार की विरासत को संभालने की कोशिश में जुटे पार्थ पवार अपनी मां सुनेत्रा पवार को बारामती से निर्विरोध निर्वाचित कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं. इसी रस्साकशी के बीच कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार उतारे जाने पर उन्होंने एक मराठी न्यूज़ चैनल से बात करते हुए कहा,"मुझे दुख है कि महाराष्ट्र में कांग्रेस का पतन हो रहा है.अजित पवार जी के प्रति लोगों के प्यार को जानते हुए भी कांग्रेस अपना उम्मीदवार खड़ा कर रही है. उन्हें जल्द ही पता चल जाएगा कि उन्हें किस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा. हम अब किसी को फोन नहीं करेंगे, किस्मत में जो होगा वही होगा."
शरद पावर ने पार्थ पर की थी टिप्पणी
पार्थ का यह बयान उस इमोशनल कार्ड का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए वे विपक्षी दलों पर अपनी मां के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने का नैतिक दबाव बनाना चाह रहे थे.पार्थ के इस बयान पर सबसे ज्यादा चर्चा उनके दादा और अनुभवी नेता शरद पवार के बयान की हो रही है.शरद पवार ने न केवल कांग्रेस के चुनाव लड़ने के अधिकार का समर्थन किया, बल्कि अपने पोते की राजनीतिक समझ पर भी सवाल उठा दिए.उन्होंने कहा,"कांग्रेस का बारामती में उम्मीदवार उतारना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है. रही बात पार्थ पवार की, तो मुझे नहीं लगता कि उनमें कांग्रेस जैसी पार्टी पर टिप्पणी करने के लिए जरूरी राजनीतिक परिपक्वता (Political Maturity) है."
किसका पतन होगा,ये तो वक्त तय करेगा...
महाराष्ट्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने भी नागपुर में मीडिया से बात करते हुए पार्थ पवार और सुनेत्रा पवार के खेमे को स्पष्ट संदेश दिया.पटोले ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को भावनाओं से नहीं, बल्कि नियमों से चलना चाहिए.पटोले ने पुष्टि की कि सुनेत्रा पवार ने उन्हें फोन कर चुनाव निर्विरोध कराने की अपील की थी, लेकिन उन्होंने साफ किया कि "दबाव तंत्र का इस्तेमाल करके लोकतांत्रिक प्रश्नों का समाधान नहीं किया जा सकता."
पार्थ के “कांग्रेस के डाउनफॉल” वाले बयान पर पटोले ने कहा, "किसका पतन होगा, यह आने वाला वक्त तय करेगा.पार्थ अभी उम्र में छोटे हैं, उन पर बात करना जरूरी नहीं."बारामती की इस हाई-प्रोफाइल सीट के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. अजित पवार के निधन के बाद उपजी सहानुभूति लहर के बावजूद विपक्ष ने एक तरह से इस सीट को वॉकओवर देने से इनकार कर दिया है. 40 से अधिक उम्मीदवारों में नामांकन भरा है, मुख्य तौर पर अजित पवार गुट NCP और कांग्रेस मैदान में है, बाकी निर्दलीय लड़ रहे हैं. बारामती में 54 से ज्यादा नामांकन होना इस बात का सबूत है कि मुकाबला निर्विरोध होने की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है.
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