फंड की कमी का बहाना नहीं चलेगा; पेंशन के लिए कुर्सी-टेबल बेचें, लाडकी बहन जैसी योजना बंद करें: बॉम्बे हाईकोर्ट

Ladki Bahin Yojana: बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिक्षकों की पेंशन पर सख्त रुख अपनाया. कहा- फंड नहीं है तो योजनाएं बंद करें, दफ्तर की संपत्ति बेचकर भुगतान करें. अब लाडकी बहन योजना पर भी सवाल उठने लगे हैं. पढ़िए पूरी खबर.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
बॉम्बे हाई कोर्ट पेंशन मामले में सख्त टिप्पणी

Bombay High Court on Ladki Bahin Yojana: शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट और सख्त शब्दों में कहा है कि फंड की कमी का बहाना बनाकर सरकारी या नगर निगम प्रशासन पेंशन और बकाया लाभों का भुगतान टाल नहीं सकता. अदालत ने यहां तक कह दिया कि अगर पैसे नहीं हैं तो गैर-जरूरी योजनाएं बंद करें या दफ्तरों की संपत्ति बेचें, लेकिन कर्मचारियों को उनका हक जरूर दें. यह टिप्पणी सातवें वेतन आयोग लागू न होने से परेशान एक सेवानिवृत्त महिला कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई. मुंबई से NDTV के लिए ऋतिक गणकवार की रिपोर्ट.

सेवानिवृत्त कर्मचारी की याचिका से उठा मामला

मुंबई नगर निगम के शिक्षा विभाग में कार्यरत रही एक महिला कर्मचारी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा तब खटखटाया, जब सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें सातवें वेतन आयोग के अनुसार पेंशन और अन्य वैधानिक लाभ नहीं मिले. याचिका में बताया गया कि बार-बार आग्रह के बावजूद नगर निगम और सरकार की ओर से केवल फंड की कमी का हवाला दिया जा रहा है, जिससे उनका जीवन यापन कठिन हो गया है.

Ladki Bahin Yojana: हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद लाडकी बहन योजना पर उठे सवाल

अतिरिक्त आयुक्तों को वेतन, शिक्षकों के लिए नहीं?

सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रशासन की दोहरी नीति पर तीखी टिप्पणी की. कोर्ट ने सवाल उठाया कि नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्तों को तो सातवें वेतन आयोग के अनुसार पूरा वेतन मिलता है, जिसके लिए राज्य सरकार से धन आता है, लेकिन जब बात शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की होती है तो अचानक फंड की कमी सामने आ जाती है. कोर्ट ने कहा कि जब आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने का समय आ चुका है, तब भी सातवां वेतन आयोग लंबित रखना गंभीर लापरवाही है.

‘लाडकी बहन' जैसी योजनाएं बंद करें: कोर्ट

अदालत ने साफ कहा कि यदि सरकार के पास सेवानिवृत्त शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों को पेंशन और बकाया लाभ देने के लिए पर्याप्त धन नहीं है, तो उसे ‘लाडकी बहन' (लाडकी बहीण) जैसी योजनाएं बंद करने पर विचार करना चाहिए. कर्मचारियों का वेतन और पेंशन कोई अनुग्रह नहीं, बल्कि उनका कानूनी अधिकार है.

Advertisement

मेज-कुर्सी और गाड़ियां बेचने की भी सलाह

कोर्ट यहीं नहीं रुका. सख्त लहजे में कहा गया कि यदि पेंशन के लिए धन नहीं है तो नगर निगम के कार्यालयों की मेज, कुर्सियां, एसी तक बेच दिए जाएं. जरूरत पड़े तो आयुक्त की गाड़ी समेत अन्य सरकारी वाहन भी बेचे जाएं, लेकिन कर्मचारियों को उनका हक हर हाल में दिया जाए.

अतिरिक्त आयुक्त से मांगा हलफनामा

न्यायालय ने इस मामले में नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे विस्तृत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करें कि पेंशन और अन्य लाभों का भुगतान अब तक क्यों नहीं किया गया. कोर्ट ने संकेत दिया कि इस मुद्दे पर आगे और सख्त आदेश जारी किए जा सकते हैं.

Advertisement

यह भी पढ़ें : लाडकी बहन योजना: ई‑केवाईसी न होने से 68 लाख खाते बंद, अब 30 अप्रैल तक करा लें ये काम

यह भी पढ़ें : Ladli Behna Yojana: अप्रैल में भी मिलेंगे 1500 रुपये, जानिए कब आएगी लाड़ली बहना योजना की 35वीं किस्त?

यह भी पढ़ें : गेहूं खरीदी के साथ MP में सियासत शुरू; सड़कों पर किसान आंदोलन, सीहोर में कांग्रेस ने कुत्ते को बनाया कलेक्टर

यह भी पढ़ें : MP पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी; ESB पर ऐसे देखें परिणाम

Featured Video Of The Day
Nitish kumar oath Rajyasabha: मुख्यमंत्री से राज्यसभा सांसद बने नीतीश कुमार, 21 साल बाद दोबारा पहुंचे दिल्ली