बर्थडे केक के चॉकलेट में लोहे के तार, धोखे से निगल गया 3 साल का मासूम, 48 घंटे तक अटकीं रही परिजनों की सांसें

इस खौफनाक अनुभव से गुजरने के बाद बच्चे की मां, स्नेहा शेलार ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा की ताकि किसी और परिवार को इस दर्द से न गुजरना पड़े. उन्होंने सभी माता-पिता के लिए एक बेहद जरूरी जानकारियां दीं. आजकल चलन में चल रहे कस्टमाइज्ड थीम केक्स को लेकर बेहद सतर्क रहें.

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केक के चॉकलेट में लोहे के तार.
ठाणे:

महाराष्ट्र के ठाणे में एक मासूम बच्चे के जन्मदिन की खुशियां पल भर में बड़ी चिंता और खौफ में बदल गईं. दरअसल, एक 3 साल के मासूम बच्चे ने अपने बर्थडे केक के ऊपर सजे चॉकलेट के खिलौने के अंदर छिपे लोहे के दो नुकीले तारों को अनजाने में निगल लिया. इसके बाद मासूम की जान बचाने के लिए परिवार को 48 घंटे तक भारी मानसिक तनाव और खौफ के साए में गुजारना पड़ा. ठाणे के रहने वाले इस परिवार में 3 साल के बच्चे रेयांश का जन्मदिन था. उसके लिए एक स्पेशल थीम केक ऑर्डर किया गया था, जिसके ऊपर चॉकलेट से बनी 'बॉलिंग पिन्स' सजाई गई थीं. जन्मदिन का जश्न बहुत अच्छे से बीत गया और सब कुछ सामान्य था.

लेकिन असली मुसीबत अगले दिन शुरू हुई. घर के बड़े बच्चों ने केक के बचे हुए हिस्से और सजावट को ध्यान से देखा तो उन्हें कुछ अजीब लगा. उन्होंने तुरंत माता-पिता को इसकी जानकारी दी. जांच करने पर माता-पिता के होश उड़ गए—चॉकलेट की उन सजावटी बॉलिंग पिन्स को खड़ा रखने और अंदरूनी सपोर्ट देने के लिए उनके भीतर लोहे के नुकीले तार डाले गए थे.

जब माता-पिता को एहसास हुआ कि रेयांश ने चॉकलेट के साथ उन तारों को भी निगल लिया है, तो वे तुरंत उसे लेकर ठाणे के जुपिटर अस्पताल भागे. डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए बच्चे का एक्स-रे किया. एक्स-रे की रिपोर्ट ने परिवार के सबसे बुरे डर को सच साबित कर दिया—बच्चे की छोटी आंत के अंदर लोहे के दो लंबे और नुकीले तार साफ तौर पर फंसे हुए दिखाई दे रहे थे.

एक 3 साल के बच्चे के पाचन तंत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थिति बेहद नाजुक और गंभीर थी. लोहे के नुकीले तार आंतों को फाड़ सकते थे, जिससे अंदरूनी ब्लीडिंग का बड़ा खतरा था.

डॉक्टरों का सूझबूझ भरा फैसला 

स्थिति की गंभीरता को परखने के बाद जुपिटर अस्पताल के डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी न करने का एक बड़ा लेकिन नपा-तुला फैसला लिया. डॉक्टरों ने बच्चे को अपनी कड़ी निगरानी में रखा और उम्मीद जताई कि ये बाहरी वस्तुएं प्राकृतिक रूप से मोशन के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाएं.

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48 घंटे का मानसिक तनाव और चमत्कार

अगले 48 घंटे इस परिवार के लिए किसी नरक से कम नहीं थे. पूरा परिवार गहरी चिंता, डर और मानसिक प्रताड़ना से गुजर रहा था. वे हर पल बस बच्चे की सलामती की दुआ कर रहे थे. आखिरकार, डॉक्टरों का इंतजार करने का फैसला सही साबित हुआ और एक चमत्कार हुआ. वे दोनों नुकीले लोहे के तार बच्चे के शरीर को बिना कोई अंदरूनी चोट या नुकसान पहुंचाए, प्राकृतिक रूप से मल के रास्ते बाहर निकल गए. डॉक्टरों ने जांच के बाद पुष्टि की है कि बच्चा अब पूरी तरह स्थिर है और खतरे से बाहर है.

पीड़ित मां की अपील: कस्टमाइज्ड केक को लेकर रहें सावधान!

इस खौफनाक अनुभव से गुजरने के बाद बच्चे की मां, स्नेहा शेलार ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा की ताकि किसी और परिवार को इस दर्द से न गुजरना पड़े. उन्होंने सभी माता-पिता के लिए एक बेहद जरूरी जानकारियां दीं. आजकल चलन में चल रहे कस्टमाइज्ड थीम केक्स को लेकर बेहद सतर्क रहें.

केक के ऊपर लगी दिखने वाली आकर्षक सजावटों को बच्चों को देने से पहले हमेशा यह जांच लें कि उन्हें खड़ा रखने के लिए अंदर टूथपिक, लकड़ी या लोहे के नुकीले तारों का इस्तेमाल तो नहीं किया गया है. केक ऑर्डर करते समय हमेशा कन्फर्म करें कि केक की बनावट में इस्तेमाल की गई चीजें खाने योग्य एडिबल हैं या सुरक्षित सामग्री से बनी हैं.

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