Mahakal Mandir VIP Darshan: मध्य प्रदेश के उज्जैन (Ujjain) के प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर (Mahakaleshwar Jyotirlinga Mandir Ujjain) के गर्भगृह में वीआईपी प्रवेश (VIP Entry) को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को साफ कहा कि महाकाल के सामने कोई वीआईपी नहीं होता और गर्भगृह में कौन जाएगा, यह फैसला मंदिर प्रशासन को ही करना है, अदालत इसमें दखल नहीं देगी. इससे पहले अगस्त 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भी इसी तरह की याचिका खारिज कर दी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे अपनी मांग मंदिर प्रशासन के सामने रखें. कोर्ट ने कहा, “महाकाल के सामने सब बराबर हैं, कोई विशेष दर्जा वाला नहीं होता. गर्भगृह में प्रवेश का नियम तय करने का अधिकार मंदिर कमेटी और जिला प्रशासन के पास है, अदालत इसमें क्यों हस्तक्षेप करे?”
इससे पहले अगस्त 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भी इसी तरह की याचिका खारिज कर दी थी. हाईकोर्ट ने कहा था कि गर्भगृह में प्रवेश का फैसला उज्जैन के जिला कलेक्टर और महाकाल मंदिर प्रशासक को ही करना है, अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती.
हाईकोर्ट ने ये कहा था?
याचिकाकर्ता ने इससे पहले हाईकोर्ट में पीआईएल लगाते हुए कहा था कि देश के विभिन्न मंदिरों में सभी व्यक्तियों को गर्भ गृह में प्रवेश कर अपने आराध्य भगवान शिव को जल अर्पित करने की प्रथा युगों से चली आ रही है. लेकिन महाकाल मंदिर में विशेष व्यक्तियों को गर्भ गृह में प्रवेश करवाकर आम जन के साथ भेदभाव किया जाता हैं. मामले में हाईकोर्ट ने इसे व्यक्तिगत आहत बताकर व जिला कलेक्टर द्वारा मंदिर व्यवस्था तय करना बता कर 28 अगस्त को याचिका खारिज कर दी थी थी. इस पर सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है.
सांसद ने भी की है मांग
महाकाल मंदिर के गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश की मांग सांसद अनिल फिरोजिया ने भी कर रखी है. इस संबंध में उन्होंने 28 दिसंबर 2025 को कलेक्टर से आम व्यक्तियों को तय समय के लिए दर्शन की अनुमति चर्चा की थी. सांसद ने सीएम डॉ मोहन यादव से भी मंच पर मांग की थी, लेकिन सीएम ने श्रद्धालुओं को जूना महाकाल में पूजा की सलाह दी थी.
ऐसे हुआ था प्रवेश प्रतिबंध?
4 जुलाई 2023 से श्रावण महीने में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर समिति ने 11 सितंबर 2023 को कुछ समय के लिए आम भक्तों का गर्भगृह में प्रवेश बंद कर दिया था. दावा किया था कि सावन खत्म होते ही गर्भगृह सभी के लिए खोल दिया जाएगा. लेकिन करीब ढाई साल बीतने के बाद भी मंदिर प्रबंध समिति में इस पर विचार तक नहीं किया. जबकि वीआईपी आसानी से प्रवेश करते देखे जा सकते हैं.
अब प्रतिबंध का यह कारण
महाकाल लोक बनने से पहले महाकाल मंदिर में रोजाना 20 से 30 हजार श्रद्धालु पहुंचते थे. अक्टूबर 2022 में महाकाल लोक बनने के बाद भक्तों की संख्या में चार गुनी वृद्धि हो गई. यह संख्या बढ़कर डेढ़ से दो लाख हो गई. गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश के दौरान एक घंटे में करीब 200 लोग दर्शन कर सकते हैं. दिन में 10 घंटे भी प्रवेश दिया, तो दो हजार लोग ही गर्भगृह में प्रवेश कर सकेंगे. जबकि रोज करीब डेढ़ श्रद्धालु आते हैं. ऐसे में सभी को प्रवेश देना संभव नहीं है.
गर्भगृह में प्रवेश बंद करने का कारण ये भी
मंदिर के शिवलिंग क्षरण को लेकर लगी याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मंदिर समिति से क्षरण रोकने के लिए सुझाव मांगे थे. एक सुझाव यह भी था कि गर्भगृह में श्रद्धालुओं की संख्या को सीमित किया जाए. इसके बाद मंदिर समिति ने दोपहर 12 से 5 बजे तक ही गर्भगृह में श्रद्धालुओं को जाने की अनुमति दी. वहीं कई बार जिओलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने जांच कर कलेक्टर और कोर्ट को सौंपी थी. इसके बाद समिति ने तय किया कि गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए बंद कर किया जाएगा.
पहले और वर्तमान में क्या व्यवस्था?
इस संबंध में मंदिर के महेश पुजारी ने कहा था कि 4 जुलाई 2023 से पहले 1500 रुपए की रसीद काटकर गर्भगृह में अभिषेक-पूजन करने दिया जाता था. वर्तमान में गणेश मंडपम् और नंदी हॉल से श्रद्धालुओं को दर्शन करवाए जा रहे हैं. श्रद्धालुओं की बाबा को स्पर्श कर अभिषेक की इच्छा मन में रह जाती है. गर्भगृह खुलने से भक्तों को बाबा को स्पर्श करने, जल चढ़ाने और पंचामृत अभिषेक पूजन का मौका मिल जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब याचिकाकर्ता को मंदिर प्रशासन से बातचीत करनी होगी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों के आंतरिक नियमों और प्रबंधन में अदालत का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए. इस फैसले से मंदिर प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है कि वह नियमों को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से लागू करे.
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