सर्पदंश मुआवजा घोटाला: बिलासपुर में पैसों का बंटरबांट; 14 मामलों में FIR, वकील-डॉक्टर समेत आवेदकों की मिलीभगत

बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजा घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है. 14 मामलों में FIR दर्ज की गई है. जांच में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 60 लाख रुपये से अधिक की मुआवजा राशि निकालने का मामला सामने आया है.

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बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला: 14 मामलों में FIR, वकील-डॉक्टर समेत कई लोग आरोपी

Snakebite Scam Bilaspur: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजा (Snakebite Compensation) योजना के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा हुआ है. जांच के बाद पुलिस ने 14 मामलों में एफआईआर (FIR) दर्ज कर आवेदकों, वकीलों, डॉक्टरों और परिजनों सहित कई लोगों को आरोपी बनाया है. आरोप है कि बीमारी, जहर सेवन और अन्य कारणों से हुई मौतों को सांप के काटने से हुई मृत्यु बताकर शासन से लाखों रुपये का मुआवजा हासिल किया गया. जांच में फर्जी दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड में हेरफेर और संगठित तरीके से सरकारी राशि निकालने की साजिश सामने आई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है और आगे कई बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है.

14 मामलों में दर्ज हुई एफआईआर

बिलासपुर पुलिस ने सर्पदंश मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 मामलों में एफआईआर दर्ज की है. जांच में कुल 17 प्रकरण संदिग्ध पाए गए थे, जिनमें गंभीर अनियमितताएं सामने आईं. बिलासपुर शहर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल ने बताया कि सरकंडा थाना क्षेत्र में 5, कोनी में 3, सिविल लाइन में 3, तोरवा में 2 और सिटी कोतवाली में 1 मामला दर्ज किया गया है. शेष मामलों की जांच जारी है.

Snakebite Scam Bilaspur: एएसपी पंकज पटेल

मौत की वजह कुछ और, मुआवजा सर्पदंश का

जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिन मामलों में सर्पदंश से मौत दिखाकर मुआवजा लिया गया, उनमें से कई मौतें वास्तव में बीमारी, जहर सेवन या अन्य कारणों से हुई थीं. आरोप है कि दस्तावेजों में हेरफेर और फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर मौत का कारण बदल दिया गया, ताकि सरकार से मिलने वाली मुआवजा राशि हासिल की जा सके.

डॉक्टर, वकील और आवेदकों की मिलीभगत का आरोप

प्रारंभिक जांच में यह मामला किसी एक व्यक्ति की धोखाधड़ी नहीं बल्कि संगठित रैकेट के रूप में सामने आया है. पुलिस के अनुसार इस पूरे खेल में कुछ आवेदकों के साथ डॉक्टरों, वकीलों और परिजनों की मिलीभगत की आशंका है. कथित तौर पर कानूनी और चिकित्सा दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी दावे पेश किए गए और सरकारी धन का गबन किया गया. कई संदिग्धों और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है.

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कुछ परिजनों को जानकारी तक नहीं

जांच अधिकारियों के अनुसार कुछ मामलों में मृतकों के परिजनों को यह तक जानकारी नहीं थी कि उनके नाम पर सर्पदंश मुआवजा स्वीकृत कराया गया है. कुछ दस्तावेजों में काट-छांट और बदलाव भी पाए गए हैं. इससे यह आशंका और मजबूत हुई है कि फर्जीवाड़ा संगठित तरीके से अंजाम दिया गया.

60 लाख से अधिक की गड़बड़ी उजागर

अब तक की जांच में 60 लाख रुपये से अधिक की राशि के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. वहीं कुछ जनप्रतिनिधियों का दावा है कि यह आंकड़ा 70 लाख रुपये से भी अधिक हो सकता है. जांच एजेंसियां सभी वित्तीय रिकॉर्ड, आवेदन फाइलों और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं.

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Snakebite Scam Bilaspur: विधायक सुशांत शुक्ला

विधानसभा में उठा था मामला

यह मामला सबसे पहले बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में उठाया था. विधानसभा में यह मुद्दा सामने आया कि छत्तीसगढ़ के नागलोक कहे जाने वाले जशपुर जिले की तुलना में बिलासपुर में सर्पदंश से मौत के अधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं. इसी के बाद पूरे प्रकरण की जांच शुरू की गई. जांच आगे बढ़ने पर फर्जी दावों का सिलसिला उजागर होने लगा.

100 से अधिक फर्जी मामलों की आशंका

बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला का दावा है कि अभी सामने आए मामले केवल शुरुआत हैं. उनका कहना है कि यदि गहन जांच की जाए तो 100 से अधिक फर्जी सर्पदंश मुआवजा प्रकरण सामने आ सकते हैं. इस दावे के बाद जांच एजेंसियों ने पुराने मामलों की भी समीक्षा शुरू कर दी है.

जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा

पुलिस और प्रशासन पूरे मामले को आर्थिक अपराध और संगठित धोखाधड़ी के रूप में देख रहे हैं. एडिशनल एसपी पंकज पटेल का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, नए नाम सामने आ सकते हैं. आने वाले दिनों में और एफआईआर, गिरफ्तारियां और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा.

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