Rajya Sabha Election 2026: देश के कई राज्यों में राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election) के दौरान सामने आई क्रॉस वोटिंग (Cross voting in Rajya Sabha) की आशंका अब मध्यप्रदेश की राजनीति में भी हलचल पैदा कर रही है. प्रदेश में 19 जून को राज्यसभा की तीन सीटें (Rajya Sabha seats MP) रिक्त होने जा रही हैं. इन सीटों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है. कांग्रेस जहां अपनी एकमात्र सीट को बचाने के लिए किलेबंदी में जुट गई है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) कांग्रेस (Congress) के खाते की उस सीट पर भी दावा ठोकने के मूड में नजर आ रही है. ऐसे में आने वाले दिन मध्यप्रदेश की राजनीति (MP Politics) के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं.
कांग्रेस की बढ़ी चिंता, दिल्ली में बैठकों का दौर
राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में चर्चाओं का सिलसिला दिल्ली तक पहुंच चुका है. पार्टी जानती है कि यदि उसके छह विधायक भी इधर‑उधर होते हैं तो उसे अपनी इकलौती राज्यसभा सीट गंवानी पड़ सकती है. यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए हर संभव प्रयास शुरू कर दिए हैं. संगठन स्तर पर भी विधायकों से संपर्क साधा जा रहा है और भरोसा जताने की कोशिश की जा रही है.
BJP की रणनीति: कांग्रेस की सीट पर नजर
वहीं भाजपा की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा रही है. मौजूदा समीकरण के अनुसार, राज्यसभा की तीन सीटों में से दो पर भाजपा का दावा लगभग तय माना जा रहा है. इन सीटों पर भाजपा के डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन सांसद हैं. तीसरी सीट कांग्रेस के खाते में है, जिस पर दिग्विजय सिंह वर्तमान सांसद हैं. हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे दोबारा राज्यसभा जाने के इच्छुक नहीं हैं. इससे कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.
कांग्रेस का दावा; विधायक पूरी तरह एकजुट
इस बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने पार्टी की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस के सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हमेशा धनबल और बाहुबल के जरिए जनप्रतिनिधियों को तोड़ने का प्रयास करती रही है, लेकिन इस बार उसकी कोशिशें कामयाब नहीं होंगी. चौधरी ने कहा कि कांग्रेस के विधायक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं और किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग की संभावना नहीं है.
बीजेपी का पलटवार; कांग्रेस में असंतोष
बीजेपी विधायक मोहन सिंह राठौर ने कांग्रेस के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस के भीतर असंतोष कोई नई बात नहीं है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव से लेकर अन्य कई चुनावों में कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग देखने को मिली है. कांग्रेस सरकार और संगठन दोनों को संभालने में विफल रही है. ऐसे में कांग्रेस के खाते की सीट अगर भाजपा के पास आती है तो इसमें कुछ भी अस्वाभाविक नहीं होगा.
देशभर में राज्यसभा के लिए चुनावी प्रक्रिया
भारतीय चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनावों के लिए देशभर में विस्तृत कार्यक्रम घोषित कर दिया है. कुल 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव कराए जा रहे हैं. महाराष्ट्र से सात, तमिलनाडु से छह, बिहार और पश्चिम बंगाल से पांच‑पांच, ओडिशा से चार, असम से तीन, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और हरियाणा से दो‑दो तथा हिमाचल प्रदेश से एक सीट के लिए चुनाव हो रहे हैं. इन सभी सीटों पर सांसदों का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है.
चुनाव आयोग के सख्त निर्देश
चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को लेकर सख्त दिशा‑निर्देश जारी किए हैं. आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतपत्र पर वरीयता चिह्न लगाने के लिए केवल रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही इस्तेमाल किया जाएगा. किसी अन्य पेन के उपयोग की अनुमति नहीं होगी. इसके अलावा निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पर्यवेक्षकों की भी नियुक्ति की जाएगी.
राज्यसभा की भूमिका और महत्व
गौरतलब है कि लोकसभा का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, जिसे भंग किया जा सकता है, जबकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है. राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है और हर दो वर्ष में एक‑तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं. इन्हीं रिक्तियों को भरने के लिए द्विवार्षिक चुनाव कराए जाते हैं, जिससे उच्च सदन में निरंतरता और अनुभव बना रहता है.
एमपी की राजनीति पर टिकी निगाहें
अब सबकी निगाहें मध्यप्रदेश की कांग्रेस और भाजपा के अगले कदमों पर टिकी हैं. क्रॉस वोटिंग होगी या नहीं, कांग्रेस अपनी सीट बचा पाएगी? या भाजपा बड़ा उलटफेर करेगी? इन सवालों के जवाब राज्यसभा चुनाव के साथ ही सामने आ जाएंगे.
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