PM Awas Yojana Raipur: रायपुर के लाभांडी क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों में गंभीर लापरवाही सामने आई है. संकल्प सोसाइटी में रहने वाले लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे स्वास्थ्य संकट गहरा गया है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण के दौरान सीवरेज और निस्तारी पानी को एक ही चैम्बर में जोड़ दिया गया, जिसके कारण गंदा पानी खुले में बह रहा है. इसका सीधा असर लोगों के पीने के पानी पर पड़ा है. हालात ऐसे हैं कि सोसाइटी में टाइफाइड, पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं.
सीवरेज और ड्रेनेज को एक चैम्बर में जोड़ा
स्थानीय निवासियों के अनुसार, पीएम आवास योजना के तहत बने मकानों के निर्माण में भारी तकनीकी लापरवाही बरती गई. आरोप है कि ठेकेदार ने सीवरेज और निस्तारी (ड्रेनेज) के पानी को अलग‑अलग व्यवस्था करने के बजाय एक ही चैम्बर में जोड़ दिया. इसका नतीजा यह हुआ कि सीवरेज का गंदा पानी खुले में बहने लगा और आसपास का इलाका दूषित हो गया.
PM Awas Yojana: दूषित पानी से हेल्थ पर खतरा
बोरवेल का पानी भी हुआ दूषित
खुले में बह रहे सीवरेज के पानी का सबसे बड़ा असर इलाके के बोरवेल पर पड़ा है. सोसाइटी के लोगों का कहना है कि गंदे पानी के रिसाव से बोरवेल का पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है. मजबूरी में लोगों को यही पानी पीना पड़ रहा है, क्योंकि पीने के पानी का कोई वैकल्पिक इंतजाम अब तक नहीं किया गया है.
पानी की जांच में मिले खतरनाक बैक्टीरिया
स्थानीय निवासियों ने बताया कि कराई गई जांच में पानी में खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं. रिपोर्ट में साल्मोनेला टाइफी जैसे बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, जो टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारी का कारण बनता है. इसके अलावा पीलिया और डायरिया के मामलों में भी इजाफा हुआ है, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है.
पहले भी हो चुकी है पुष्टि, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
सोसाइटी के अध्यक्ष सूरज यादव ने बताया कि तीन दिन पहले कराए गए पानी के सैंपल में भी खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं. उन्होंने कहा कि यह समस्या नई नहीं है और पहले भी कई बार जांच में पानी के दूषित होने की पुष्टि हो चुकी है. इसके बावजूद न तो ठेकेदार के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई हुई और न ही स्थायी समाधान निकाला गया.
दूषित पानी से हो चुकी हैं मौतें
सूरज यादव ने यह भी बताया कि पिछले साल दूषित पानी पीने से सोसाइटी के दो लोगों की मौत हो चुकी है. इसके बाद भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ. लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बाद भी संबंधित विभाग सिर्फ आश्वासन देकर मामला टालते रहे.
पांच साल से झेल रहे परेशानी
स्थानीय निवासी सुमित्रा मात्रे ने बताया कि वे खुद और उनका बेटा टाइफाइड से पीड़ित हैं और इससे पहले पीलिया का भी शिकार हो चुके हैं. उनका कहना है कि पिछले पांच वर्षों से यही स्थिति बनी हुई है. कई बार नगर निगम और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई.
इंदौर जैसी घटना की आशंका
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो यहां भी इंदौर जैसी बड़ी जल‑जनित बीमारी की घटना हो सकती है. उन्होंने नगर निगम से तत्काल हस्तक्षेप, दूषित पानी की सप्लाई बंद करने और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था किए जाने की मांग की है.
कितना खतरनाक है साल्मोनेला टाइफी?
साल्मोनेला टाइफी एक बेहद खतरनाक बैक्टीरिया है, जो टाइफाइड फीवर का कारण बनता है. इससे तेज बुखार, कमजोरी, पेट दर्द, उल्टी और गंभीर संक्रमण हो सकता है. समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. यह बैक्टीरिया दूषित पानी और भोजन के जरिए फैलता है. साफ पानी पीना, हाथ धोना और स्वच्छता बनाए रखना इससे बचाव के सबसे जरूरी उपाय हैं.
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