27 नक्सलियों ने 100 हथियारों के साथ सौंपा अपना 'बैंक', 7 किलो सोना और खजाना देख पुलिस रह गई दंग 

छत्तीसगढ़ में नक्सल मुक्त भारत अभियान के अंतिम दिन बड़ी सफलता मिली. नक्सलियों ने अपना तथाकथित बैंक सुरक्षाबलों को सौंप दिया, जिसमें 3 करोड़ रुपये नकद और 7 किलो सोना बरामद हुआ. 16 लाख के इनामी महिला नक्सलियों समेत 25 से अधिक नक्सलियों ने हथियार छोड़ संविधान पर भरोसा जताते हुए आत्मसमर्पण किया.

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  • नक्सल मुक्त भारत अभियान के अंतिम दिन छत्तीसगढ़ के बीजापुर और सुकमा में 25 से अधिक नक्सलियों ने हथियार डाले.
  • आत्मसमर्पण के दौरान सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के बैंक से 3 करोड़ रुपए नकदी और 7.2 किलो सोना बरामद किया.
  • बरामद हथियारों में इंसास LMG राइफल, AK-47 और .303 राइफल सहित कई घातक हथियार शामिल थे.
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Naxal Mukta Operation India: छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन अभियान अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. बीजापुर और सुकमा जिलों में सुरक्षा बलों के लगातार दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति का सीधा असर सामने आया है. वर्षों से जंगलों में हथियार और पैसों के दम पर समानांतर व्यवस्था चलाने वाले नक्सलियों ने अब न सिर्फ बंदूकें छोड़ी हैं, बल्कि अपना पूरा आर्थिक ढांचा यानी नक्सलियों का तथाकथित “बैंक” भी सुरक्षाबलों को सौंप दिया है. बड़ी मात्रा में नकदी, सोना और ऑटोमैटिक हथियारों की बरामदगी ने इस अभियान को ऐतिहासिक बना दिया है.

सुकमा से सलीम शेख और बीजापुर से पंकज भदौरिया की रिपोर्ट...

बीजापुर में नक्सलियों का बड़ा सरेंडर

बीजापुर जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत बड़ी सफलता मिली है. “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के अंतर्गत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े 25 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है. इनमें 12 महिलाएं भी शामिल हैं. आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर कुल 1 करोड़ 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था. लंबे समय से जंगलों में सक्रिय रहे इन कैडरों ने आखिरकार हिंसा का रास्ता छोड़ संविधान और लोकतंत्र पर भरोसा जताया.

14 करोड़ रुपये से ज्यादा का ‘नक्सल बैंक' बरामद

आत्मसमर्पण के दौरान और नक्सलियों की निशानदेही पर सुरक्षा बलों ने उनके तथाकथित “बैंक” को उजागर किया. कार्रवाई में कुल 14 करोड़ 6 लाख रुपये का डंप बरामद किया गया. इसमें 2 करोड़ 90 लाख रुपये नकद और 7.20 किलो सोना शामिल है. बरामद सोने की कीमत करीब 11 करोड़ 16 लाख रुपये आंकी गई है. अधिकारियों का कहना है कि इससे नक्सल संगठन की आर्थिक रीढ़ लगभग टूट चुकी है.

16 लाख की दो महिला नक्सलियों ने किया सरेंडर.

93 घातक हथियार हुए जब्त

बीजापुर में हुई इस कार्रवाई के दौरान LMG, AK‑47, SLR और इंसास राइफल समेत कुल 93 ऑटोमैटिक और अर्ध‑ऑटोमैटिक हथियार बरामद किए गए. पुलिस के मुताबिक इन्हीं हथियारों के सहारे नक्सली इलाके में डर, वसूली और हिंसा का नेटवर्क चला रहे थे. इतनी बड़ी हथियार जब्ती से उनकी ताकत को गहरा झटका लगा है.

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सीनियर अधिकारियों की मौजूदगी में सरेंडर

यह आत्मसमर्पण बस्तर आईजी सुंदरराज पी., सीआरपीएफ डीआईजी बीएस नेगी, बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव सहित पुलिस, सीआरपीएफ और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ. आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन के अलग‑अलग स्तर के कैडर शामिल थे, जिनमें CyPC, DVCM, PPCM, ACM और पार्टी सदस्य भी थे.

बड़े नक्सली चेहरों ने छोड़ा संगठन

सरेंडर करने वालों में CyPC मंगल कोरसा उर्फ मोटू, CyPC आकाश उर्फ फागु उईका, DVCM शंकर मुचाकी और ACM पाले कुरसम जैसे बड़े माओवादी कैडर भी शामिल हैं. इन सभी ने माना कि नक्सल विचारधारा सिर्फ हिंसा और विनाश की ओर ले जाती है, जबकि मुख्यधारा में सम्मान और सुरक्षित भविष्य संभव है.

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सुकमा में भी टूटा नक्सलियों का नेटवर्क

बीजापुर के बाद सुकमा जिले में भी सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है. लगातार सर्च ऑपरेशन और दबाव के चलते नक्सलियों द्वारा जंगलों में छिपाकर रखा गया कैश और हथियारों का डंप सामने आया है. सुरक्षाबलों ने यहां से 10 लाख रुपये नकद और कई ऑटोमैटिक हथियार बरामद किए हैं.

नक्सलियों ने सौंपे 100 से ज्यादा हथियार.

जंगल से मिला हथियारों का जखीरा

विशेष सर्च अभियान में एक इंसास LMG, दो AK‑47 राइफल, तीन .303 राइफल, AK‑47 के 14 राउंड और .303 के 13 राउंड जब्त किए गए. अधिकारियों का कहना है कि यह बरामदगी नक्सलियों के लिए रणनीतिक और मानसिक दोनों रूप से बड़ा नुकसान है.

16 लाख के दो इनामी नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

सुकमा में ओडिशा के केकेबीएन डिवीजन से जुड़े दो सक्रिय नक्सलियों जनिला उर्फ मड़कम हिंडमे (30 वर्ष) और सोनी उर्फ माड़वी कोसी (24 वर्ष) ने 31 मार्च को पुलिस के सामने हथियार डाल दिए. दोनों कंपनी नंबर‑08 के सदस्य थे और प्रत्येक पर 8‑8 लाख रुपये का इनाम घोषित था.

एसपी का दावा- नक्सलवाद अब अंतिम दौर में

सुकमा पुलिस अधीक्षक का कहना है कि लगातार हो रही डंप की बरामदगी और इनामी नक्सलियों के सरेंडर से साफ है कि माओवादी संगठन कमजोर पड़ चुका है. उन्होंने बताया कि दूरदराज इलाकों तक सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचने से लोग अब बंदूक नहीं, विकास को चुन रहे हैं. बस्तर क्षेत्र तेजी से नक्सलमुक्त भविष्य की ओर बढ़ रहा है.

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