नारायणपुर में नक्सलियों को बड़ा झटका; दिवालुर में नया पुलिस कैंप, अबूझमाड़ में विकास की दस्तक

Narayanpur New Police Camp: अबूझमाड़ के दुर्गम इलाके दिवालुर में पुलिस ने नया कैंप स्थापित किया. सड़क, मोबाइल नेटवर्क और विकास के रास्ते खुले. नक्सलवाद पर बड़ा प्रहार.

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Divalur Police Camp Narayanpur: नारायणपुर में नक्सलियों को बड़ा झटका; दिवालुर में नया पुलिस कैंप, अबूझमाड़ में विकास की दस्तक

Narayanpur Naxal News: नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में नारायणपुर पुलिस ने एक और निर्णायक सफलता हासिल की है. जिस अबूझमाड़ (Abujhmad Naxalism) इलाके को माओवादी लंबे समय तक अपनी सुरक्षित शरणस्थली और अजेय किला मानते रहे, वहां अब सुरक्षा बलों ने स्थायी मौजूदगी दर्ज करा दी है. दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र दिवालुर (Divalur Police Camp) में नए सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप की स्थापना के साथ ही यह साफ संकेत मिल गया है कि माओवादियों के तथाकथित ‘सेफ जोन' में अब विकास की सीधी एंट्री हो चुकी है. साल 2026 में यह सातवां नया कैंप है, जो बता रहा है कि अब माड़ का हर कोना मुख्यधारा से जुड़ने की राह पर है.

96 किलोमीटर दूर बीहड़ इलाके में मजबूत कदम

नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 96 किलोमीटर दूर ओरछा क्षेत्र के सबसे दुर्गम और बीहड़ इलाकों में शामिल दिवालुर अब सुरक्षा बलों के नियंत्रण में है. यह वही इलाका है जहां कभी माओवादी सेंट्रल कमेटी के नेता रणनीतियां बनाते थे. कुख्यात नक्सली बसवा राजू जैसे आतंकियों की मौत का गवाह रहा यह क्षेत्र लंबे समय तक पुलिस की पहुंच से बाहर रहा, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. पुलिस कैंप की स्थापना माओवादियों के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में बड़ी कामयाबी मानी जा रही है.

‘माड़ बचाओ' अभियान के तहत 16 मार्च को स्थापना

वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में ‘माड़ बचाओ' अभियान के तहत 16 मार्च को इस नए कैंप की स्थापना की गई. इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में नारायणपुर पुलिस के साथ डीआरजी, बस्तर फाइटर्स और आईटीबीपी की छह अलग-अलग वाहिनियां 38वीं, 44वीं, 41वीं, 45वीं, 53वीं और 29वीं बटालियन शामिल रहीं. जवानों को घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ों और कठिन रास्तों से गुजरते हुए लंबी दूरी तय करनी पड़ी, लेकिन मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया.

सड़क कनेक्टिविटी से खुले विकास के रास्ते

दिवालुर में कैंप खुलने से कांदुलनार-ओरछा से दिवालुर और कुमनार तक की महत्वपूर्ण सड़क कनेक्टिविटी का रास्ता साफ हो गया है. यह इलाका दशकों से अलग-थलग पड़ा था, जहां न तो पक्की सड़कें थीं और न ही प्रशासन की नियमित पहुंच. अब रेकापारा, कुमनार, गुण्डेकोट और लेकवाडा जैसे गांवों तक मोबाइल नेटवर्क, बिजली, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचने का रास्ता खुलेगा. स्थानीय लोगों के लिए यह कैंप उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है.

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बीजापुर तक सीधी सड़क, ग्रामीणों को बड़ी राहत

सबसे बड़ी उपलब्धि यह मानी जा रही है कि कुमनार से सोनपुर होते हुए बीजापुर के भैरमगढ़ तक सीधी सड़क कनेक्टिविटी संभव हो सकेगी. इससे न सिर्फ ग्रामीणों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि आपात स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासन की पहुंच भी समय पर सुनिश्चित हो पाएगी.

नारायणपुर पुलिस का अभियान जारी रहेगा

गौरतलब है कि नारायणपुर पुलिस इस अभियान को लेकर पूरी तरह आक्रामक है. साल 2025 में नक्सलियों की तथाकथित राजधानी कुतुल समेत 26 कैंप स्थापित किए गए थे. वहीं 2026 में अब तक जटवर, वाड़ापेंदा और बोटेर सहित सात नए कैंप खोले जा चुके हैं. आईजी बस्तर पी. सुंदरराज और एसपी रॉबिंसन गुरिया के नेतृत्व में सुरक्षा बलों का हौसला बुलंद है, जबकि ग्रामीण भी विकास की इस पहल को सकारात्मक कदम बता रहे हैं.

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शांतिपूर्ण नारायणपुर की ओर कदम

दिवालुर में पुलिस कैंप की स्थापना माओवादी विचारधारा के ताबूत में आखिरी कील के तौर पर देखी जा रही है. जब यहां बंदूकों की गूंज की जगह स्कूल की घंटी और एंबुलेंस का सायरन सुनाई देगा, तभी सही मायनों में शांतिपूर्ण और समृद्ध नारायणपुर का सपना साकार होगा.

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