MP में UCC लागू करने की तैयारी तेज: रंजना प्रकाश देसाई समिति 1-2 दिन में सौंपेगी फाइनल ड्राफ्ट

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम. रंजना प्रकाश देसाई समिति 1-2 दिन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अंतिम ड्राफ्ट सौंप सकती है. मसौदे में शादी, तलाक, संपत्ति अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप शामिल हैं.

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MP में UCC लागू करने की तैयारी तेज: रंजना प्रकाश देसाई समिति 1-2 दिन में सौंप सकती है अंतिम ड्राफ्ट, शादी-तलाक से लेकर संपत्ति अधिकार तक शामिल

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. राज्य सरकार द्वारा यूसीसी का प्रारूप तैयार करने के लिए गठित रंजना प्रकाश देसाई समिति की 60 दिन की निर्धारित अवधि पूरी हो चुकी है और अब समिति अगले एक-दो दिनों में अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप सकती है. बताया जा रहा है कि प्रस्तावित ड्राफ्ट में विवाह, तलाक, संपत्ति अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक और कानूनी विषयों को शामिल किया गया है. समिति ने कानून को व्यावहारिक और व्यापक बनाने के लिए अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन करने के साथ हजारों सुझावों का भी विश्लेषण किया है.

अंतिम चरण में पहुंची यूसीसी की तैयारी

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता को लेकर गठित रंजना प्रकाश देसाई समिति अब अपने काम के अंतिम चरण में पहुंच गई है. समिति की निर्धारित 60 दिन की अवधि पूरी हो गई है और अंतिम ड्राफ्ट लगभग तैयार माना जा रहा है. सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंपे जाने से पहले समिति की एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें मसौदे के अंतिम बिंदुओं पर सहमति बनाई जाएगी.

शादी, तलाक और संपत्ति अधिकार होंगे प्रमुख मुद्दे

प्रस्तावित यूसीसी ड्राफ्ट में नागरिक जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है.

  • विवाह (Marriage)
  • तलाक (Divorce)
  • संपत्ति अधिकार (Property Rights)
  • लिव-इन रिलेशनशिप

जैसे विषय इसमें शामिल हैं. इसका उद्देश्य अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान कानूनी ढांचा विकसित करना बताया जा रहा है.

उत्तराखंड और गुजरात मॉडल का किया अध्ययन

समिति ने मसौदा तैयार करते समय पहले से यूसीसी लागू कर चुके या इस दिशा में आगे बढ़ रहे राज्यों के अनुभवों का भी अध्ययन किया है. जानकारी के अनुसार उत्तराखंड और गुजरात के मॉडल का गहन विश्लेषण किया गया ताकि मध्यप्रदेश के लिए व्यवहारिक और लागू करने योग्य प्रारूप तैयार किया जा सके.

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2 हजार से ज्यादा सुझावों को किया शामिल

यूसीसी के प्रारूप को तैयार करने में जनभागीदारी पर भी विशेष ध्यान दिया गया. समिति ने विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, कानूनी और अन्य संस्थाओं से प्राप्त 2,000 से अधिक सुझावों का अध्ययन किया. आम नागरिकों से मिले सुझावों को भी रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल किया गया. समिति का प्रयास रहा कि प्रस्तावित कानून सामाजिक विविधताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाए.

सरकार के अगले कदम पर नजर

फाइनल ड्राफ्ट मुख्यमंत्री को सौंपे जाने के बाद राज्य सरकार इसकी समीक्षा करेगी. इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे इस प्रस्ताव पर अब सभी की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है.

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