एमपी में राज्यसभा का 'साउथ कनेक्शन' : केरल-तमिलनाडु के नतीजों से तय होगा भोपाल का सियासी गणित

Rajya Sabha Election MP: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का रोमांच अब दक्षिण भारत के चुनावी नतीजों पर टिक गया है, जहां डॉ. मुरुगन और जॉर्ज कुरियन की जीत-हार भोपाल के पूरे सियासी गणित को बदल सकती है. विधायकों की घटती संख्या और संभावित क्रॉस वोटिंग के बीच बीजेपी तीसरी सीट पर सेंध लगाने की तैयारी में है, जबकि कांग्रेस अपने आंतरिक असंतोष और दावों को सुलझाने में उलझी हुई है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • मध्य प्रदेश में राज्यसभा की सीटों पर राजनीतिक लड़ाई केरल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव नतीजों पर निर्भर है
  • केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन और जॉर्ज कुरियन के विधानसभा चुनाव जीतने से चार राज्यसभा सीटें खाली हो सकती हैं
  • बीजेपी के पास 160 से अधिक विधायक होने के कारण दो राज्यसभा सीटें सुरक्षित हैं, तीसरी और चौथी सीट पर मुकाबला है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

Rajya Sabha seats from Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में इस समय असली राजनीतिक लड़ाई भोपाल या दिल्ली में नहीं, बल्कि सैकड़ों किलोमीटर दूर केरल और तमिलनाडु के चुनाव नतीजों पर टिकी हुई है.जैसे-जैसे मतगणना का दिन नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे राज्य के दो राज्यसभा सांसद केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन और जॉर्ज कुरियन की किस्मत एक ऐसी राजनीतिक श्रृंखला प्रतिक्रिया का कारण बन सकती है, जो मध्य प्रदेश के राज्यसभा समीकरण को पूरी तरह बदल देगी.अगर दोनों नेता अपने-अपने विधानसभा चुनाव जीत जाते हैं, तो मध्य प्रदेश में अचानक तीन नहीं, बल्कि चार राज्यसभा सीटें खाली हो सकती हैं. इससे राजनीतिक हलचल तेज हो जाएगी और बीजेपी व कांग्रेस दोनों में नए सत्ता समीकरण बनने के रास्ते खुल जाएंगे.

मुरुगन और कुरियन: दो इस्तीफे और बदलता समीकरण

राज्यसभा की वर्तमान रिक्तियों की बात करें तो दिग्विजय सिंह, डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त होने की वजह से हैं. लेकिन असली ट्विस्ट केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन को लेकर है. मुरुगन का कार्यकाल वैसे तो 2030 तक सुरक्षित है, लेकिन यदि वे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करते हैं, तो उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा देना होगा. ऐसी स्थिति में मध्य प्रदेश में तीन नहीं, बल्कि चार सीटों पर चुनावी जंग देखने को मिल सकती है. यह एक इस्तीफा न केवल सीटों की संख्या बढ़ाएगा, बल्कि 'टीम मोदी' में मध्य प्रदेश के किसी नए चेहरे की एंट्री का रास्ता भी साफ कर सकता है.

ये भी पढ़ें: राज्यसभा उपसभापति का चुनाव, बिहार के इस नेता पर विपक्ष इस बार लगा सकता है दांव

जीत का फॉर्मूला और कांग्रेस की कमजोर कड़ी

मध्य प्रदेश विधानसभा के 230 विधायकों के आधार पर राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता है. बीजेपी के पास 160 से अधिक विधायक हैं, जिससे उसकी दो सीटें पूरी तरह सुरक्षित हैं. चुनौती और रोमांच तीसरी और संभावित चौथी सीट को लेकर है. कांग्रेस की स्थिति कागजों पर 65 विधायकों की है, लेकिन धरातल पर उसकी ताकत घटती दिख रही है. राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने, मुकेश मल्होत्रा के मतदान से वंचित होने और निर्मला सप्रे पर लटकी अयोग्यता की तलवार ने कांग्रेस के प्रभावी वोटों की संख्या करीब 62 तक सीमित कर दी है. 58 के जादुई आंकड़े से महज 4 वोट अधिक होना कांग्रेस के लिए किसी जोखिम से कम नहीं है.

बीजेपी की नजर और कांग्रेस के भीतर का कोहराम

दो सीटें सुरक्षित करने के बाद बीजेपी के पास लगभग 47 अतिरिक्त वोट बचते हैं. तीसरी सीट के लिए उसे केवल 11 और वोटों की दरकार है. जिस तरह से कांग्रेस के कुछ विधायकों की नजदीकी आरएसएस के कार्यक्रमों में बढ़ी है, उसने क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को हवा दे दी है. दूसरी तरफ, कांग्रेस के भीतर उम्मीदवारी को लेकर खींचतान मची है. दिग्विजय सिंह के चुनाव न लड़ने के फैसले के बाद दलित, ब्राह्मण और सिंधी प्रतिनिधित्व की मांग उठने लगी है. रीवा के नेता दिलीप ठारवानी की सिंधी कार्ड वाली मांग ने पार्टी के लिए संतुलन बनाना और भी कठिन कर दिया है.

Advertisement

संघ की पसंद और नए चेहरों की सुगबुगाहट

बीजेपी के खेमे में नए उम्मीदवारों को लेकर मंथन जारी है. सुमेर सिंह सोलंकी की जगह किसी नए आदिवासी चेहरे को मौका मिल सकता है, जिसमें हर्ष चौहान और रंजना बघेल के नाम चर्चा में हैं. वहीं, अगर जॉर्ज कुरियन की सीट खाली होती है, तो केरल मूल के और मध्य प्रदेश में संगठन पर मजबूत पकड़ रखने वाले अरविंद मेनन को प्रबल दावेदार माना जा रहा है. इन सब के बीच, भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार के तेवरों ने चुनाव को और भी पेचीदा बना दिया है. स्पष्ट है कि आने वाले दिन मध्य प्रदेश की राजनीति में केवल वोटिंग के नहीं, बल्कि बारीकी से बुने गए सियासी गणित के होंगे.
ये भी पढ़ें: आप के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के घर पर ईडी रेड, लवली यूनिवर्सिटी पर भी छापेमारी

Featured Video Of The Day
इजरायल के साथ सीजफायर के बाद लेबनान में जश्न, बेरूत की सड़कों पर उतरे लोग, आसमान में आतिशबाजी
Topics mentioned in this article