MP Ka Gehun: मध्यप्रदेश आज न केवल गेहूं, बल्कि अन्य फसलों के उत्पादन में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है. देश के खाद्यान्न उत्पादन में मध्यप्रदेश ने “गेहूं प्रदेश” के रूप में खुद को स्थापित कर लिया है. वर्ष 2025‑26 में प्रदेश का गेहूं उत्पादन बढ़कर 365.11 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जबकि उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. अब प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादकता 3780 किलोग्राम हो चुकी है. देश के कुल गेहूं उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान लगभग 18 प्रतिशत पहुंच गया है, जो कभी पारंपरिक गेहूं उत्पादक राज्यों तक सीमित माना जाता था. गुणवत्ता, उत्पादन और निर्यात, तीनों स्तरों पर मिली इस सफलता ने मध्य प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाई है.
गेहूं उत्पादन और क्षेत्रफल में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
मध्यप्रदेश में गेहूं उत्पादन की यह कहानी योजनाबद्ध प्रयासों का परिणाम है. वर्ष 2004‑05 में जहां प्रदेश में महज 42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती होती थी, वहीं आज यह क्षेत्रफल बढ़कर 96.58 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है. किसानों के हित में बनाई गई नई कृषि योजनाएं, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और समय पर सहायता ने प्रदेश को परंपरागत गेहूं उत्पादक राज्यों की बराबरी पर ला खड़ा किया है.
MP Ka Gehun: मंडी में गेहूं
अंतरराष्ट्रीय बाजार में एमपी के गेहूं की धाक
मध्यप्रदेश का गेहूं आज केवल देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मजबूती से अपनी जगह बना चुका है. प्रदेश से निर्यात होने वाले गेहूं में 35 से 40 प्रतिशत तक योगदान मध्यप्रदेश का रहता है. खास मिठास और उच्च गुणवत्ता के कारण शरबती और ड्यूरम गेहूं की मांग जर्मनी, अमेरिका, इटली, यूके, दुबई और साउथ अफ्रीका जैसे देशों में बनी हुई है. इसके अलावा ओमान, यमन, यूएई, साउथ कोरिया, कतर, बांग्लादेश, सऊदी अरब, मलेशिया और इंडोनेशिया में भी मध्यप्रदेश का गेहूं पसंद किया जा रहा है. यह गेहूं ब्रेड, बिस्कुट और पास्ता निर्माण के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है.
क्यों गुणवत्ता में बेस्ट है मध्यप्रदेश का गेहूं?
भारत सरकार के गेहूं अनुसंधान निदेशालय द्वारा किए गए अध्ययन में मध्यप्रदेश के गेहूं की गुणवत्ता की पुष्टि हुई है. लगभग 2000 सैंपल के परीक्षण के बाद पाया गया कि प्रदेश के सामान्य किस्म के गेहूं में भी औसतन 12.6 प्रतिशत प्रोटीन, 43.6 पीपीएम आयरन और 38.2 पीपीएम जिंक मौजूद है.
वहीं कठिया प्रजाति के गेहूं में प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम और जिंक की मात्रा और अधिक पाई गई, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसे बेहतर कीमत मिलती है.
MP Ka Gehun: गेहूं की फसल
उन्नत किस्मों ने बदली खेती की तस्वीर
प्रदेश में विकसित गेहूं की किस्मों ने उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है.
- जे.डब्ल्यू.एस.‑17, जे.डब्ल्यू.‑3020 और जे.डब्ल्यू.‑321 किस्में एक सिंचाई में ही 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती हैं.
- जे.डब्ल्यू.‑1142, जे.डब्ल्यू.‑3288 और जे.डब्ल्यू.‑1203 अधिक तापमान में भी अच्छा उत्पादन करती हैं.
- जे.डब्ल्यू.‑1202, जे.डब्ल्यू.‑3288 और जे.डब्ल्यू.‑1106 प्रोटीन से भरपूर हैं.
- एमपीआर‑1215 और जे.डब्ल्यू.‑3211 निर्यात के लिए विशेष रूप से उपयुक्त मानी जाती हैं.
अब तक 51 किस्मों का विकास
मध्यप्रदेश में अब तक गेहूं की 51 किस्मों का विकास किया जा चुका है. केवल पिछले एक दशक में ही 12 नई किस्में विकसित की गई हैं. वर्ष 2026 में उपयोग में आने वाली पोषक तत्वों से भरपूर गेहूं की 5 किस्मों में से 4 किस्में मध्यप्रदेश में विकसित हुई हैं, एमपीओ‑1215, एमपी‑3211, एमपी‑1202 और एमपी‑4010.
MP Ka Gehun: गेहूं उपार्जन
100 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का लक्ष्य
प्रदेश ने गेहूं उपार्जन में भी नया लक्ष्य तय किया है. खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया है. गेहूं उपार्जन 23 मई तक जारी रहेगा. किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस सहित कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की जा रही है. उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए सभी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं.
बीज उत्पादन में भी अग्रणी प्रदेश
मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा प्रामाणिक बीज उत्पादक राज्य बन चुका है. सहकारी क्षेत्र में प्रदेश पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया है. बीज उत्पादन कंपनियों से तीन लाख से अधिक किसान जुड़े हुए हैं. ये कंपनियां अब भंडारण, विपणन और खाद्य प्रसंस्करण से भी जुड़ रही हैं. फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों को और मजबूत किया जा रहा है.
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