- मध्य प्रदेश सरकार ने जबलपुर के बरगी डैम क्रूज हादसे की न्यायिक जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग का गठन किया है
- आयोग के प्रमुख रिटायर्ड हाईकोर्ट जज संजय द्विवेदी को तीन माह में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश मिला है
- जांच में क्रूज की फिटनेस, सुरक्षा मानकों की अनदेखी, प्रशासनिक लापरवाही आदि की समीक्षा शामिल होगी
Jabalpur Cruise Accident: मध्य प्रदेश सरकार ने जबलपुर के बरगी डैम में हुए भीषण क्रूज हादसे की न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं. 30 अप्रैल को हुई इस हृदयविदारक घटना में 13 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद अब राज्य सरकार ने जवाबदेही तय करने के लिए सख्त कदम उठाया है. सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस जांच के लिए अधिनियम, 1952 की धारा 3 के तहत एक सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है. इस अहम जांच की जिम्मेदारी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज संजय द्विवेदी को सौंपी गई है, जो आगामी तीन महीनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेंगे.
हादसे के कारणों और प्रशासनिक लापरवाही की होगी पड़ताल
यह न्यायिक आयोग विशेष रूप से उन कारणों की जांच करेगा जिनकी वजह से इतना बड़ा हादसा हुआ. 30 अप्रैल को बरगी डैम में क्रूज डूबने से आठ महिलाओं और चार बच्चों समेत 13 लोगों की मौत हो गई थी. लगभग 60 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी शवों को निकाला जा सका था. आयोग अब यह सुनिश्चित करेगा कि इस त्रासदी के लिए असल में कौन जिम्मेदार है. जांच के दायरे में न केवल जहाज की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को रखा गया है, बल्कि प्रशासनिक देखरेख और बचाव कार्यों में हुई देरी की भी बारीकी से समीक्षा की जाएगी.
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प्रदेशभर के जल पर्यटन के लिए बनेगा नया सुरक्षा ढांचा
जस्टिस संजय द्विवेदी आयोग की यह जांच केवल बरगी डैम तक ही सीमित नहीं रहेगी. सरकार ने आयोग को मध्य प्रदेश के सभी जल निकायों में संचालित होने वाले नावों, क्रूज और वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों के लिए एक व्यापक सुरक्षा ढांचा तैयार करने का निर्देश दिया है. अंतर्देशीय पोत अधिनियम, 2021 और एनडीएमए के सुरक्षा दिशा-निर्देशों के आधार पर प्रमाणन तंत्र की समीक्षा की जाएगी. आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्य में क्रूज और नावों के सुरक्षित संचालन और रखरखाव के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की जाएगी. साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी पर्यटन स्थलों पर क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) की स्थापना के सुझाव भी मांगे गए हैं.
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मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद कार्रवाई और कानूनी शिकंजा
इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद जबलपुर का दौरा कर दुर्घटना स्थल का निरीक्षण किया था और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी. मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद प्रशासन ने क्रूज पायलट महेश पटेल, हेल्पर छोटेलाल गोंड और टिकट काउंटर प्रभारी बृजेंद्र की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं. इसके अलावा, होटल मैकल रिसॉर्ट और बोट क्लब के प्रबंधक सुनील मरावी को निलंबित कर दिया गया है, जबकि क्षेत्रीय प्रबंधक संजय मल्होत्रा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है.
अदालत का कड़ा रुख: पायलट और कर्मचारियों पर दर्ज होगी एफआईआर
प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ इस मामले में कानूनी शिकंजा भी कसता जा रहा है. 6 मई को जबलपुर की एक अदालत ने क्रूज पायलट और स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं. न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी डी.पी. सूत्रकार ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए टिप्पणी की कि पायलट ने कथित तौर पर लापरवाही से क्रूज चलाया और संकट के समय यात्रियों को बचाने के बजाय खुद की जान बचाकर उन्हें अकेला छोड़ दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह आचरण भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है.
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