Gehu Kharidi MP 2026: मध्य प्रदेश में रबी सीजन के सबसे अहम चरण यानी गेहूं उपार्जन को लेकर सरकार ने तैयारियां पूरी कर ली हैं. इस बार समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का दायरा और असर दोनों पहले से बड़ा होने वाला है. प्रदेश में रिकॉर्ड संख्या में किसानों ने पंजीयन कराया है और उपार्जन का लक्ष्य भी बढ़ाया गया है. सरकार का दावा है कि किसानों को बेहतर दाम, समयबद्ध खरीदी और भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था मिलेगी, ताकि फसल बेचने में किसी तरह की दिक्कत न आए. उपार्जन प्रक्रिया को चरणबद्ध ढंग से लागू किया जा रहा है, जिससे भीड़ और अव्यवस्थाओं से बचा जा सके.
रिकॉर्ड किसानों ने कराया पंजीयन
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के मुताबिक इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है. यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 लाख 60 हजार अधिक है. सरकार का मानना है कि पंजीयन में आई यह बढ़ोतरी किसानों के बढ़ते भरोसे और बेहतर उपार्जन व्यवस्था का संकेत है. उन्होंने बताया कि इस बार किसानों का पंजीकृत रकबा 41.58 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल से 6.65 लाख हेक्टेयर ज्यादा है.
MP Gehu Kharidi 2026: गेहूं खरीदी की तैयारी पूरी
MSP के साथ बोनस, किसानों को बेहतर दाम का दावा
इस वर्ष गेहूं पर किसानों को 2585 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य मिलेगा. इसके साथ ही सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस भी दिया जा रहा है. मंत्री राजपूत का कहना है कि इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और निजी व्यापारियों पर निर्भरता कम होगी. सरकार का फोकस इस बार सिर्फ खरीदी तक सीमित नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर भी है कि भुगतान समय पर हो और किसानों को बार‑बार केंद्रों के चक्कर न लगाने पड़ें.
ऐसे होगी खरीदी, भीड़ से बचने की कोशिश
किसानों को उपार्जन केंद्रों पर लंबा इंतजार न करना पड़े, इसके लिए इस बार खरीदी चरणबद्ध तरीके से शुरू की जा रही है. इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में गेहूं खरीदी 10 अप्रैल 2026 से शुरू होगी. शेष संभागों में उपार्जन 15 अप्रैल 2026 से प्रारंभ किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से व्यवस्थापन बेहतर होगा और शुरुआती दिनों में अराजकता जैसी स्थिति नहीं बनेगी.
रकबे का सत्यापन और स्लॉट बुकिंग पर जोर
मंत्री राजपूत ने बताया कि राजस्व विभाग द्वारा किसानों के पंजीकृत रकबे का सत्यापन तेजी से किया जा रहा है. सत्यापन पूरा होने के बाद किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इससे किसान अपनी सुविधानुसार तारीख और समय चुनकर केंद्रों पर गेहूं बेच सकेंगे. सरकार का दावा है कि स्लॉट सिस्टम से न केवल अव्यवस्था कम होगी, बल्कि किसानों का समय और खर्च भी बचेगा.
78 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का लक्ष्य
पिछले वर्ष प्रदेश में समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था. इस बार सरकार ने लक्ष्य बढ़ाकर 78 लाख मीट्रिक टन कर दिया है. मंत्री राजपूत का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों, पश्चिम एशिया में युद्ध और बाजार में अस्थिरता के बावजूद सरकार ने किसानों के हित को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला किया है.
ईंधन और बारदाने को लेकर सरकार की तैयारी
पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते पेट्रोल, डीजल और एलपीजी जैसी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी. मगर सरकार का कहना है कि केंद्र और राज्य के समन्वय से प्रदेश में ईंधन और गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, जिससे उपार्जन प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी. इसी तरह बारदाने की उपलब्धता को लेकर भी पहले से तैयारी कर ली गई है.
50 हजार जूट गठानों का अतिरिक्त आवंटन
मंत्री राजपूत ने बताया कि भारत सरकार ने मध्य प्रदेश को 50 हजार जूट की गठानों का अतिरिक्त आवंटन दिया है. साथ ही गेहूं उपार्जन के लिए HDP/PP बैग और एक बार इस्तेमाल होने वाले जूट बारदाने की भी अनुमति दी गई है. केंद्र सरकार बारदाने और भंडारण की स्थिति की लगातार समीक्षा कर राज्य को सहयोग दे रही है.
भंडारण की व्यवस्था, जिलों में बढ़ाई जाएगी क्षमता
जिन जिलों में भंडारण क्षमता सीमित है, वहां संयुक्त भागीदारी योजना के तहत गोदामों में क्षमता के 120 प्रतिशत तक भंडारण की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मार्च‑अप्रैल और मई‑जून 2026 का राशन एक साथ वितरित किया जाएगा. इससे लगभग 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक अतिरिक्त भंडारण क्षमता उपलब्ध रहेगी.
देश में सबसे ज्यादा कवर्ड स्टोरेज क्षमता मध्य प्रदेश में
प्रदेश सरकार का दावा है कि मध्य प्रदेश के पास देश की सबसे बड़ी कवर्ड भंडारण क्षमता लगभग 400 लाख मीट्रिक टन है. इसमें से करीब 103 लाख मीट्रिक टन क्षमता फिलहाल खाली है, जो इस वर्ष के गेहूं उपार्जन लक्ष्य से भी अधिक बताई जा रही है.
अब असली परीक्षा
सरकार की घोषणाओं और तैयारियों से साफ है कि इस बार गेहूं उपार्जन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है. अब असली परीक्षा जमीन पर व्यवस्थाओं के अमल की होगी यानी किसानों को समय पर टोकन मिले, खरीदी में पारदर्शिता रहे और भुगतान तय समय में हो. अगर यह सब सही तरीके से हुआ, तो यह उपार्जन सीजन वाकई किसानों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है.
क्या बनेगा रिकॉर्ड?
2020 में कोरोना महामारी संकट और लॉकडाउन के दौरान मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 129 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी कर देशभर में खरीदी का नया रिकार्ड कायम किया था. ऐसे में इस बार यह रिकॉर्ड टूटते हुए नहीं दिख रहा है.
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