- मध्य प्रदेश सरकार ने चार लाख अड़तालीस हजार करोड़ रुपए के रोलिंग बजट में अगले तीन साल का रोडमैप है
- बजट में गरीब, युवा, किसान, नारी शक्ति के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री को जोड़करतीन लाख करोड़ खर्च होंगे
- द्वारका द्वार योजना में 5 हजार करोड़ रुपए शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए और यशोदा दुग्ध योजना में बच्चों को दूध
Madhya Pradesh Budget 2026 :मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने अपना पहला 'रोलिंग बजट' पेश कर राज्य के विकास का अगला तीन साल का रोडमैप सामने रख दिया है. 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपए करोड़ के इस भारी-भरकम बजट में सरकार ने 'आस्था' और 'अर्थव्यवस्था' का अनोखा संगम दिखाया है. जहाँ एक ओर 'द्वारका द्वार' और 'यशोदा दुग्ध' जैसी योजनाओं के जरिए कृष्ण भक्ति का रंग गहरा है, वहीं 'GYANII' मॉडल के तहत गरीब, युवा, किसान और नारी शक्ति के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री को जोड़कर मास्टर स्ट्रोक खेलने की कोशिश की गई है. हालांकि, 74 हजार करोड़ के बढ़ते राजकोषीय घाटे और पेट्रोल-डीजल पर वैट न घटने जैसे मुद्दों ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है.
GYAN से GYANII तक: विकास के छह नए स्तंभ
पिछले साल सरकार ने बजट को GYAN यानी गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति पर केंद्रित बताया था. इस बार इसे GYANII कर दिया गया है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री भी जोड़ दिए गए हैं. सरकार का दावा है कि इन छह सेक्टरों पर 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होंगे और सबसे ज्यादा फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर, किसानों और महिलाओं पर रहेगा.
बजट में कृष्ण भक्ति: द्वारका द्वार और यशोदा दुग्ध योजना
कृष्ण प्रेम बजट की कई घोषणाओं में साफ झलकता है. 'द्वारका द्वार' योजना के तहत अगले तीन साल में 5 हजार करोड़ रुपए शहरी इंफ्रास्टक्चर पर खर्च होंगे. हालांकि द्वारका नगर योजना के नाम ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है. इसी तरह "यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना" के तहत कक्षा 8 तक के करीब 80 लाख बच्चों को टेट्रा पैक दूध दिया जाएगा. इस योजना पर पांच साल में 6 हजार 600 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जिसमें इस साल 700 करोड़ का प्रावधान है. सरकार इसे बच्चों के पोषण से जोड़ रही है, विपक्ष कह रहा है कि प्रतीकों से ज्यादा जरूरी स्कूल और अस्पतालों की असल हालत है.
गरीब कल्याण: सामाजिक सुरक्षा के लिए खुला खजाना
गरीब कल्याण के लिए 15 हजार करोड़ से ज्यादा का प्रावधान किया गया है. संबल 2.0 के लिए 600 करोड़, प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 4,500 करोड़, मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के लिए 1,200 करोड़, आयुष्मान भारत के लिए 2,500 करोड़ और सामाजिक पेंशन योजनाओं के लिए 3,800 करोड़ रखे गए हैं. स्वरोजगार योजनाओं का विस्तार भी किया गया है.
रोजगार का वादा: 50 हजार सरकारी भर्तियों का ऐलान
युवाओं के लिए 50 हजार सरकारी भर्तियों का ऐलान किया गया है. पुलिस में तीन साल में 22,500 पद, इस साल 7,500 पद, 15 हजार शिक्षक और जनजातीय क्षेत्रों में 4,485 शिक्षकों की भर्ती होगी. ग्रामीण रोजगार और आजीविका के लिए 28 हजार करोड़ का प्रावधान है. औद्योगिक और आईटी पार्कों के लिए 19,300 एकड़ जमीन आरक्षित की गई है.
अन्नदाता की चिंता: खेती और सिंचाई पर 1.15 लाख करोड़
किसानों पर 1.15 लाख करोड़ खर्च करने का दावा है. किसान सम्मान निधि जारी रहेगी. 25 हजार करोड़ के कृषि ऋण का लक्ष्य है. 7.5 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता बढ़ाने की योजना है. 3 हजार करोड़ की लागत से 1 लाख सोलर पंप दिए जाएंगे. डेयरी क्षेत्र के लिए 2,364 करोड़ और 3,000 गौशालाओं के आधुनिकीकरण की बात कही गई है. प्राकृतिक खेती के लिए 21.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पंजीकृत है.
नारी शक्ति: लाड़ली बहनों और लक्ष्मी के लिए बड़ा बजट
महिलाओं के लिए 1 लाख 27 हजार 555 करोड़ का प्रावधान है. लाड़ली बहना योजना के लिए 23,882 करोड़ और लाड़ली लक्ष्मी 2.0 के लिए 1,800 करोड़ रखे गए हैं. कई जिलों में सखी निवास बनाए जाएंगे.
इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़कों का जाल और सिंहस्थ की तैयारी
इंफ्रास्ट्रक्चर पर 1 लाख करोड़ से ज्यादा खर्च का अनुमान है. मुख्यमंत्री मजरा टोला सड़क योजना के लिए 21,630 करोड़, शहरी सड़कों के लिए 12,690 करोड़, जल जीवन मिशन के लिए 4,454 करोड़ और ऊर्जा क्षेत्र पर 34 हजार करोड़ खर्च होंगे. उज्जैन में 2028 सिंहस्थ के लिए कुल 13,851 करोड़ प्रस्तावित हैं, जिनमें से 3,060 करोड़ इस साल के लिए हैं. ग्राम पंचायतों के विकास के लिए जी राम जी योजना के तहत 10,428 करोड़ रखे गए हैं.
उद्योग और निवेश: 33 लाख करोड़ को जमीन पर उतारने की चुनौती
इंडस्ट्री के लिए 6 हजार करोड़ का प्रावधान है. नई औद्योगिक नीति, सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत करने और 33 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की बात कही गई है. श्रम विभाग को 1,335 करोड़ दिए गए हैं.
विपक्ष का प्रहार: बढ़ता कर्ज और राजकोषीय घाटा
लेकिन बजट के साथ ही विवाद भी खड़ा हो गया. विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने हंगामा किया. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश का राजकोषीय घाटा 74 हजार करोड़ से ज्यादा हो गया है. युवाओं को रोजगार की ठोस गारंटी नहीं है और कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई. उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र से अगले पांच साल में मिलने वाले करों की हिस्सेदारी में 50 हजार करोड़ की कमी का अनुमान है तो सरकार की रणनीति क्या है.
वैट पर चुप्पी: पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर डिप्टी सीएम का जवाब
एक और मुद्दा तब उठा जब बजट पेश करने के बाद मीडिया ने पेट्रोल और डीजल पर वैट घटाने को लेकर सवाल किया. डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा से पूछा गया कि वन नेशन वन टैक्स की बात होती है तो राज्य वैट क्यों नहीं घटा रहा. कुछ पल चुप रहने के बाद उन्होंने कहा कि यह जीएसटी काउंसिल का विषय है और जब वहां मुद्दा आएगा तब चर्चा होगी. जब उन्हें याद दिलाया गया कि वे खुद काउंसिल के सदस्य हैं तो भी उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया.
वादे बनाम हकीकत की जंग
सरकार इस बजट को विकास, कल्याण और सांस्कृतिक पहचान का मिश्रण बता रही है. विपक्ष इसे बढ़ते कर्ज, राजकोषीय दबाव और चुनावी गणित से जोड़ रहा है. अब असली सवाल यह है कि क्या कृष्ण के नाम पर रखी गई योजनाएं और बड़े वादे जमीन पर असर दिखाएंगे या बढ़ते घाटे के बीच आर्थिक संतुलन नई चुनौती बन जाएगा.
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