प्यार के लिए 1200km का सफर, फिर कानूनी लड़ाई; आखिरकार एक-दूसरे के हुए राधिका और सागर

उत्तराखंड की राधिका और मध्यप्रदेश के सागर की अनोखी प्रेम कहानी चर्चा में है, जिसमें प्यार के लिए 1200 किमी का सफर, परिवार का विरोध और कोर्ट की लड़ाई शामिल रही. आखिरकार कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों ने सामाजिक रीति-रिवाज से शादी कर ली.

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कहते हैं सच्चा प्यार हर दूरी, हर मुश्किल और हर रुकावट को पार कर लेता है. ऐसा ही एक दिल छू लेने वाला किस्सा सामने आया है, जहां उत्तराखंड की राधिका ने अपने प्यार सागर के लिए 1200 किलोमीटर लंबा सफर तय किया, सामाजिक बंधनों से लड़ी, पुलिस और कोर्ट की प्रक्रिया से गुजरी और आखिरकार अपने प्यार को पा ही लिया. इस प्रेम कहानी का अंत शादी के पवित्र बंधन में हुआ.

सोशल मीडिया पर शुरू हुई प्यार की कहानी

राधिका और सागर की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. दोनों की मुलाकात इंस्टाग्राम पर हुई थी. धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी, हाल-चाल पूछने से शुरू हुआ सिलसिला कब दिलों तक पहुंच गया, दोनों को खुद भी शायद पता नहीं चला. पांच महीने के अंदर ही यह दोस्ती गहरे प्यार में बदल गई.

प्यार के लिए 1200 किलोमीटर का सफर

जब रिश्ते को नाम देने की बारी आई तो राधिका ने सागर को हरिद्वार बुलाया. सागर बिना देरी किए लंबा सफर तय कर वहां पहुंच गया. दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामने का फैसला किया और फिर साथ में बैतूल लौट आए. 11 मई को आर्य समाज मंदिर में दोनों ने शादी भी कर ली. उस वक्त शायद उन्हें अंदाजा नहीं था कि असली परीक्षा अभी बाकी है.

परिवार का विरोध और पुलिस की एंट्री

राधिका के अचानक घर से गायब होने के बाद उसके परिवार में हड़कंप मच गया. परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और उसे नाबालिग बताया. उत्तराखंड पुलिस आखिरकार दोनों तक पहुंची और उन्हें वापस ले गई. यहां से उनकी प्रेम कहानी एक कानूनी लड़ाई में बदल गई.

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अदालत में लिया बड़ा फैसला

जब मामला कोर्ट तक पहुंचा तो सबसे अहम पल आया. राधिका ने साफ शब्दों में कह दिया कि वह अपने माता-पिता के साथ नहीं जाएगी. उसने अपनी पढ़ाई के दस्तावेज दिखाए, जिसमें उसकी उम्र 19 साल साबित हुई. जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि वह बालिग है, कानून ने उसके फैसले का सम्मान किया और उसे सागर के साथ रहने की अनुमति मिल गई.

परिवार की मौजूदगी में हुआ विवाह

करीब आठ दिन की प्रक्रिया के बाद दोनों वापस बैतूल लौटे. सागर का परिवार पहले से ही राधिका को स्वीकार कर चुका था. लेकिन सबसे भावुक पल तब आया, जब राधिका के पिता और चाचा खुद उत्तराखंड से बैतूल पहुंचे. उन्होंने अपनी बेटी का कन्यादान किया और उसे आशीर्वाद देकर विदा किया.  

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प्यार की जीत, रिश्तों की नई शुरुआत

आखिरकार, जो कहानी एक मोबाइल स्क्रीन से शुरू हुई थी, वह सात फेरों तक पहुंच गई. यह सिर्फ दो लोगों की शादी नहीं, बल्कि प्यार की जीत की कहानी है. इसने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे साफ हों और भरोसा मजबूत हो, तो दुनिया की कोई भी ताकत सच्चे प्यार को अलग नहीं कर सकती.

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