कान्हा नेशनल पार्क में बढ़ा बारहसिंघा का कुनबा, अब दूसरे टाइगर रिजर्व में बसाई जा रही दुर्लभ प्रजाति

Madhya Pradesh News: ट्रांसलोकेशन प्रोग्राम के तहत हाल ही में कान्हा नेशनल पार्क से 8 बारहसिंघा को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भेजा गया है. इससे पहले भी समय-समय पर बारहसिंघा को सतपुड़ा और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भेजा गया था, ताकि वहां भी इस दुर्लभ प्रजाति की आबादी विकसित हो सके.

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Kanha National Park: मध्य प्रदेश के जंगलों से अच्छी खबर सामने आई है. कभी विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके दुनिया के दुर्लभ प्रजाति के बारहसिंघा की संख्या अब तेजी से बढ़ रही है. खास बात यह है कि प्रदेश का राज्य पशु बारहसिंघा अब सिर्फ कान्हा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे अन्य टाइगर रिजर्व में भी बसाया जा रहा है.

बारहसिंघा की संख्या में इजाफा

मध्य प्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क में संरक्षण के प्रयासों से दुर्लभ प्रजाति के बारहसिंघा की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. एक समय ऐसा भी था जब दुनिया भर में इनकी संख्या घटकर महज 60 रह गई थी और ये सिर्फ कान्हा के जंगलों में ही पाए जाते थे. वन विभाग और वैज्ञानिकों की लगातार कोशिशों का ही नतीजा है कि आज इनकी संख्या बढ़कर करीब एक हजार तक पहुंच चुकी है. इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए अब बारहसिंघा को प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व में भी बसाया जा रहा है.

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में भेजा गया 8 बारहसिंघा 

ट्रांसलोकेशन प्रोग्राम के तहत हाल ही में कान्हा नेशनल पार्क से 8 बारहसिंघा को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भेजा गया है. इससे पहले भी समय-समय पर बारहसिंघा को सतपुड़ा और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भेजा जाता रहा है, ताकि वहां भी इस दुर्लभ प्रजाति की आबादी विकसित हो सके.अब तक सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 135 बारहसिंघा भेजे जा चुके हैं और वर्तमान में वहां इनकी संख्या बढ़कर करीब 250 हो गई है. वहीं बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी 148 बारहसिंघा बसाए जा चुके हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, जहां बारहसिंघा पाए जाते हैं, वहां का जंगल स्वस्थ और समृद्ध माना जाता है. ऐसे क्षेत्रों में अच्छा घास का मैदान, संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र और बाघ समेत कई अन्य वन्य जीवों की मौजूदगी भी देखने को मिलती है. यही वजह है कि बारहसिंघा की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि मध्य प्रदेश के जंगल इस दुर्लभ प्रजाति के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रहे हैं.

कभी विलुप्ति के मुहाने पर पहुंच चुके बारहसिंघा की यह वापसी न सिर्फ वन विभाग की बड़ी सफलता है, बल्कि यह मध्य प्रदेश के जंगलों की समृद्ध जैव विविधता का भी प्रमाण है.

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