Bike Stretcher Viral Video: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले से सामने आई यह तस्वीर किसी एक परिवार की पीड़ा भर नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम पर एक दर्दनाक सवाल है. एक पति, जो अपनी गंभीर रूप से बीमार पत्नी की जान बचाने के लिए हर दरवाजा खटखटा चुका है, अब मजबूरी में अपनी मोटरसाइकिल को ही स्ट्रेचर बनाकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचता है. यह कहानी दिखाती है कि जब व्यवस्था साथ नहीं देती, तब आम इंसान किस हद तक जाने को मजबूर हो जाता है.
कवर्धा से सतीश पात्रे की रिपोर्ट...
इलाज के लिए दर‑दर भटकता पति
कबीरधाम जिले के नगवाही गांव में रहने वाले समलू मरकाम अपनी पत्नी कपुरा मरकाम के इलाज के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं. उनकी पत्नी थायराइड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं. बीमारी इस कदर बढ़ चुकी है कि अब उनके लिए चलना‑फिरना तक मुश्किल हो गया है. हर दिन समलू के लिए उम्मीद और निराशा की नई लड़ाई लेकर आता है.
जब मोटरसाइकिल बनी स्ट्रेचर
आर्थिक हालात इतने खराब हो चुके हैं कि समलू के पास एंबुलेंस या किसी साधन का विकल्प नहीं बचा. मजबूरी में उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल पर लकड़ी की पटिया लगाकर उसे स्ट्रेचर जैसा बना लिया. उसी पर पत्नी को लिटाया और मदद की आस में सीधे कलेक्टर ऑफिस पहुंच गए. यह दृश्य देखने वालों की आंखें नम कर देता है.
इलाज में खर्च हो गई पूरी जमा पूंजी
समलू बताते हैं कि पत्नी के इलाज के लिए उन्होंने अपनी सारी जमा‑पूंजी खर्च कर दी. जमीन बेचनी पड़ी, घर गिरवी रखना पड़ा, लेकिन इसके बाद भी पत्नी को राहत नहीं मिल पाई. एम्स अस्पताल से लेकर दूसरे राज्यों के बड़े‑बड़े अस्पतालों तक इलाज कराया गया, लाखों रुपये खर्च हुए, फिर भी बीमारी पीछा नहीं छोड़ रही.
कर्ज के बोझ तले दबा परिवार
अब हालात ये हैं कि समलू कर्ज के भारी बोझ में दबे हुए हैं. न आमदनी का कोई साधन बचा है और न इलाज के लिए पैसा. थक‑हारकर वे शासन‑प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं, ताकि पत्नी की जान बचाई जा सके.
रिश्ते की ताकत और सिस्टम पर सवाल
यह तस्वीर एक ओर पति‑पत्नी के अटूट रिश्ते और समर्पण को दिखाती है, तो दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई भी सामने लाती है. एक आम आदमी की यह बेबसी बताती है कि ज़रूरत के वक्त सिस्टम तक पहुंचना आज भी कितना मुश्किल है.
पीड़ित पति की गुहार
समलू मरकाम ने गुहार लगाई कि मैंने सब कुछ बेच दिया, जो था वो इलाज में लगा दिया. अब बस सरकार से यही गुज़ारिश है कि मेरी पत्नी की जान बचाने में मदद करो. यह कहानी सिर्फ खबर नहीं, बल्कि इंसानियत और व्यवस्था के बीच खड़ी एक कड़वी सच्चाई है.














