जल संचय जनभागीदारी अभियान; डिंडोरी ने देश में मारी बाज़ी, जल संरक्षण रैंकिंग में खंडवा भी टॉप‑2 में

Jal Sanchay Jan Bhagidari Abhiyan Ranking: जल शक्ति मंत्रालय की रैंकिंग में मध्यप्रदेश का शानदार प्रदर्शन, डिंडोरी पहले और खंडवा दूसरे स्थान पर, 3.97 लाख जल संरचनाएं निर्मित. पढ़िए पूरी खबर.

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जल संचय जनभागीदारी अभियान में मध्यप्रदेश की बड़ी उपलब्धि

Jal Sanchay Jan Bhagidari Abhiyan: मध्यप्रदेश ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर देशभर में अपनी मजबूत पहचान बनाई है. केंद्र सरकार के “जल संचय, जनभागीदारी अभियान” की ताज़ा रैंकिंग में राज्य के दो जिले डिंडोरी और खंडवा शीर्ष पर रहे हैं. यह सफलता ऐसे समय में मिली है, जब देशभर में जल संकट एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है. मोहन सरकार के नेतृत्व में चल रहे “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत प्रदेश में वर्षा जल को सहेजने और पुराने जल स्रोतों को फिर से जीवित करने के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है, जिसमें आम लोगों की भागीदारी भी अहम भूमिका निभा रही है.

केंद्र की रैंकिंग में मध्यप्रदेश का दमदार प्रदर्शन

जल शक्ति मंत्रालय द्वारा 22 अप्रैल को जारी की गई रैंकिंग में मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले ने देश में पहला और खंडवा जिले ने दूसरा स्थान हासिल किया है. यह रैंकिंग जल संचय, जनभागीदारी अभियान के अंतर्गत किए गए कार्यों के आधार पर तैयार की गई है. इन जिलों ने दिखा दिया कि अगर प्रशासन और जनता मिलकर काम करें, तो जल संरक्षण जैसे बड़े मुद्दे पर भी ठोस परिणाम हासिल किए जा सकते हैं.

Water Conservation: जल संचय जनभागीदारी अभियान में मध्य प्रदेश

प्रधानमंत्री के आह्वान से प्रेरित अभियान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “जहां गिरे, जब गिरे, वर्षा जल का संग्रह करें” संदेश को ज़मीन पर उतारने के लिए मध्यप्रदेश सरकार मिशन मोड में काम कर रही है. इसी कड़ी में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक “जल गंगा संवर्धन अभियान” संचालित किया जा रहा है. इस अभियान का मकसद बारिश के हर कतरे को सहेजना, भूजल स्तर बढ़ाना और परंपरागत जल स्रोतों को दोबारा उपयोगी बनाना है.

गांव से शहर तक, हर जगह जल संरचनाओं पर जोर

अभियान के तहत प्रदेश के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में बड़े पैमाने पर जल संरक्षण से जुड़े काम चल रहे हैं. खेत तालाबों का निर्माण, कूप रिचार्ज पिट, अमृत सरोवर, बोरवेल रिचार्ज सिस्टम, रिचार्ज शाफ्ट और घरों की छतों पर वर्षा जल संचयन जैसी संरचनाएं तैयार की जा रही हैं. इसके साथ‑साथ पुराने जलाशयों, तालाबों और गड्ढों का पुनरुद्धार भी किया जा रहा है, ताकि वे फिर से पानी संजो सकें.

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Water Conservation: जल संचय जनभागीदारी अभियान के तहत बना बांध

डिंडोरी ने बनाया देश में रिकॉर्ड

राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी और अभियान के आयुक्त अवि प्रसाद के अनुसार, केंद्र सरकार एक ऑनलाइन डैशबोर्ड के जरिए प्रदेश में हो रहे कामों की निगरानी कर रही है. इसी निगरानी के आधार पर तैयार रैंकिंग में डिंडोरी जिले ने देशभर में सबसे अधिक, यानी 1 लाख 23 हजार से ज्यादा जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कर पहला स्थान हासिल किया है. वहीं खंडवा जिले में 87 हजार से अधिक संरचनाएं बनाकर दूसरा स्थान पाया गया है.

पूरे प्रदेश में लगभग 4 लाख संरचनाएं तैयार

सिर्फ डिंडोरी और खंडवा ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में जल संरक्षण के कामों ने रफ्तार पकड़ी है. अब तक प्रदेश में 3 लाख 97 हजार से अधिक जल संरचनाएं बनाई जा चुकी हैं. यह आंकड़ा बताता है कि जल संरक्षण को लेकर सरकार के साथ‑साथ लोगों में भी जागरूकता बढ़ रही है.

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जनभागीदारी बनी अभियान की ताकत

“जल संचय, जनभागीदारी अभियान” का सबसे बड़ा आधार आम लोगों की भागीदारी है. इस पहल के तहत स्थानीय संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी समूहों और नागरिकों को जल संरक्षण कार्यों से जोड़ा जा रहा है. कम लागत की वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से ऐसे काम किए जा रहे हैं, जिन्हें लोग खुद भी अपना सकते हैं.

Water Conservation: जल संचय जनभागीदारी अभियान के तहत हुआ काम

भूजल रिचार्ज और भविष्य की तैयारी

बोरवेल रिचार्ज सिस्टम, रिचार्ज शाफ्ट और रूफटॉप हार्वेस्टिंग जैसी तकनीकों से न सिर्फ बारिश का पानी बचाया जा रहा है, बल्कि जल भंडार को भी मजबूत किया जा रहा है. सरकार का मानना है कि अगर यह प्रयास निरंतर चलता रहा, तो आने वाले वर्षों में पानी की कमी से काफी हद तक राहत मिल सकती है.

जल संकट से निपटने की दीर्घकालिक पहल

विशेषज्ञों के मुताबिक जल संचय और जनभागीदारी को साथ लेकर चलना ही जल संकट से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है. मध्यप्रदेश में चल रहा यह अभियान उसी दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है. इस पहल ने न केवल प्रशासनिक सफलता दिलाई है, बल्कि यह भरोसा भी जगाया है कि सामूहिक प्रयासों से जल सुरक्षा को स्थायी रूप से मजबूत किया जा सकता है.

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