Jabalpur Bargi Dam Cruise Accident: मध्य प्रदेश के जबलपुर में 30 अप्रैल की शाम तेज आंधी और बारिश ने इतना कहर बरपाया कि बरगी डैम कई लोगों की कब्र बन गया. क्रूज डूबने के बाद अब जो तस्वीरें और कहानी सामने आ रही हैं, उन्होंने झकझोर कर रख दिया है. वहीं, जब डैम से मां और बेटे का शव निकला तो उसने सभी को रुला दिया था. महिला ने अपने 4 साल के मासूम बेटे को बचाने के लिए आखिरी सांस तक सीने से लगाए रखा था और इसी अवस्था में उनका शव मिला. इसी हादसे में महिला की मां की भी मौत हो गई थी. वहीं, महिला का पति, बेटी सिया और पिता बच गए थे. सिया जब अपने पिता के साथ बचकर बाहर निकल आई तो किनारे खड़े रहकर हादसे वाली जगह की ओर देखकर रोती रही, वह दूसरे दिन भी उम्मीद जगाए बैठी थी, शायद कोई चमत्कार हो जाए और उसकी मां-भाई जिंदा निकल आएं, लेकिन जब शुक्रवार को शव निकले तो वह खुद को संभाल नहीं सकी. अब सिया ने उस हादसे की खौफनाक कहानी बयां की है और शायद यह हादसा वह काली परछाई है, शायद जो उसका जिंदगी भर पीछा करती रहेगी.
सबसे मार्मिक तस्वीर, मां-बेटे को मौत भी अलग नहीं कर सकी
मरीना मैसी ने अपने छोटे बेटे त्रिशान को अपनी ही लाइफ जैकेट में लपेट रखा था और उसे अपनी छाती से कसकर चिपकाए रखा. जब क्रूज तेज लहरों के बीच पानी में समा रहा था, तब भी मरीना ने बेटे को नहीं छोड़ा. अपने आखिरी पलों में भी उन्होंने खुद को नहीं, अपने बच्चे को बचाने की कोशिश की. मौत भी मां और बेटे को अलग नहीं कर सकी.
यही तस्वीर, एक मां की अपने बच्चे को आखिरी सांस तक सीने से लगाए रखने की तस्वीर, अब बरगी डैम क्रूज़ हादसे की सबसे दर्दनाक पहचान बन गई है.
गर्मियों की छुट्टियां अचानक मातम में बदलीं
30 अप्रैल की शाम नर्मदा नदी पर दर्जनों परिवारों की गर्मियों की छुट्टी अचानक मातम में बदल गई. खमरिया टापू के पास तेज हवाओं, उठती लहरों और मूसलाधार बारिश के बीच ओवरलोडेड क्रूज पलट गया. इस हादसे ने सिर्फ जानें नहीं लीं, इसने परिवारों का भविष्य छीन लिया.
अब तक नौ शव बरामद किए जा चुके हैं. अट्ठाईस लोगों को बचाया गया है, लेकिन इस पूरी त्रासदी के बीच मरीना और त्रिशान की कहानी ने पूरे देश को झकझोर दिया है.
पानी बन गया कब्र
दिल्ली का मैसी परिवार जबलपुर खुशियों के लिए आया था. रिश्तेदारों के साथ गृह प्रवेश का समारोह था, गर्मियों की छुट्टियां थीं, घूमने-फिरने का कार्यक्रम था और परिवार के साथ कुछ यादगार पल बिताने की उम्मीद थी, लेकिन बरगी का पानी उनके लिए कब्र बन गया.
जब क्रूज के भीतर अफरा-तफरी मची, यात्री चीखने लगे, खिड़कियां टूटने लगीं और निचले हिस्से में पानी भरने लगा, तब मरीना की एक ही कोशिश थी, अपने बच्चे को बचाना. उनकी बेटी सिया बच गई. पति प्रदीप मैसी भी बच गए, लेकिन यह बच जाना उनके हिस्से का सबसे बड़ा दुख बनकर आया.
'बोट किनारे लगा दो', लेकिन नहीं मानी बात
जबलपुर के अस्पताल के बाहर खड़ी सिया का दर्द आंसुओं से भी बड़ा था. उसके शब्द, उसकी टूटी हुई आवाज और उसके भीतर जमा सदमा अब इस हादसे की सबसे भावुक गवाही बन गए हैं. सिया ने कहा, “हम बिल्कुल ठीक बैठे हुए थे, तभी अचानक हवा तेज़ होने लगी. लोग क्रू मेंबर्स से कहने लगे कि क्रूज बोट को किनारे लगा दीजिए, मौसम खराब हो रहा है, लेकिन उन्होंने किसी की बात नहीं सुनी.”
सिया के मुताबिक़ ख़तरा साफ दिख रहा था. यात्री घबरा रहे थे. लोग चेतावनी दे रहे थे, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई. सिया ने कहा, “इसके बजाय वे नाव को पानी के बिल्कुल बीच में ले गए.”
सिया, दूसरी तरफ उसकी मां-भाई का शव निकालते गोताखोर
मरीना और छोटे त्रिशान के लिए क्रूज़ का निचला हिस्सा मौत का जाल बन गया. सिया ने बताया, “बोट की खिड़कियां टूट गई थीं. मेरी मां और मेरा भाई नीचे की तरफ थे, इसलिए वे फंस गए। मैं किसी तरह बाहर निकल पाई, लेकिन जब तक वे बाहर निकलने की कोशिश करते, बोट पूरी तरह पलट चुकी थी.” सिर्फ सिया और उसके पिता बाहर निकल सके. उसकी मां और भाई कभी बाहर नहीं आ पाए.
समय पर नहीं दी लाइप जैकेट
सिया ने हादसे की एक और बेहद गंभीर बात बताई. उसके मुताबिक लाइफ जैकेट समय पर नहीं बांटी गई थीं. उसने कहा, “मेरे पिता और एक और सज्जन ने केबिन के अंदर बने कैबिनेट जैसे हिस्से को तोड़कर लाइफ जैकेट निकालीं और फिर हमें बांटीं.” पूरी रात सिया इस उम्मीद से चिपकी रही कि शायद उसकी मां और भाई कहीं बच गए होंगे, लेकिन सुबह ने उम्मीद नहीं, तबाही दी. दोनों के शव एक साथ मिले, अब भी एक-दूसरे से लिपटे हुए.
मरीना ने अपने बेटे को सीने से इस तरह चिपका रखा था कि रेस्क्यू टीम ने उन्हें ठीक उसी स्थिति में पाया, जैसे वे मौत से लड़ते हुए मां और बेटे के रूप में एक-दूसरे में समा गए हों.
सिया के लिए इस हादसे ने सिर्फ मां और भाई को नहीं छीना, उसने उसकी नानी को भी उससे छीन लिया. सिया ने बताया, “हम यहां छुट्टी मनाने आए थे... मेरे मामा के गृह प्रवेश के लिए... मेरे नाना-नानी बहुत दिनों बाद आए थे... अगले दिन हमने घूमने जाने का फैसला किया था, ख़ासकर इसलिए क्योंकि मेरे नाना-नानी इतने समय बाद आए थे.” जो परिवार साथ घूमने निकला था, वह शोकसभा में बदल गया.
ये भी पढ़ें- 'हम डूबने वाले हैं, हमारे लिए प्रेयर करो', बहन को किया आखिरी कॉल, फिर जबलपुर क्रूज हादसे ने सब छीन लिया
पिता का हाथ कसकर पकड़ा
सिया ने कहा, “जैसे ही मैं मलबे से बाहर निकली, मैंने अपने पिता को देखा. मैंने उनका हाथ पकड़ा और कसकर पकड़ लिया. फिर हम दोनों बाहर निकले... लेकिन मुझे मेरी मां और मेरा भाई कहीं दिखाई नहीं दिए.” यह हादसा शायद सिया का जीवन भर पीछा करेगा.
आज जब ओवरलोडिंग, मौसम की चेतावनियों की अनदेखी, सुरक्षा इंतजामों में देरी और लाइफ जैकेट से जुड़े सवालों की जांच तेज़ हो रही है, बरगी डैम हादसा सिर्फ़ एक दुर्घटना नहीं रह गया है. यह व्यवस्था की चूक की कहानी है. यह उन चेतावनियों की कहानी है जिन्हें शायद सुना नहीं गया। लेकिन सबसे ऊपर, यह मरीना मैसी की कहानी है, उस मां की कहानी जिसने मौत के सामने भी अपने लिए नहीं, अपने बच्चे के लिए आख़िरी सांस तक लड़ाई लड़ी.














