Israel US Iran War Impact: पश्चिम एशिया के तनाव में घुटी भोपाल की 'खुशबू', रमज़ान में करोड़ों का इत्र व्यापार संकट में

Bhopal Attar Trade: भोपाल के लिए यह सिर्फ व्यापारिक मंदी नहीं है, उस पूरी श्रृंखला पर चोट है जो इस कारोबार को जिंदा रखती है. इत्र की दुकानों के पीछे एक बड़ा संसार है, जिसमें कारीगर, ब्लेंडर, बोतल भरने वाले, पैकिंग करने वाले, छोटे यूनिट मालिक और वे परिवार शामिल हैं जिनकी साल भर की कमाई काफी हद तक रमज़ान और ईद के इस सीजन पर निर्भर करती है.

विज्ञापन
Read Time: 7 mins
US-Israel and Iran War Hit Bhopal Attar Trade in Ramadan

Bhopal Attar Trade: भोपाल का इत्र कारोबार, जो सिर्फ एक व्यापार नहीं बल्कि नवाबी विरासत की जीवित पहचान माना जाता है, इस बार अपने सबसे कठिन दौर में खड़ा है. जिस शहर की गलियों में पीढ़ियों से खुशबू सिर्फ महकती नहीं, बल्कि एक तहज़ीब की तरह जी जाती रही है, उसी शहर का यह सदियों पुराना कारोबार अब गहरे संकट में फंस गया है. व्यापारियों के मुताबिक रमज़ान का मौसम आमतौर पर भोपाल में 20 से 25 करोड़ रुपये तक के इत्र कारोबार का होता है, लेकिन इस बार पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने इस पूरे चक्र को झकझोर दिया है, जो मौसम दुकानों में रौनक, ऑर्डरों की भरमार और तेज बिक्री लेकर आता था, वही अब रद्द होते ऑर्डर, अटकी खेपों और बढ़ती बेचैनी का मौसम बन गया है.

दरअसल, जुमेराती, इब्राहिमपुरा और जहांगीराबाद जैसे पुराने बाजारों में फैला यह कारोबार भोपाल की नवाबी विरासत से जुड़ा हुआ है. यहां इत्र सिर्फ बिकता नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा माना जाता है. पुराने कारोबारी बताते हैं कि कभी भोपाल के दरबारों और रईस घरानों में इत्र शौक नहीं, शान हुआ करता था. यही परंपरा आज भी पुराने बाजारों में जिंदा है, लेकिन इस बार रमज़ान के सबसे अहम कारोबारी सीजन में इस विरासत पर बाहरी संकट का ऐसा असर पड़ा है कि पूरा बाजार ठिठक गया है. 

खुशबू और बाजार तैयार, लेकिन रास्ते बंद  

व्यापारियों का कहना है कि इस बार उन्हें रमज़ान में 10 करोड़ रुपये से ज्यादा मासिक कारोबार की उम्मीद थी, लेकिन हालात ऐसे बन गए कि खाड़ी देशों से जुड़े कई ऑर्डर या तो रद्द हो गए या अधर में लटक गए. विदेश भेजे जाने वाले पार्सल अटक गए हैं, कूरियर चैनलों में अनिश्चितता है, विदेशी खरीदारों की तरफ से जवाब नहीं आ रहे और गोदामों में माल भरा पड़ा है. यानी, खुशबू और बाजार तैयार है, लेकिन रास्ते बंद हो गए हैं. 

ऑर्डर 40 से 50 प्रतिशत तक घटे

भोपाल के लिए यह सिर्फ व्यापारिक मंदी नहीं है, उस पूरी श्रृंखला पर चोट है जो इस कारोबार को जिंदा रखती है. इत्र की दुकानों के पीछे एक बड़ा संसार है, जिसमें कारीगर, ब्लेंडर, बोतल भरने वाले, पैकिंग करने वाले, छोटे यूनिट मालिक और वे परिवार शामिल हैं जिनकी साल भर की कमाई काफी हद तक रमज़ान और ईद के इस सीजन पर निर्भर करती है. 50 रुपये की छोटी शीशी से लेकर 20 हजार रुपये प्रति तोला तक के प्रीमियम ऊद और प्राकृतिक तेलों तक फैला यह कारोबार हर स्तर के ग्राहकों को छूता है. लेकिन, अब व्यापारियों का कहना है कि ऑर्डर 40 से 50 प्रतिशत तक घट चुके हैं और यह गिरावट सिर्फ मुनाफे नहीं, रोज़गार पर भी सीधा वार है. 

गल्फ के 100 से ज्यादा ऑर्डर कैंसिल

इत्र कारोबारी सैयद मोहम्मद अल्तमश जलाल इस संकट की गंभीरता को सीधे आंकड़ों में बयान करते हैं. उनका कहना है कि "गल्फ के क्लाइंट्स के 100 से ज्यादा ऑर्डर कैंसिल हो चुके हैं. कूरियर पार्टनर खुद असमंजस में हैं. कई पार्सलों की स्थिति साफ नहीं है. कई क्लाइंट्स से वे खुद भी लगातार पूछताछ नहीं कर पा रहे और उधर से भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा. बाहर जाने वाला प्योर नैचुरल ऊद ऑयल बेहद महंगा होता है और एक ऑर्डर की कीमत करीब 30 हजार रुपये तक होती है. ऐसे में 100 से ज्यादा ऑर्डर रद्द होने या अटकने का मतलब 50 लाख से लेकर 1 से 2 करोड़ रुपये तक का सीधा नुकसान है. 100 से ज्यादा पार्सल रुक गए हैं, कुछ कूरियर से निकल चुके हैं, लेकिन उनका कोई अपडेट नहीं है. पूरा सिस्टम भ्रम की स्थिति में है क्योंकि इस वक्त खरीदारों का ध्यान इत्र जैसी चीजों से ज्यादा जरूरी जरूरतों पर चला गया है."

इतना सुस्त रमज़ान और टूटी हुई ईद का बाजार कभी नहीं देखा 

पुरानी प्रतिष्ठित दुकानों में भी बेचैनी साफ दिखाई दे रही है. करीब 100 साल पुराने वीनस परफ्यूम्स जैसे कारोबारी प्रतिष्ठान, जिनकी जड़ें कन्नौज से जुड़ी हैं और जिनकी पीढ़ियां भोपाल में इस व्यापार को आगे बढ़ाती रही हैं, इस सीजन को अपने सबसे कमजोर दौरों में से एक बता रहे हैं. उनका कहना है कि उन्होंने इतना सुस्त रमज़ान और इतनी टूटी हुई ईद का बाजार कभी नहीं देखा. माल तैयार है, शेल्फ भरे हैं, लेकिन ऑर्डर टूट रहे हैं और प्रीमियम खेपें रास्ते में अटकी हुई हैं.

माल की आवक और जावक दोनों प्रभावित

वीनस परफ्यूम्स के मालिक रफीक अहमद राजा का कहना है कि संकट ने माल की आवक और जावक दोनों को प्रभावित किया है. जो सामान समय पर आना चाहिए था, उसकी गति धीमी हो गई है और जो माल भारत से बाहर जाना था, वह कूरियर के जरिए सुचारु रूप से नहीं जा पा रहा. आमतौर पर रमज़ान का सीजन भोपाल के इत्र कारोबार को तेज़ी देने वाला सबसे बड़ा अवसर होता है, लेकिन इस बार वही सीजन कारोबार की सांसें रोकता दिखाई दे रहा है. नुकसान केवल बिक्री के आंकड़ों में नहीं है, बल्कि उस भरोसे में भी है जिस पर यह व्यापार टिका हुआ है.

कारोबार में गिरावट आई है

रफीक अहमद राजा ने कहा कि "जो इत्र बाहर से आता था, वह रमज़ान के दौरान रुक गया है. टोपी और दूसरे सामान जो बांग्लादेश से आते थे, उनमें भी रुकावट है और इससे काफी परेशानी हो रही है. वे कहते हैं कि कारोबार का दायरा बहुत बड़ा है, लेकिन समस्या यह है कि जो माल इंडिया में आ रहा है, वह कूरियर के जरिए बाहर नहीं जा पा रहा. रमज़ान के सीजन में भोपाल के भीतर ही 20 से 25 करोड़ रुपये का इत्र बिक जाता है. कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ, लेकिन इसमें साफ गिरावट आई है और बाजार पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है."

Advertisement

छोटी इकाइयां बंद होने का खतरा  

सबसे बड़ा खतरा छोटे और मध्यम कारोबारियों पर मंडरा रहा है. जहांगीराबाद और बैरागढ़ जैसे इलाकों में कई छोटे यूनिट और कार्यशालाएं रमज़ान से पहले स्टॉक तैयार करती हैं और इसी सीजन से साल भर की आर्थिक मजबूती जुटाती हैं. अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो कारोबारियों को डर है कि कई छोटी इकाइयां बंद हो सकती हैं. इसका सीधा असर उन कारीगरों और मजदूरों पर पड़ेगा, जिनके हाथों से भोपाल की खुशबू आकार लेती है. उनके लिए यह सिर्फ बिक्री में गिरावट नहीं, बल्कि साल के सबसे अहम सहारे के टूटने जैसा है.

दुकानों के भीतर व्यापारी नुकसान गिन रहे

स्थिति को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह एक ऐसा दुर्लभ क्षण है, जब हजारों किलोमीटर दूर चल रहा भू-राजनीतिक तनाव भोपाल की स्थानीय विरासत को सीधे झकझोर रहा है. नवाबी दौर की पहचान रहा इत्र अब आधुनिक सप्लाई चेन संकट का शिकार बन गया है. पुराने भोपाल की हवा में आज भी खुशबू तैर रही है, लेकिन दुकानों के भीतर व्यापारी नुकसान गिन रहे हैं, अटके पार्सलों की खबर ले रहे हैं और यह सोच रहे हैं कि यह अनिश्चितता आखिर कब खत्म होगी.

युद्ध, टूटती लॉजिस्टिक्स और सिमटती मांग का संकट

इस रमज़ान में भोपाल का इत्र कारोबार सिर्फ कमजोर बाजार से नहीं जूझ रहा, बल्कि अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. यह वह विरासत है जिसने बदलते दौर, नई प्रतिस्पर्धा और बाजार की कई मार झेली है, लेकिन इस बार संकट अलग है. यह संकट युद्ध, टूटती लॉजिस्टिक्स और सिमटती मांग का है. अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो यह सिर्फ एक खराब सीजन की कहानी नहीं होगी, बल्कि शायद उस मोड़ की दास्तान बन जाएगी जब भोपाल की सदियों पुरानी खुशबू का कारोबार पहली बार सचमुच घुटनों पर आ गया.

Advertisement

Basmati Rice Trade: अमेरिका-ईरान टकराव से रायसेन के कारोबार पर संकट, बंदरगाहों पर फंसा 4 लाख टन बासमती चावल

Featured Video Of The Day
Iran Israel War: मिडल ईस्ट जंग के बीच Russia से दोबारा तेल खरीदेगा India | PM Modi | Trump | Putin