Indore-Pithampur Economic Corridor Project: इंदौर‑पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना को लेकर 3 मई को एक अहम पड़ाव आने वाला है. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इंदौर के ग्राम नैनोद में इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के पहले चरण का भूमि‑पूजन करेंगे. इससे पहले मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में एक बड़ा और भरोसा बढ़ाने वाला फैसला लिया है. जमीन देने वाले भू‑स्वामियों को मिलने वाली विकसित जमीन का हिस्सा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है. इस फैसले का सीधा असर यह हुआ है कि किसान अब बिना किसी दबाव के, स्वेच्छा से इस परियोजना से जुड़ रहे हैं. विकास और किसानों के बीच संतुलन बनता साफ नजर आने लगा है.
पहले चरण का शुभारंभ, 326 करोड़ की होगी शुरुआत
इंदौर‑पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण का भूमि‑पूजन 3 मई को सेक्टर‑ए, ग्राम नैनोद में किया जाएगा. इस चरण में करीब 326.51 करोड़ रुपये की लागत से शुरुआती अधोसंरचना विकास कार्य शुरू होंगे. सड़क, ड्रेनेज, बिजली, पानी और प्लॉट डेवलपमेंट जैसे काम इस चरण में किए जाएंगे.
क्या है इंदौर‑पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर?
यह परियोजना क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. इसके तहत 75 मीटर चौड़ी और लगभग 20 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी. इस सड़क के दोनों ओर 300‑300 मीटर के क्षेत्र में सुनियोजित विकास होगा. कुल 1300 हेक्टेयर से अधिक भूमि इस प्रोजेक्ट में शामिल है और इसकी अनुमानित लागत 2360 करोड़ रुपये है.
Indore-Pithampur Economic Corridor Project: इंदौर पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर
जमीन पर सहमति बनी सबसे बड़ी चुनौती
परियोजना की सबसे बड़ी मुश्किल जमीन को लेकर थी. शहर के नजदीक होने के कारण यहां जमीन की कीमत काफी ज्यादा है. ऐसे में किसानों की सहमति के बिना काम आगे बढ़ना आसान नहीं था. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस चुनौती को समझते हुए 60 प्रतिशत विकसित जमीन देने का फैसला लिया, जिससे किसानों को भी भविष्य में ज्यादा फायदा मिल सके.
किसानों को मिलेगा सीधा और लंबी अवधि का लाभ
किसानों को उनकी जमीन के बदले ऐसी विकसित जमीन दी जा रही है, जहां सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं मौजूद होंगी. 60 प्रतिशत हिस्सा मिलने से किसान इस जमीन का इस्तेमाल घर, दुकान, गोदाम या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कर सकेंगे. इससे उनकी आमदनी के स्थायी स्रोत बनेंगे.
रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
कॉरिडोर बनने से क्षेत्र में उद्योगों के लिए बेहतर माहौल तैयार होगा. निवेश बढ़ेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. जिला प्रशासन और एमपीआईडीसी लगातार किसानों से संवाद कर रहे हैं, जिसके सकारात्मक नतीजे अब दिखने लगे हैं और परियोजना को धरातल पर उतरने की राह मिलती नजर आ रही है.
यह भी पढ़ें : महाराष्ट्र दिवस पर ‘मिसिंग लिंक' का उद्घाटन, मुंबई–पुणे एक्सप्रेस‑वे को मिली नई रफ्तार, बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
यह भी पढ़ें : नाशिक जल संकट: 180 गांव टैंकरों के भरोसे, जल जीवन मिशन फेल? पेठ तालुका के आदिवासी बूंद‑बूंद को मोहताज
यह भी पढ़ें : पालघर में दिल दहला देने वाला सड़क हादसा, दोस्त की मौत के बाद युवक ने की आत्महत्या; देखिए घटना का CCTV वीडियो
यह भी पढ़ें : IPL 2026: किंग कोहली के फैन्स का इंतजार खत्म; रायपुर में RCB के दो मैच, टिकट ऐसे मिलेगी














