MP: दंदरौआ धाम ट्रस्ट की 56 हेक्टेयर भूमि का मामला: कलेक्टर केएल मीणा की अवमानना पर हाईकोर्ट सख्त, डबल बेंच ने दिए अहम निर्देश

MP High Court strict: हाईकोर्ट ने कहा कि अवमानना की यह कार्यवाही सीधे तौर पर भिंड कलेक्टर केएल मीणा के विरुद्ध प्रस्तावित है, इसलिए वो नामित अवमाननाकर्ता हैं. ऐसी स्थिति में बिना उन्हें पक्षकार बनाए अपील पर सुनवाई नहीं की जा सकती.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins

Dandaura Dham Trust 56-hectare land Case: मध्य प्रदेश के भिंड के दंदरौआ धाम ट्रस्ट की 56 हेक्टेयर भूमि से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद में ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने भिंड कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा के विरुद्ध प्रस्तावित अवमानना कार्यवाही को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. राज्य शासन द्वारा दायर रिट अपील पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जिस अधिकारी पर अदालत के समक्ष शपथपत्र में कथित रूप से झूठा तथ्य प्रस्तुत करने का आरोप है, उसे अपील में अनिवार्य रूप से पक्षकार बनाया जाना चाहिए.

हाईकोर्ट ने कहा कि अवमानना की यह कार्यवाही सीधे तौर पर भिंड कलेक्टर केएल मीणा के विरुद्ध प्रस्तावित है, इसलिए वो नामित अवमाननाकर्ता हैं. ऐसी स्थिति में बिना उन्हें पक्षकार बनाए अपील पर सुनवाई नहीं की जा सकती. न्यायालय ने इस तथ्य को भी गंभीरता से लिया कि राज्य शासन की ओर से दायर अपील और स्थगन आवेदन के समर्थन में संबंधित अधिकारी का शपथपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया.

राज्य शासन से मांगा स्पष्टीकरण

डबल बेंच ने राज्य शासन के अधिवक्ता से यह स्पष्ट करने को कहा कि आखिर किस आधार पर यह समझा गया कि अपील और स्थगन आवेदन के समर्थन में भिंड कलेक्टर का शपथपत्र प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं है. कोर्ट ने इन बिंदुओं पर पक्षकारों को विस्तार से बहस करने का अवसर देते हुए मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी को तय की है.

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

दंदरौआ धाम ट्रस्ट को तहसीलदार द्वारा 56 हेक्टेयर भूमि का पट्टा प्रदान किया गया था. पट्टे की जानकारी मिलने के बाद भिंड कलेक्टर ने इस पट्टे को निरस्त कर दिया. इसके बाद ट्रस्ट ने संभागायुक्त के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया, जिसे संभागायुक्त द्वारा खारिज कर दिया गया.

संभागायुक्त द्वारा आवेदन निरस्त किए जाने के बाद दंदरौआ धाम ट्रस्ट ने राजस्व मंडल में अपील दायर की. राजस्व मंडल ने मामले की सुनवाई के बाद ट्रस्ट के पक्ष में निर्णय सुनाया. राजस्व मंडल के इस फैसले को राज्य शासन ने ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ में चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने शासन की याचिका को खारिज कर दिया.

पुनः सुनवाई के दौरान उठा विवाद

हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद राज्य शासन ने मामले को पुनः सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया. इसी दौरान यह आरोप सामने आया कि भिंड कलेक्टर की ओर से न्यायालय के समक्ष गलत तथ्यों को शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत किया गया. आरोप है कि इन्हीं कथित गलत बयानों के आधार पर न्यायालय को भ्रमित किया गया.

Advertisement

इन तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट की एकल पीठ ने भिंड कलेक्टर केएल मीणा के खिलाफ अदालत के समक्ष कथित रूप से झूठा बयान देने के आरोप में अवमानना कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए थे. इसके तहत कलेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, साथ ही अलग से अवमानना प्रकरण पंजीबद्ध करने के आदेश भी दिए गए थे.

डबल बेंच की सख्त टिप्पणी

डबल बेंच ने कहा कि जब अवमानना की कार्यवाही किसी अधिकारी के विरुद्ध प्रस्तावित हो, तो उसे अपील में शामिल करना और उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर देना न्याय की मूल भावना है. कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि शपथपत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों के बिना अपील दायर करना गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है. अब इस प्रकरण में 13 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई में यह तय होगा कि अवमानना कार्यवाही आगे जारी रहेगी या नहीं और राज्य शासन अपनी अपील को किन आधारों पर आगे बढ़ाता है.

Advertisement

ये भी पढ़ें: Madhya Pradesh: कन्या छात्रावास के भोजन में कीड़ा, 5–6 छात्राएं बीमार, मामले को दबाने का आरोप; छात्राएं पहुंची कलेक्ट्रेट

Featured Video Of The Day
Iran के प्रदर्शनकारियों को Trump के संदेश पर भड़के Putin, दिया बड़ा बयान! | Khamenei | Iran Protest
Topics mentioned in this article