NSG की हाई‑इंटेंसिटी मॉकड्रिल, भोपाल में ब्लैक कमांडो के एक्शन से मचा हड़कंप, आतंकी हमले की जवाबी तैयारी

NSG Mock Drill Bhopal: भोपाल में NSG ने हाई‑इंटेंसिटी मॉकड्रिल कर आतंकी हमले को विफल करने का अभ्यास किया. स्थानीय पुलिस, ATS, GRP और RPF भी कार्रवाई में शामिल रहीं. पढ़िए पूरी खबर.

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भोपाल में रानी कमलापति स्टेशन के पास NSG कमांडो की हाई‑इंटेंसिटी मॉकड्रिल, आतंकियों से निपटने का अभ्यास

NSG Mock Drill Bhopal: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आतंकी खतरे से निपटने की तैयारियों को परखने और मजबूत करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) ने एक हाई‑इंटेंसिटी मॉकड्रिल का आयोजन किया. यह मॉकड्रिल रानी कमलापति स्टेशन परिसर स्थित बास बंसल वन कॉमर्शियल बिल्डिंग में की गई, जहां आतंकियों द्वारा इमारत में घुसपैठ की परिकल्पना के तहत वास्तविक परिस्थितियों जैसा अभ्यास किया गया. इस दौरान NSG के साथ स्थानीय पुलिस, एटीएस, जीआरपी और आरपीएफ के जवान भी तैनात रहे. अचानक ब्लैक कमांडो के एक्शन से इलाके में कुछ देर के लिए अफरा‑तफरी मच गई, लेकिन मॉकड्रिल की जानकारी मिलते ही लोगों ने राहत की सांस ली.

रानी कमलापति स्टेशन के पास हुई हाई‑इंटेंसिटी ड्रिल

NSG कमांडो ने भोपाल की एक प्रमुख कॉमर्शियल बिल्डिंग को चयनित कर यहां हाई‑इंटेंसिटी मॉकड्रिल को अंजाम दिया. परिदृश्य यह रखा गया कि आतंकियों ने इमारत में घुसकर बंधकों को कब्जे में ले लिया है. सूचना मिलते ही NSG और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने तय समय में मौके पर पहुंचकर ऑपरेशन शुरू किया. पूरे इलाके को तत्काल सुरक्षा घेरे में लिया गया और आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई.

NSG Mock Drill Bhopal: आतंकी हमले की मॉक ड्रिल

आतंकियों को नेस्तनाबूत करने और बंधक बचाव का अभ्यास

मॉकड्रिल के दौरान कमांडो ने अत्यंत चुनौतीपूर्ण हालात में आतंकियों को निष्क्रिय करने और बंधकों को सुरक्षित बाहर निकालने की रणनीतियों पर अभ्यास किया. बिल्डिंग इंटरवेंशन, कमरे‑दर‑कमरे तलाशी, स्टेयरकेस और ऊंची मंजिलों पर ऑपरेशन जैसे सीन को लाइव रिक्रिएट किया गया. यह अभ्यास केवल ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सटीक रणनीति, समन्वय और तेज निर्णय क्षमता का परीक्षण भी था.

NSG Mock Drill Bhopal: भोपाल NSG मॉकड्रिल

स्थानीय पुलिस और विशेष यूनिट को दिए गए दिशा‑निर्देश

इस मॉकड्रिल का एक अहम पहलू स्थानीय पुलिस और अन्य एजेंसियों की भूमिका रही. NSG ने मध्यप्रदेश पुलिस, एटीएस, जीआरपी और आरपीएफ के जवानों को बताया कि आपात आतंकी स्थिति में किस तरह त्वरित प्रतिक्रिया देनी है. किस एजेंसी की क्या भूमिका होगी, सूचना साझा करने का तरीका क्या होगा और ग्राउंड पर को‑ऑर्डिनेशन कैसे रखा जाएगा, इन सभी बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया गया.

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बम डिस्पोजल स्क्वॉड, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड अलर्ट

मॉकड्रिल के दौरान केवल फायरिंग या बंधक बचाव ही नहीं, बल्कि संभावित विस्फोट की स्थिति को भी ध्यान में रखा गया. मध्यप्रदेश पुलिस की बीडीएनडीएस (बम डिस्पोजल एंड डिटेक्शन स्क्वॉड) टीम मौके पर तैनात रही. इसके साथ ही कई सुरक्षा वाहन, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके.

ब्लैक कमांडो देखकर दहशत, बाद में मिली राहत

ड्रिल के दौरान जब ब्लैक कमांडो हथियारों के साथ इमारत में घुसे और तेज एक्शन शुरू हुआ, तो आसपास मौजूद लोग घबरा गए. कुछ समय के लिए इलाके में सनसनी फैल गई और लोगों को लगा कि कोई वास्तविक आतंकी हमला हो गया है. हालांकि प्रशासन द्वारा मॉकड्रिल की जानकारी देने के बाद स्थिति सामान्य हुई और लोगों ने राहत की सांस ली.

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एक महीने की विशेष ट्रेनिंग का फाइनल प्रदर्शन

बताया गया कि यह मॉकड्रिल पिछले एक महीने से चल रही विशेष ट्रेनिंग का फाइनल प्रदर्शन था. इस दौरान NSG ने राज्य पुलिस की काउंटर टेररिस्ट विशेषज्ञ इकाइयों के साथ संयुक्त अभ्यास किया. इससे पहले लाल परेड मैदान में भी इसी तरह की मॉकड्रिल की गई थी, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे थे.

काउंटर टेररिज्म की हर बारीकी पर फोकस

इस संयुक्त ट्रेनिंग में काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन, बिल्डिंग इंटरवेंशन, बम डिस्पोजल, ऑफेंसिव‑डिफेंसिव रणनीति, टेक्टिकल ड्राइविंग, K9 यूनिट और वीआईपी प्रोटेक्शन जैसे अहम पहलुओं पर अभ्यास कराया गया. अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में NSG की ऐसी मॉकड्रिल मध्यप्रदेश के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलेगी.

मॉकड्रिल का मकसद: त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि समय‑समय पर देश के अलग‑अलग हिस्सों में इस तरह की मॉकड्रिल इसलिए की जाती हैं, ताकि किसी भी संभावित आतंकी खतरे की स्थिति में सुरक्षा बल बिना किसी देरी के सटीक और प्रभावी कार्रवाई कर सकें. इसका सीधा उद्देश्य आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी चूक की गुंजाइश को न्यूनतम रखना है.

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