'हिंदू-मुस्लिम मुद्दे को उभारना ठीक नहीं', भोजशाला केस में HC के फैसले पर दिग्विजय सिंह ने पकड़ी अलग लाइन

Bhojshala Case: धार के भोजशाला परिसर को लेकर हाई कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि एएसआई संरक्षित स्मारक में पूजा या इबादत की अनुमति का अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट को करना चाहिए. हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष अदालत में जाने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे मामला अब शीर्ष अदालत तक पहुंचेगा. पढ़िए पूरी खबर.

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भोजशाला विवाद: पूजा-इबादत पर फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना चाहिए - दिग्विजय सिंह

Bhojshala Case: मध्यप्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर एक बार फिर सियासत और कानूनी बहस तेज हो गई है. हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के हालिया फैसले के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि एएसआई द्वारा संरक्षित इस स्मारक में पूजा या इबादत की अनुमति का अंतिम निर्णय अब सुप्रीम कोर्ट को करना होगा. एक ओर जहां हिंदू पक्ष ने फैसले के बाद कानूनी तैयारियां तेज कर दी हैं, वहीं मुस्लिम पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कर रहा है. इस बीच राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है, जिससे यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बनता नजर आ रहा है.

हाई कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी हलचल

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ द्वारा भोजशाला परिसर को लेकर दिए गए फैसले के बाद नई बहस छिड़ गई है. अदालत के निर्णय में परिसर को वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर से जोड़कर देखा गया, जिसके बाद विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं. इस फैसले के बाद जहां हिंदू संगठनों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया, वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा कर दी है.

‘अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना चाहिए' : दिग्विजय सिंह

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि भोजशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित स्मारक है और ऐसे स्थलों में पूजा या इबादत की अनुमति का फैसला शीर्ष अदालत को करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के निर्णय का अध्ययन किया जाएगा और कानूनी पहलुओं को समझने के बाद ही आगे का रुख तय होगा. सिंह ने यह भी जोर दिया कि देश में पहले से ही ऐसे कई मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, इसलिए इस मामले में भी अंतिम निर्णय सर्वोच्च न्यायालय को ही करना होगा.

एएसआई रिपोर्ट पर उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह ने इस दौरान एएसआई की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट का भी जिक्र किया. उनका कहना था कि रिपोर्ट में वाग्देवी की मूर्ति का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जो एक महत्वपूर्ण बिंदु है. उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी विवादित स्थल के संबंध में तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर पारदर्शी निर्णय होना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न बढ़े.

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ब्रिटिश म्यूजियम में रखी वाग्देवी मूर्ति का मुद्दा

सिंह ने एक पुराना मुद्दा उठाते हुए कहा कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी वाग्देवी की मूर्ति को भारत वापस लाया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि इस दिशा में पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा भी प्रयास कर चुके हैं. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यदि यह मूर्ति वापस लाई जाती है, तो उसे कहां स्थापित किया जाए, इस विषय में उन्होंने कोई राय नहीं दी है.

हिंदू और मुस्लिम पक्ष आमने-सामने

हाई कोर्ट के फैसले के बाद हिंदू पक्ष सक्रिय हो गया है. हिंदू पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दाखिल की गई है, जिसमें अनुरोध किया गया है कि किसी भी अपील पर बिना उनकी बात सुने कोई फैसला न लिया जाए. वहीं, मुस्लिम पक्ष भी इस फैसले को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है. धार शहर के काजी वकार सादिक ने कहा है कि एएसआई रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाएगा.

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देश में अन्य विवादित स्थलों का जिक्र

दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे को व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि वाराणसी के ज्ञानवापी, मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल की जामा मस्जिद जैसे मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कानून का पालन और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान जरूरी है, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो.

‘संकट के समय धार्मिक मुद्दे उठाना उचित नहीं'

सिंह ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश इस समय आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे समय में हिंदू-मुस्लिम जैसे संवेदनशील मुद्दों को उभारना उचित नहीं है. उन्होंने सरकार और समाज से अपील की कि विकास और वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाए.

नीट विवाद पर भी सरकार पर निशाना

इस दौरान दिग्विजय सिंह ने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने इसे बड़ा घोटाला बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और एनटीए प्रमुख को हटाने की मांग की. सिंह ने कहा कि संसद की स्थायी समिति पहले ही इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने के सुझाव दे चुकी है, लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ.

नजरें अब सुप्रीम कोर्ट पर

भोजशाला विवाद अब कानूनी लड़ाई के अगले चरण में प्रवेश करता दिख रहा है. दोनों पक्षों के सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी के बीच यह साफ है कि अंतिम निर्णय अब सर्वोच्च न्यायालय के हाथ में होगा. इस बीच यह मामला केवल ऐतिहासिक या धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का भी महत्वपूर्ण विषय बनता जा रहा है.

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