- धार की भोजशाला में पूजा-अर्चना और महाआरती का आयोजन बढ़ गया है, जिससे धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि हुई है.
- मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट के आदेश को अस्वीकार करते हुए मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है.
- जुल्फीकार पठान ने कहा कि भोजशाला में पिछले लगभग आठ सौ साल से नमाज अदा होती रही है और इसे मस्जिद माना जाता है.
Dhar Bhojshala Controversy: धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद में अब नया मोड़ आ गया है. एक तरफ जहां हिंदू पक्ष पूजा-अर्चना और महाआरती को लेकर उत्साहित है, वहीं मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट के फैसले पर सख्त आपत्ति जताई है. इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष जुल्फीकार पठान ने साफ कहा है कि हाई कोर्ट का आदेश हमें स्वीकार नहीं और अब पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे.
धार की भोजशाला में इन दिनों धार्मिक गतिविधियों को लेकर हलचल बनी हुई है. यहां श्रद्धालु पूजा-पाठ, हवन और महाआरती में बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं. हाल ही में गोमूत्र से शुद्धिकरण, गर्भगृह में अखंड ज्योत जलाना और मां वाग्देवी की प्रतीकात्मक प्रतिमा स्थापना भी की गई, जिससे माहौल पूरी तरह धार्मिक रंग में नजर आ रहा है.
मुस्लिम पक्ष ने जताई नाराजगी
इसी बीच मुस्लिम समाज की ओर से भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया आई है. कमाल मौला मस्जिद नमाज इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष जुल्फीकार पठान ने कहा कि हाई कोर्ट का आदेश उन्हें स्वीकार नहीं है. उनका कहना है कि इस मामले में कई ऐसी बातें हैं, जिन्हें नजरअंदाज किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
जुल्फीकार पठान ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. उनका कहना है कि वे तथ्यों और दस्तावेजों के साथ अपनी बात रखेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि मामले की पूरी समीक्षा की जा रही है और जल्द ही कानूनी कदम उठाया जाएगा.
नमाज को लेकर रखी अपनी बात
इंतजामिया कमेटी का कहना है कि भोजशाला को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह सही नहीं हैं. उनके मुताबिक, यहां पिछले करीब 800 साल से नमाज अदा की जाती रही है. उनका दावा है कि कई सरकारी दस्तावेजों और नोटिफिकेशन में इसे मस्जिद के रूप में भी उल्लेख किया गया है.
एएसआई की भूमिका पर उठे सवाल
जुल्फीकार पठान ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि एएसआई पहले कई बार इसे मस्जिद बता चुका है, लेकिन अब इसके स्वरूप को लेकर अलग बात कही जा रही है. उनके अनुसार, इसी विरोधाभास के चलते पूरे मामले पर संदेह पैदा हो रहा है.
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