Naxal Surrender: 'लाल आतंक' से मुक्त होता छत्तीसगढ़, डेडलाइन के अंतिम दिन 4 जिलों में नक्सलियों ने डाले हथियार

Ending of Naxal: केंद्र सरकार की नक्सल को खत्म करने की डेडलाइन आज (31 मार्च, 2026) खत्म हो रही है, और इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के नक्सली सरेंडर कर रहे हैं. कांकेर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर में नक्सली पुलिस को हथियार सौंप रहे हैं.

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Anti Naxal Operation: केंद्र सरकार की नक्सल को खत्म करने की डेडलाइन आज (31 मार्च, 2026) खत्म हो रही है. उसी क्रम में पिछले कुछ दिनों से नक्सलियों के सरेंडर करने का सिलसिला जारी है. आज छत्तीसगढ़ के कांकेर, दंतेवाड़ा, सुकमा और नारायणपुर जिले में नक्सली भी सरेंडर (आत्मसमर्पण) कर पुलिस को हथियार सौंपे हैं. इससे अब लग रहा है कि छत्तीसगढ़ भी अब 'लाल आतंक' से लगभग मुक्त हो चुका है. लोकसभा में सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सल मुक्त भारत का दावा किया. हालांकि, अमित शाह ने दो जिले नक्सल से प्रभावित होने की बात कही.

कांकेर में दो नक्सलियों ने एके-47 के साथ समर्पण किया

कांकेर जिले में दो नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया. एक नक्सली के पास AK-47 भी थी. सरेंडर करने वाले हिड़मा डोडी और शंकर ने उत्तर बस्तर इलाके में सक्रिय लीडर रूपी, चन्दर व अन्य नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की है. बता दें कि कांकेर के जंगलों में लगभग 15 नक्सली अभी भी मौजूद हैं.

कांकेर में समर्पण करने वाले नक्सली

दंतेवाड़ा में 4 महिला समेत 5 नक्सलियों का सरेंडर

नक्सल खत्म करने की समय सीमा खत्म होने से पहले दंतेवाड़ा जिले में 5 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है. इनमें चार महिला नक्सली शामिल हैं. पुरुष नक्सली पांच लाख का इनामी है. वहीं, छह और नक्सली सरेंडर करने वाले हैं. सरेंडर करने वालों ने बड़ी मात्रा में हथियार गोला बारूद पुलिस को सौंप दिए हैं. बस्तर आईजी पी सुंदरराज और सीआरपीएफ के अधिकारियों के मौजूदगी में यह सरेंडर दंतेवाड़ा पुलिस लाइन कारली में करवाया गया.

दंतेवाड़ा में नक्सलियों के हथियारों की प्रदर्शनी.

सरेंडर करने वाले सभी नक्सली बीजापुर के रहने वाले

  • सोने कड़ती (5 लाख का इनामी)
  • लखमा ओयाम (1 लाख का इनामी)
  • सरिता पोडियम (1 लाख का इनामी)
  • जोगी कलमु (1 लाख का इनामी)
  • मोती ओयाम (1 लाख का इनामी)

नारायणपुर में सरेंडर

नारायणपुर जिले में माड़ डिवीजन के अंतिम बचे 2 नक्सली बड़े हथियार के साथ आत्मसर्पण कर सकते हैं. अबूझमाड़ के जंगलों से बरामद बड़ी मात्रा में नक्सली हथियार व डंप सामग्री की प्रदर्शनी भी लगाई गई है. नारायणपुर पुलिस अधीक्षक दोपहर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरेंडर नक्सलियों और डंप जानकारी दे सकते हैं.

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नारायणपुर में नक्सलियों से मिले हथियार

Naxal Free Sukma: में दो महिला नक्सलियों के सरेंडर के साथ सुकमा नक्सल मुक्त हुआ

सुकमा में भी डेडलाइन की अंतिम तारीख को भी नक्सलियों का सरेंडर जारी है. दो महिला नक्सलियों ने 6 ऑटोमेटिक हथियारों के साथ समर्पण किया है. इसके अलावा उनके पास से 10 लाख कैश रुपये और कई विस्फोट सामाग्री भी बरामद की गई है. दो AK-47, एक LMG और तीन 303 हथियार बरामद हुए हैं. सुकमा अब नक्सल मुक्त हो गया है, क्योंकि आखिरी बचे नक्सलियों ने भी समर्पण कर दिया है.

नक्सल को खत्म करने के इन तीन तारीखों को लिए गए प्रमुख फैसले

अमित शाह ने लोकसभा में सोमवार को 20 अगस्त 2019, 24 अगस्त 2024 और 31 मार्च 2026 तीन महत्वपूर्ण तारीखों का जिक्र किया. 20 अगस्त को गृह मंत्रालय में एक मीटिंग हुई और पूरा पुलिस कोऑर्डिनेशन, मॉडर्नाइजेशन, रिटायर्ड नक्सलियों को पुलिस फोर्स में लेना, इनका कोऑर्डिनेशन खुफिया एजेंसी के साथ 20 अगस्त को डिजाइन किया. ओडिशा और बिहार 2024 के पहले नक्सल मुक्त हो चुका था. झारखंड एक जिला और महाराष्ट्र एक तहसील छोड़कर 2024 के पहले नक्सल मुक्त हो चुका था.

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छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार न होने की वजह से यह राज्य नक्सल मुक्त होने से बचा हुआ था. फिर साझा रणनीति बनाई और 24 अगस्त 2024 को घोषणा की कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद पूरे देश से समाप्त कर देंगे.

अब सड़कें और मोबाइल टावर लग रहे

अमित शाह ने लोकसभा में बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2014 के बाद नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्र में 17,589 किलोमीटर सड़कें बनाने की मंजूरी दी है, जिसमें 12,000 किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं. नक्सलवाद समाप्त होने के साथ-साथ विकास भी हो रहा है. लगभग ₹6,000 करोड़ का खर्च कर 5,000 मोबाइल टावर लग चुके हैं. दो अन्य योजनाओं में और 8,000 4G टावर बनाने का लिया गया है. 12 वर्ष में 1804 बैंक शाखाएं और 1321 एटीएम खुले हैं. 37,850 बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंस बनाए गए और 6025 डाकघर खुले हैं.

नक्सल प्रभावित इलाकों और भी विकास कार्य किए

नक्सल प्रभावित इलाकों में 800 करोड़ रुपये से 259 एकलव्य आदर्श विद्यालय बनाए, इसके साथ-साथ 46 आईटीआई, 49 स्किल डेवलपमेंट सेंटर और 16 कौशल विकास केंद्र बनाए. सिविक प्रोग्राम में 212 करोड़ के कार्य किए जो स्वास्थ्य शिविर और दवाओं से जुड़े हुए हैं और जनजाति युवा एक्सचेंज के कार्यक्रम भी बनाए. सुरक्षा के लिए राज्यों की सहायता के लिए एसआरई (SRI) लेकर आए, जिसमें 10 साल में 3000 करोड़ दिए. स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम के तहत 5000 करोड़ रुपये दिए.

2014 में 126 जिले थे नक्सल से प्रभावित

नक्सल प्रभावित इलाकों में 11 साल में 596 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बने. 2014 में नक्सल प्रभावित जिले 126 थे, आज सिर्फ दो बचे हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित जिले 2014 में 35 थे, जो आज शून्य हैं. नक्सल घटनाएं दर्ज करने वाले पुलिस स्टेशन जो 350 थे, आज 60 हैं. पिछले 6 साल में 406 नए सीएपीएफ के कैंप बनाए, 68 नाइट लैंडिंग हेलीपैड बनाए, 400 बुलेट प्रूफ, ब्लास्ट प्रूफ गाड़ियां हमारे जवानों को दी गई. पांच अस्पताल जवानों के लिए बनाए गए और कम्युनिकेशन की सारी व्यवस्था दुरुस्त कर दी गईं.

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706 नक्सली मारे गए

अमित शाह ने कहा कि 2024, 2025 और 2026 का संयुक्त आंकड़ा देखें तो तीन वर्षों में मार्च 2026 तक 706 नक्सली मारे गए. साथ ही 2218 गिरफ्तार हुए हैं और 4839 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है.

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