Opium Cultivation Case Chhattisgarh: अफीम की अवैध खेती (Afeem ki kheti) के मामले में छत्तीसगढ़ में सियासत फिर गर्म हो गई है. पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने भाजपा सरकार (BJP Governmment) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस इंटेलिजेंस और राजस्व विभाग पूरी तरह फेल साबित हुए हैं. उन्होंने दावा किया कि ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार 3 मार्च को पूरे गांव को अफीम की खेती का पता चल चुका था, लेकिन प्रशासन ने तीन दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं की. साहू ने आरोप लगाया कि 5 मार्च को समोदा के सरपंच ने अफीम की तस्वीर पुलिस को भेजकर सूचना दी, फिर भी पुलिस हरकत में नहीं आई. उनके मुताबिक, 6 मार्च को जब सरपंच ने LIB को सूचना दी, तभी कार्रवाई शुरू की गई. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार की मिलीभगत से यह अवैध कारोबार फल‑फूल रहा था.
‘दोनों आरोपी पहले से अलर्ट कर दिए गए'
पूर्व मंत्री ने आशंका जताई कि अफीम खेती मामले के मुख्य आरोपी श्रवण विश्नोई और अचलाराम जाट को पहले ही जानकारी दे दी गई होगी, इसलिए वे फरार होने में सफल रहे. उन्होंने कहा कि “किसी विभाग को जानकारी न हो, यह संभव ही नहीं. पुलिस की कार्रवाई जिस तरह होनी चाहिए, वह नहीं हो रही. मामले में सिर्फ लीपापोती की जा रही है और सरकार इस मुद्दे को बेहद हल्के में ले रही है.”
अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग
ताम्रध्वज साहू ने इस मामले में विनायक ताम्रकार के भाई सहित पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि दोषियों पर “सख्त से सख्त कार्रवाई” होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई इस तरह की गतिविधि करने की हिम्मत न कर सके. पूर्व मंत्री ने बलरामपुर जिले में मिली अफीम की खेती का भी उल्लेख किया और चिंता जताई कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो छत्तीसगढ़ नशे का गढ़ बन सकता है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और सभी जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच हो.
पूर्व CM भूपेश बघेल ने ऐसे घेरा
सरकार और प्रशासन के लिए बड़े सवाल
इस मामले ने राज्य की कानून‑व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि ग्रामीणों द्वारा बार‑बार सूचना देने के बावजूद पुलिस और प्रशासन ने समय पर कार्रवाई नहीं की. विपक्ष का कहना है कि यदि सूचना मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई होती, तो आरोपी पकड़े जा सकते थे और अफीम की बड़े पैमाने पर हो रही खेती का विस्तार रोका जा सकता था.
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